January 15, 2026

उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा का नया अध्याय: मदरसा बोर्ड रद्द, शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना

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उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा का नया अध्याय: मदरसा बोर्ड रद्द, शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना
उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा का नया अध्याय: मदरसा बोर्ड रद्द, शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना

देहरादून, 20 अगस्त 2025: उत्तराखंड सरकार ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य के मदरसा बोर्ड को रद्द कर इसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव त्रिमंडल द्वारा पारित किया गया। यह निर्णय अल्पसंख्यक शिक्षा को अधिक समग्र, आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राज्य सरकार के अनुसार, नया प्राधिकरण मदरसाओं और अल्पसंख्यक स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, पाठ्यक्रम सुधारने और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने का काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इसे समयोचित और प्रभावी कदम करार दिया है।


मदरसा बोर्ड का रद्द होना: कारण और पृष्ठभूमि

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड दशकों से अल्पसंख्यक शिक्षा का संचालन करता रहा है। हालांकि, विभिन्न मामलों में पाठ्यक्रम, प्रशासनिक कार्य और वित्तीय पारदर्शिता में कई कमियाँ सामने आईं।

त्रिमंडल ने कहा कि राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा को आधुनिक दृष्टिकोण और प्रभावी संरचना देने के लिए बोर्ड को रद्द करना आवश्यक था।

नए प्राधिकरण के तहत धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य शिक्षा, विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और भाषाओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इससे छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक अध्ययन का संतुलन मिलेगा।


अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ढांचा और कार्य

नए प्राधिकरण की संरचना में शामिल होंगे:

  • शिक्षा विशेषज्ञ

  • समाजसेवी और समुदाय प्रतिनिधि

  • प्रशासनिक अधिकारी

  • तकनीकी सलाहकार

प्राधिकरण के प्रमुख कार्य होंगे:

  1. मदरसाओं और अल्पसंख्यक स्कूलों में मानक पाठ्यक्रम लागू करना

  2. शिक्षक प्रशिक्षण और मूल्यांकन के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित करना

  3. वित्तीय सहायता, छात्रवृत्ति और अनुदान में पारदर्शिता सुनिश्चित करना

  4. आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना


राजनीतिक प्रतिक्रिया और बहस

इस प्रस्ताव को राज्य में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देखा गया। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार के लिए आवश्यक कदम बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में देखा।

वहीं, अल्पसंख्यक संगठनों ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया और कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य को मजबूती मिलेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय शिक्षा सुधार के लिए निर्णायक है और आने वाले वर्षों में राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा को नए आयाम प्रदान करेगा।


विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने कहा,
“मदरसा बोर्ड के कार्य में कई कमियाँ थीं। नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहा रानी ने कहा,
“अल्पसंख्यक शिक्षा में आधुनिक दृष्टिकोण लाना आवश्यक है। यह प्राधिकरण छात्रों के विकास और कौशल निर्माण में मदद करेगा।”


छात्रों और अभिभावकों के लिए लाभ

  • अद्यतन पाठ्यक्रम: धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों को जोड़ना

  • शिक्षक प्रशिक्षण: प्रशिक्षित शिक्षक और आधुनिक शिक्षण तकनीक

  • छात्रवृत्ति और अनुदान: आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए सहायता

  • डिजिटल शिक्षा: ऑनलाइन और कंप्यूटर आधारित शिक्षा का समावेश

  • सांस्कृतिक और सामाजिक विकास: विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्यक्रम


भविष्य की योजनाएँ

त्रिमंडल ने घोषणा की है कि नया प्राधिकरण अगले शैक्षणिक सत्र से पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा। सभी मदरसाओं और अल्पसंख्यक स्कूलों को प्राधिकरण के नियमों के अनुसार संचालन करना होगा।

प्राधिकरण हर वर्ष शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट जारी करेगा और सुधार के लिए सुझाव देगा। इसके अलावा, शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के कार्यक्रम चलाए जाएंगे।


राज्य में शिक्षा का समग्र प्रभाव

इस निर्णय से उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनेगी। छात्रों को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और धार्मिक अध्ययन का संतुलित अनुभव मिलेगा।

स्थानीय समुदायों को शिक्षा के क्षेत्र में अधिक स्वायत्तता और अवसर मिलेंगे। इससे राज्य की शिक्षा प्रणाली और सामाजिक संरचना दोनों में सुधार होगा।


दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को रद्द कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना राज्य में शिक्षा सुधार और आधुनिक दृष्टिकोण लाने का ऐतिहासिक कदम है।

यह निर्णय न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि छात्रों के उज्जवल भविष्य, पारदर्शिता और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगा।