भीमताल डैम में दरार : नैनीताल प्रशासन सतर्क, आपदा प्रबंधन ने बढ़ाई निगरानी

भीमताल डैम में दरार : नैनीताल प्रशासन सतर्क, आपदा प्रबंधन ने बढ़ाई निगरानी
नैनीताल, 27 अगस्त (दैनिक प्रभातवाणी)।
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध भीमताल डैम में दरारें आने की खबर ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। झील और बैराज के किनारे रहने वाले लोग भयभीत हैं और प्रशासन ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए निगरानी बढ़ा दी है। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आपदा प्रबंधन विभाग ने टीमों को अलर्ट कर दिया है और लगातार तकनीकी परीक्षण किए जा रहे हैं।
भीमताल डैम का महत्व
भीमताल झील न केवल नैनीताल जिले की पहचान है, बल्कि पूरे कुमाऊं क्षेत्र की जीवनरेखा भी मानी जाती है। झील से बने बैराज के माध्यम से पानी की आपूर्ति, सिंचाई और पर्यटन तीनों का संचालन होता है। यह डैम कई दशकों पहले बनाया गया था और तब से यह स्थानीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है। गर्मियों में हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं और झील का सौंदर्य देखने के लिए नाव की सवारी करते हैं। लेकिन अब इस बैराज में आई दरारों की खबर ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
दरार की खबर और तत्काल प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार, बैराज की दीवार पर हल्की लेकिन स्पष्ट दरारें देखी गईं। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दी। इसके बाद जल संस्थान और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीम मौके पर पहुँची और जांच शुरू की। अधिकारियों ने माना है कि डैम की सतह पर दरारें हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
नैनीताल जिला प्रशासन ने कहा है कि अभी किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे चौबीसों घंटे निगरानी रखें और किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
आपदा प्रबंधन विभाग की सक्रियता
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग (USDMA) ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग की विशेष टीम को डैम पर तैनात किया गया है। साथ ही, इंजीनियरों और हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों की टीम भी झील और बैराज की संरचना का अध्ययन कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान जल स्तर बढ़ने से पुराने बांधों पर दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। अगर समय रहते दरारों की मरम्मत नहीं की गई, तो रिसाव की समस्या गंभीर हो सकती है।
स्थानीय निवासियों में भय का माहौल
बैराज से लगे गांवों में लोगों में दहशत का माहौल है। एक स्थानीय दुकानदार ने दैनिक प्रभातवाणी को बताया, “हम रोज इसी डैम के पास रहते हैं। अगर यह टूट गया तो पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा। सरकार को तुरंत पुख्ता इंतज़ाम करने चाहिए।”
एक अन्य निवासी ने कहा कि प्रशासन हर बार सिर्फ आश्वासन देता है, लेकिन असली मरम्मत के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते। लोगों की मांग है कि झील और डैम की व्यापक तकनीकी जाँच कराई जाए और सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जाए।
पर्यटकों की चिंता
भीमताल झील देश-विदेश से आने वाले सैलानियों का प्रमुख आकर्षण है। बैराज में दरार की खबर सुनते ही पर्यटकों में भी चिंता बढ़ गई। कई पर्यटक असमंजस में हैं कि क्या झील की सैर करना सुरक्षित है या नहीं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग कह रहे हैं कि अगर इस समस्या का समाधान तुरंत नहीं किया गया, तो पर्यटन पर गहरा असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों की चेतावनी
हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों और सिविल इंजीनियरों का मानना है कि डैम में दरार का दिखना एक बड़ा संकेत है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार—
मानसून के दौरान लगातार दबाव झेलने से बैराज की दीवार कमजोर हो सकती है।
यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो पानी का रिसाव धीरे-धीरे बढ़ सकता है।
लंबे समय में यह दरार बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को झीलों और डैम्स की नियमित तकनीकी जाँच अनिवार्य करनी चाहिए।
प्रशासनिक कदम
नैनीताल के जिलाधिकारी ने मीडिया को बताया कि अभी खतरे की कोई बड़ी संभावना नहीं है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पानी के स्तर पर विशेष नजर रखी जा रही है और अगर खतरा बढ़ा तो झील का जलस्तर नियंत्रित करने के लिए पानी छोड़ा जा सकता है।
इसके साथ ही, पुलिस और प्रशासन ने आसपास के इलाकों में जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। लोगों को सतर्क रहने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है।
ऐतिहासिक नजरिया : पहले भी उठ चुके हैं सवाल
भीमताल डैम कोई पहली बार सवालों के घेरे में नहीं आया है। इससे पहले भी समय-समय पर झील की सुरक्षा और संरचना को लेकर बहस होती रही है। विशेषज्ञ कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि झीलों और बैराजों की उम्र बढ़ चुकी है और समय रहते उनकी मरम्मत बेहद जरूरी है।
पिछले एक दशक में नैनीताल और भीमताल क्षेत्र में हो रहे अनियंत्रित निर्माण और बढ़ते पर्यटन ने भी डैम और झीलों पर दबाव बढ़ाया है।
आपदा की आशंका और पुनर्वास योजना
अगर दरार गहरी हुई और बैराज को नुकसान पहुंचा, तो भीमताल कस्बे के साथ-साथ आसपास के गांव भी प्रभावित होंगे। आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा है कि फिलहाल खतरे का स्तर कम है, लेकिन वे हर स्थिति के लिए तैयार हैं।
प्रशासन ने संभावित पुनर्वास की योजना भी तैयार रखी है। अगर हालात बिगड़े, तो निचले इलाकों के लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।
केंद्र सरकार से मदद की उम्मीद
उत्तराखंड सरकार ने केंद्र से भी विशेषज्ञ टीम और अतिरिक्त धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजें।
भविष्य की राह
भीमताल डैम की दरार केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि पूरे राज्य की जल संरचना और आपदा प्रबंधन प्रणाली के लिए चेतावनी है। यह घटना बताती है कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में जलाशयों और डैम्स की नियमित देखरेख कितनी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
राज्य सरकार को हर झील और डैम का स्ट्रक्चरल हेल्थ ऑडिट कराना चाहिए।
पुराने बांधों की मरम्मत और मजबूती पर विशेष ध्यान देना होगा।
पर्यटन और विकास कार्यों में पारिस्थितिक संतुलन का ध्यान रखना अनिवार्य है।
स्थानीय लोगों की अपील
भीमताल के लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि डैम की मरम्मत जल्द से जल्द हो, ताकि उनका भय दूर हो सके।
एक महिला निवासी ने कहा, “हमारे बच्चे इसी डैम के पास खेलते हैं। हमें डर है कि कहीं अचानक कोई हादसा न हो जाए। सरकार को हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाह
दैनिक प्रभातवाणी
भीमताल डैम में आई दरारें फिलहाल छोटी हो सकती हैं, लेकिन यह उत्तराखंड की संवेदनशील भूगोल और आपदा संभावनाओं की बड़ी चेतावनी हैं। राज्य सरकार और प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है, विशेषज्ञ टीमें काम कर रही हैं और लोगों को आश्वासन दिया जा रहा है। लेकिन असली चुनौती है – समय रहते ठोस कदम उठाना, ताकि भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी से बचा जा सके।