पुलिस ने जिसे मृत मान लिया था, वह अदालत में आत्मसमर्पण कर गया

डर्बरू, 27 अगस्त 2025 (दैनिक प्रभातवाणी)।
डर्बरू क्षेत्र में बीबीए छात्र की हत्या का सनसनीखेज मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जिस आरोपी को पुलिस और परिजन अब तक मृत मान बैठे थे, वह अचानक जिंदा सामने आ गया है। पिछले साल हत्या के बाद आरोपी ने कथित तौर पर नदी में छलांग लगाई थी और तभी से उसे मृत मान लिया गया था। लेकिन अब वह अदालत में स्वयं हाजिर होकर नाबालिग होने का दावा कर रहा है। यह चौंकाने वाला घटनाक्रम न केवल पीड़ित परिवार बल्कि पूरे इलाके को हिला गया है।
घटना की पृष्ठभूमि
पिछले वर्ष डर्बरू कस्बे के एक प्रतिष्ठित कॉलेज का बीबीए छात्र रहस्यमयी हालात में मृत पाया गया था। जांच में सामने आया कि उसका विवाद कॉलेज के ही एक युवक से हुआ था, जिसके बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव फैला दिया था और लोगों ने आरोपी की गिरफ्तारी की जोरदार मांग की थी।
हत्या के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए नदियों और जंगलों तक में अभियान चलाया। तभी जानकारी मिली कि आरोपी ने नदी में छलांग लगा दी है। कई दिनों तक गोताखोरों ने तलाश की, लेकिन कोई शव नहीं मिला। नतीजतन पुलिस ने यह मान लिया कि आरोपी नदी की तेज धारा में बहकर मर गया। परिजन और स्थानीय लोग भी इस धारणा को स्वीकार कर बैठे।
अदालत में आत्मसमर्पण
करीब एक साल तक फरारी काटने के बाद आरोपी अचानक अदालत में हाजिर हो गया। उसने न्यायाधीश के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए कहा कि वह नाबालिग है और किशोर न्याय अधिनियम के तहत उसकी सुनवाई होनी चाहिए। अदालत ने तत्काल उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया और उसकी उम्र की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया।
आरोपी का कहना है कि उसकी उम्र 18 साल से कम है और वह एक “बच्चा” है। इस बयान ने पीड़ित परिवार और पुलिस दोनों को हैरत में डाल दिया है।
पुलिस के लिए बड़ा झटका
आरोपी का इस तरह अचानक सामने आना पुलिस के लिए किसी झटके से कम नहीं है। पुलिस ने केस की फाइल लगभग ठंडी कर दी थी और आरोपी को मृत मानकर आगे की कार्रवाई भी धीमी कर दी थी। अब इस आत्मसमर्पण के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस अधिकारी स्वीकारते हैं कि आरोपी को कस्टडी में लेकर पूछताछ की जाएगी। अधिकारी का कहना है, “हमें यह जानना होगा कि वह इतने समय तक कहाँ रहा और किन लोगों ने उसे शरण दी। अगर किसी ने जानबूझकर आरोपी को छिपाने में मदद की है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।”
पीड़ित परिवार में आक्रोश
मृतक छात्र के परिजन आरोपी के जिंदा सामने आने से स्तब्ध और आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि पुलिस की ढिलाई ने पूरे मामले को कमजोर कर दिया।
परिजनों ने कहा, “अगर पुलिस ने गंभीरता से तलाश की होती तो आरोपी कब का पकड़ में आ जाता। अब वह अदालत में नाबालिग बनने का नाटक कर रहा है, ताकि सजा से बच सके। यह हमारे बेटे की आत्मा के साथ अन्याय है।”
न्यायिक प्रक्रिया में नया अध्याय
अब यह मामला पूरी तरह से अदालत के पाले में है। आरोपी की उम्र का निर्धारण मेडिकल बोर्ड करेगा। अगर मेडिकल रिपोर्ट में आरोपी नाबालिग पाया जाता है तो केस किशोर न्याय बोर्ड को सौंपा जाएगा। वहीं अगर वह वयस्क साबित होता है, तो सामान्य आपराधिक अदालत में सुनवाई होगी और उसे सख्त सजा मिल सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आरोपी का “नाबालिग” होने का दावा केवल सजा कम करवाने की एक चाल भी हो सकता है। अधिवक्ता राजेश चौहान कहते हैं, “किशोर न्याय अधिनियम का प्रावधान अपराधियों के पुनर्वास के लिए है, लेकिन कई गंभीर मामलों में आरोपी इस कानून का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। अदालत को बेहद सावधानी से आरोपी की उम्र का निर्धारण करना होगा।”
समाज में चर्चा
डर्बरू क्षेत्र में यह मामला चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। लोग हैरान हैं कि आरोपी इतने लंबे समय तक कैसे छिपा रहा और पुलिस उसे खोज क्यों नहीं सकी।
एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, “हमें तो लगता था मामला खत्म हो गया। लेकिन अब आरोपी का सामने आना पुलिस की लापरवाही को उजागर करता है।”
कई छात्र संगठनों ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि अगर आरोपी नाबालिग भी है तो भी हत्या जैसे जघन्य अपराध पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञ की राय
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक रौतेला का कहना है, “यह मामला केवल एक हत्या का नहीं है, बल्कि यह न्याय प्रणाली के लिए भी कसौटी है। आरोपी की उम्र का सत्यापन बेहद जरूरी है। अगर वह वास्तव में नाबालिग है तो भी अदालत यह देख सकती है कि अपराध कितना गंभीर है। किशोर न्याय कानून में यह प्रावधान है कि 16 से 18 वर्ष के आरोपी को विशेष परिस्थितियों में वयस्क मानकर भी ट्रायल चलाया जा सकता है।”
सुरक्षा व पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
यह घटना पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बिना शव मिले आरोपी को मृत मान लेना किस हद तक उचित था? क्या पुलिस ने केवल कयासों के आधार पर जांच पूरी कर दी? यह ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अभी बाकी हैं।
टाइमलाइन : डर्बरू हत्या केस
अगस्त 2024 – डर्बरू कस्बे में बीबीए छात्र की हत्या।
सितंबर 2024 – आरोपी के नदी में कूदने की सूचना, शव बरामद नहीं।
अक्टूबर 2024 – जून 2025 – आरोपी को मृत मानकर जांच धीमी।
अगस्त 2025 – आरोपी अदालत में आत्मसमर्पण करता है और स्वयं को नाबालिग बताता है।
दैनिक प्रभातवाणी
डर्बरू हत्या कांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्यप्रणाली, न्याय व्यवस्था और अपराधियों की मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। आरोपी का अदालत में आत्मसमर्पण इस केस का नया अध्याय है। अब सबकी निगाहें न्यायालय पर टिकी हैं, जो आरोपी की उम्र और अपराध दोनों पर निर्णय लेगा।
पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, जबकि समाज यह सोचने पर मजबूर है कि अपराधियों को छिपाने वाले तंत्र को कब तक नजरअंदाज किया जाएगा।