January 15, 2026

पिथौरागढ़ में एनएचपीसी धौलीगंगा प्रोजेक्ट सुरंग में भूस्खलन: 19 कर्मचारी फंसे, पूरी राबचावहत कार्य में सफल

पिथौरागढ़ में एनएचपीसी धौलीगंगा प्रोजेक्ट सुरंग में भूस्खलन: 19 कर्मचारी फंसे, पूरी राबचावहत कार्य में सफल

पिथौरागढ़ में एनएचपीसी धौलीगंगा प्रोजेक्ट सुरंग में भूस्खलन: 19 कर्मचारी फंसे, पूरी राबचावहत कार्य में सफल

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पिथौरागढ़, उत्तराखंड (1 सितंबर 2025) – रविवार, 31 अगस्त 2025 को पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र स्थित एनएचपीसी के धौलीगंगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में एक भूस्खलन ने सनसनी फैला दी। घटना उस समय हुई जब सुरंग में काम कर रहे 19 कर्मचारी अचानक मलबे और बोल्डरों से घिरे हुए फंस गए। सुरंग का मुहाना पूरी तरह से बंद हो गया था, जिससे अंदर फंसे कर्मचारियों की स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।

सुरंग में फंसे कर्मचारियों में इंजीनियर, तकनीकी कर्मी और सुरक्षा टीम के सदस्य शामिल थे। घटना रविवार शाम लगभग 5 बजे हुई, जब भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्र में भू-स्खलन हुआ। स्थानीय लोग और परियोजना अधिकारियों ने बताया कि मलबे और बोल्डरों ने सुरंग के मुख्य प्रवेश द्वार और आपातकालीन शाफ्ट को अवरुद्ध कर दिया, जिससे कर्मचारियों का तुरंत बाहर निकलना असंभव हो गया।

हालांकि, राहत की एक बड़ी खबर यह है कि सभी 19 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पहले आठ कर्मचारियों को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया और शेष 11 कर्मियों को सुरक्षित बचाव ऑपरेशन के दौरान बाहर लाया गया। इस कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सीआईएसएफ (CISF) और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमों ने भाग लिया।

भूस्खलन के तुरंत बाद परियोजना प्रबंधन और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने राहत कार्य शुरू कर दिया। सुरंग में फंसे कर्मियों तक पहुँचने के लिए विशेष उपकरण और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय प्रशासन ने भी फंसे कर्मचारियों तक आवश्यक आपूर्ति पहुंचाने के लिए आपातकालीन व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान में कोई भी कर्मचारी घायल नहीं हुआ और सभी को चिकित्सकीय जांच के बाद सुरक्षित घर भेजा गया।

धौलीगंगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, जो 2005 में चालू हुआ था, उत्तराखंड के पूर्वी कुमाऊं हिमालय क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र मानसून के दौरान भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील माना जाता है। परियोजना का संचालन पिछले कई वर्षों में कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है। 2013 और 2021 में भी इसी परियोजना को भारी बारिश और भूस्खलन के कारण नुकसान उठाना पड़ा था।

भूस्खलन के दौरान सुरंग में फंसे कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पावर हाउस की संचालन व्यवस्था भी जारी रखी गई। अधिकारियों ने बताया कि सभी कर्मी प्रशासन और कंपनी अधिकारियों के संपर्क में थे, जिससे राहत कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सका।

राज्य सरकार ने भी इस घटना के मद्देनजर मानसून से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अलर्ट जारी किया है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि भूस्खलन और जलभराव जैसी घटनाओं के दौरान राहत कार्यों में तेजी लाई जाए। अधिकारियों का कहना है कि राज्य के कई पहाड़ी क्षेत्रों में अब भी सड़कें और ग्रामीण मार्ग अवरुद्ध हैं, लेकिन राहत और पुनर्स्थापन कार्य तेजी से जारी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि धौलीगंगा और आसपास के क्षेत्र में भूस्खलन की संभावना हमेशा बनी रहती है। भारी वर्षा के दौरान पहाड़ी ढलानों की मिट्टी और चट्टानें अस्थिर हो जाती हैं, जिससे ऐसे हादसों की संभावना बढ़ जाती है। एनएचपीसी और स्थानीय प्रशासन ने इस क्षेत्र में भूस्खलन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया है, जो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

स्थानीय निवासियों ने राहत कार्यों की सराहना की है। उन्होंने बताया कि घटना के समय सुरंग के पास मौजूद लोग तुरंत कर्मचारियों की मदद के लिए जुट गए। स्थानीय प्रशासन और एनएचपीसी के संयुक्त प्रयासों ने 19 कर्मियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।

भूस्खलन के तुरंत बाद एनएचपीसी ने परियोजना क्षेत्र के आसपास के निवासियों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना राज्य के भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और आपदा प्रबंधन के महत्व को उजागर करती है।

इस घटना से यह भी स्पष्ट हुआ कि उत्तराखंड के पूर्वी कुमाऊं हिमालय क्षेत्र में परियोजनाओं का संचालन हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों, आपदा प्रबंधन रणनीतियों और त्वरित राहत कार्यों की आवश्यकता है।

अंत में, यह घटना एक प्रेरक उदाहरण है कि कैसे मानव प्रयास, तकनीकी सहायता और प्रशासनिक तत्परता मिलकर जीवन रक्षात्मक साबित हो सकते हैं। सुरंग में फंसे कर्मियों का सुरक्षित बाहर निकलना न केवल उनके परिवारों के लिए राहत का कारण बना, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर बन गया।