February 22, 2026

देहरादून में फर्जी आयुर्वेदिक दवा फैक्ट्री का खुलासा, देशभर में भेजी जा रही थीं मिलावटी दवाइयां

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दैनिक प्रभातवाणी
देहरादून, उत्तराखंड | 22 फरवरी 2026

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय और उत्तराखंड आयुष विभाग की संयुक्त कार्रवाई में सहस्त्रधारा रोड स्थित एक अवैध दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है, जहां से कई वर्षों से कथित रूप से मिलावटी दवाइयों को देशभर में भेजा जा रहा था। यह कार्रवाई उस समय हुई जब विभाग को इस केंद्र के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई और प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आई।

जानकारी के अनुसार सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र में संचालित “त्रिफला हर्बल सेंटर” नामक संस्थान पिछले कई सालों से आयुर्वेदिक क्लीनिक और दवा निर्माण केंद्र के रूप में काम कर रहा था। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य क्लीनिक जैसा दिखाई देता था, लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार इसके अंदर बड़े स्तर पर अवैध तरीके से दवाइयां तैयार की जा रही थीं। बताया जा रहा है कि यहां तैयार की गई दवाइयों को ऑनलाइन माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था।

कार्रवाई के दौरान केंद्रीय आयुष मंत्रालय की टीम ने उत्तराखंड आयुष विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर परिसर में छापा मारा। छापेमारी के दौरान टीम को भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां, तैयार पैकिंग सामग्री, लेबल लगी बोतलें और दवा बनाने से संबंधित उपकरण मिले। इसके अलावा मौके से लगभग एक करोड़ रुपये की नकदी भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार यह नकदी दवाओं की बिक्री से संबंधित हो सकती है, जिसकी जांच की जा रही है।

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। क्लीनिक का संचालक खुद को आयुष पद्धति का चिकित्सक बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था, जबकि उसके पास इस क्षेत्र की कोई मान्य डिग्री या लाइसेंस नहीं पाया गया। बताया जा रहा है कि वह एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ होने का दावा करता था और इसी आधार पर मरीजों को परामर्श देता था। इतना ही नहीं, शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर बीमारियों के लिए भी दवाइयां और इलाज बताता था, जो कि नियमों के खिलाफ है।

प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि यह गतिविधि पिछले लगभग पांच वर्षों से चल रही थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में कथित आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाइयों की सप्लाई देश के विभिन्न हिस्सों में की गई। अधिकारियों को आशंका है कि इन दवाइयों में अन्य चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं या रसायनों की मिलावट भी की गई हो सकती है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी कारण जांच टीम दवाओं के नमूने अपने साथ लेकर गई है, जिन्हें प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।

उत्तराखंड आयुष विभाग के अधिकारियों ने मौके पर मौजूद सभी दवाओं को जब्त कर लिया है और पूरे परिसर को सील कर दिया गया है। साथ ही क्लीनिक से जुड़े दस्तावेजों, कंप्यूटर रिकॉर्ड और ऑनलाइन ऑर्डर से संबंधित जानकारी भी जांच के दायरे में ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी पद्धतियां लंबे समय से लोगों के भरोसे का हिस्सा रही हैं, लेकिन कुछ लोग अवैध लाभ कमाने के लिए इनका गलत इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि असली और प्रमाणित चिकित्सा प्रणाली की साख बनी रहे।

सरकार की ओर से आयुष क्षेत्र को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। योग, पंचकर्म और आयुर्वेदिक उपचार को देश और विदेश में लोकप्रिय बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसे समय में यदि फर्जी क्लीनिक और मिलावटी दवाओं का कारोबार सामने आता है तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि दवाइयों की सप्लाई किन-किन राज्यों में की गई और इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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