अब BSE-NSE पर एक जैसा कॉन्ट्रैक्ट नोट: SEBI का बड़ा फैसला, ट्रेडिंग होगी और आसान

अब BSE-NSE पर एक जैसा कॉन्ट्रैक्ट नोट: SEBI का बड़ा फैसला, ट्रेडिंग होगी और आसान
नई दिल्ली। शेयर बाजार में पारदर्शिता और संचालन की सरलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने आज घोषणा की कि अब BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) दोनों पर ट्रेडिंग के लिए निवेशकों को एक ही फॉर्मेट में कॉन्ट्रैक्ट नोट जारी किया जाएगा।
SEBI के इस फैसले का उद्देश्य निवेशकों के लिए ट्रेडिंग से जुड़े दस्तावेजों को सरल बनाना, अनुपालन में सहूलियत देना और वित्तीय प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाना है।
क्या है कॉन्ट्रैक्ट नोट?
कॉन्ट्रैक्ट नोट वह आधिकारिक दस्तावेज होता है जो किसी निवेशक को उसके द्वारा की गई ट्रेडिंग की पुष्टि के रूप में मिलता है। इसमें ट्रेड का विवरण, ब्रोकरेज, टैक्स आदि शामिल होता है। पहले, अलग-अलग एक्सचेंजों (जैसे BSE और NSE) पर अलग-अलग फॉर्मेट होते थे, जिससे निवेशकों और ब्रोकर्स को एकरूपता नहीं मिलती थी।
नए नियम के प्रमुख लाभ:
सिस्टम की सरलता – निवेशक अब दोनों एक्सचेंजों के लिए एक जैसा फॉर्मेट देख पाएंगे, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी।
लागत में कटौती – ब्रोकरेज कंपनियों को अब दो फॉर्मेट नहीं संभालने होंगे, जिससे प्रशासनिक खर्च कम होंगे।
अनुपालन में सहूलियत – एक समान कॉन्ट्रैक्ट नोट से टैक्स ऑडिट, क्लेम और शिकायतों के समाधान में आसानी होगी।
अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल – यह बदलाव भारत की वित्तीय पारदर्शिता और ग्लोबल इन्वेस्टर फ्रेंडली माहौल को मजबूत करेगा।
निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
निवेशकों को ट्रेड के बाद जो ईमेल या डॉक्यूमेंट मिलता है, उसका डिज़ाइन और जानकारी का प्रस्तुतीकरण अब NSE और BSE दोनों के लिए एक जैसा होगा।
यह नियम सभी ब्रोकर हाउस और डीमैट सेवा प्रदाताओं पर लागू होगा।
बदलाव अगले तिमाही से लागू किया जाएगा। इसके लिए सभी ब्रोकर्स को पहले ही दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।
SEBI ने क्या कहा?
SEBI ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “एकीकृत कॉन्ट्रैक्ट नोट से निवेशकों के लिए जानकारी स्पष्ट और भरोसेमंद बनेगी। इससे भारत का वित्तीय बाज़ार अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनेगा।”
🖋️ रिपोर्ट: दैनिक प्रभातवाणी व्यापार संवाददाता
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