धर्म की आड़ में छलावा:operation kalnemi uttarakhand’ में 25 फर्जी सद्गुरु गिरफ्तार, एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 12 जुलाई 2025
धर्म की आड़ में छलावा: ऑपरेशन ‘कालनेमि’ में 25 फर्जी सद्गुरु गिरफ्तार, एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल
देहरादून पुलिस ने एक बड़े खुलासे के तहत ‘ऑपरेशन कालनेमि’ चलाकर 25 ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लिया है, जो स्वयं को ‘सद्गुरु’, ‘धार्मिक गुरु’, ‘जाग्रत संत’ आदि के रूप में प्रचारित कर रहे थे। जांच में यह सामने आया है कि ये लोग धर्म और अध्यात्म के नाम पर भोली-भाली जनता को भ्रमित कर आर्थिक ठगी में लिप्त थे। इस गिरोह में एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल पाया गया है, जिसने फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए भारत में रहकर धार्मिक मंचों का लाभ उठाया।
गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि विगत कुछ महीनों से शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में कुछ कथित संतों की गतिविधियों को लेकर संदेह जताया जा रहा था। इन स्वयंभू गुरुओं के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही थीं, जिनमें लोगों ने बताया कि ये व्यक्ति चमत्कार, भाग्य बदलने, जीवन में सुख-शांति दिलाने और रोगों से छुटकारा दिलाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठते थे।
इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए देहरादून पुलिस ने ‘ऑपरेशन कालनेमि’ नामक एक विशेष अभियान शुरू किया। ऑपरेशन का नाम ‘कालनेमि’ उस पौराणिक दानव के नाम पर रखा गया जो स्वयं को ऋषि बताकर श्रीराम के भक्त हनुमान को भ्रमित करने का प्रयास करता है।
धर्म का व्यापार बन गया था रोज़गार
पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ये लोग बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से धर्म का बाज़ारीकरण कर रहे थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, यूट्यूब चैनल्स और इंस्टाग्राम पेजों के माध्यम से ये स्वयं को सिद्ध गुरु, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और जीवन परिवर्तन करने वाले योगी घोषित कर लोगों को जोड़ते थे।
इनमें से अधिकांश ने अलग-अलग शहरों में अपने ‘आश्रम’, ‘ध्यान केंद्र’ और ‘गुरुकुल’ स्थापित कर रखे थे। ये जगहें वास्तव में भव्यता और दिखावे का केंद्र थीं, जहां आकर्षक पोशाकों में, विशेष मंचों पर प्रवचन देकर लोगों को सम्मोहित किया जाता था। इसके बाद भक्तों से चढ़ावे, दान और “कर्म सुधार अनुष्ठान” के नाम पर लाखों रुपये की उगाही की जाती थी।
बांग्लादेशी नागरिक भी गिरोह में शामिल
पुलिस को एक बड़ी सफलता उस समय मिली जब पूछताछ के दौरान यह पता चला कि पकड़े गए 25 लोगों में एक व्यक्ति बांग्लादेश का नागरिक है, जिसने फर्जी आधार और अन्य पहचान पत्र तैयार कर भारत में धर्म प्रचारक बनकर वर्षों से लोगों को ठगने का कार्य किया। इस व्यक्ति का नाम मोहम्मद माजिद बताया गया है, जो स्वयं को ‘बाबा आनंदप्रकाश’ के नाम से प्रचारित कर रहा था।
महिलाओं और युवाओं को बनाया जा रहा था निशाना
इस गिरोह की विशेष रणनीति थी कि वे विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को अपने झांसे में लेते थे। आध्यात्मिक शांति, विवाह में बाधा, नौकरी और विदेश यात्रा में सफलता दिलाने के नाम पर ये लोग विशिष्ट पूजा-पाठ और ‘गुप्त तांत्रिक अनुष्ठानों’ की बात करते थे। इसके बदले हजारों से लाखों रुपये की मांग की जाती थी। कई पीड़ितों ने बताया कि कुछ जगहों पर महिलाओं से मानसिक और भावनात्मक शोषण तक किया गया।
कैसे हुआ पर्दाफाश?
पुलिस ने 3 महीनों तक इस गिरोह पर नजर रखी। खुफिया निगरानी, मुखबिरों की मदद और डिजिटल ट्रैकिंग के ज़रिए इन लोगों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया। इनकी सोशल मीडिया उपस्थिति, वीडियो कंटेंट, वेबसाइट्स और बैंक लेन-देन की जांच के बाद जब पर्याप्त सबूत इकट्ठा हो गए, तब बीते गुरुवार देर रात एक साथ 7 ठिकानों पर छापेमारी की गई।
इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी, धार्मिक प्रतीक चिह्न, तांत्रिक सामग्री, फर्जी दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल और डिवाइस जब्त किए गए हैं।
साइबर सेल और ATS भी जांच में शामिल
गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से अब गहन पूछताछ की जा रही है। चूंकि मामला धर्म, अंतरराष्ट्रीय नागरिकता और ठगी से जुड़ा है, इसलिए साइबर सेल के अलावा उत्तराखंड एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) को भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों और कुछ विदेशों तक भी फैले हो सकते हैं।
आगे की कार्रवाई
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 295A, और 120B के तहत केस दर्ज किया गया है। विदेशी नागरिक के खिलाफ फॉरेनर्स एक्ट के तहत अलग से मामला दर्ज किया गया है। न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद सभी आरोपियों की संपत्ति और खातों की जांच भी की जाएगी।
जनता से अपील
पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तथाकथित ‘गुरु’ या ‘बाबा’ के जाल में न फंसे। कोई भी चमत्कार या गुप्त उपाय का दावा करने वाले लोगों से सावधान रहें। यदि किसी को ऐसा संदेह हो तो तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें।
दैनिक प्रभातवाणी
‘ऑपरेशन कालनेमि’ देहरादून पुलिस की एक साहसिक और योजनाबद्ध कार्रवाई थी, जिसने धर्म के नाम पर चल रहे एक संगठित ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह कार्रवाई न केवल अपराधियों को बेनकाब करती है, बल्कि समाज को यह भी सिखाती है कि अंधविश्वास और आस्था के नाम पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है।