Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी डेस्क | अल्मोड़ा | 5 मार्च 2026अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर क्षेत्र से साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने खुद को महिला पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को तीन दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और उससे लाखों रुपये ठग लिए। इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता पैदा कर दी है और पुलिस ने लोगों से इस तरह के फोन कॉल और ऑनलाइन धोखाधड़ी से सावधान रहने की अपील की है।मिली जानकारी के अनुसार सोमेश्वर क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति को कुछ दिन पहले एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उसका नाम एक गंभीर आपराधिक मामले में सामने आया है और उस पर जांच चल रही है। फोन करने वाली महिला ने पीड़ित को यह भी बताया कि उसके बैंक खाते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में किया गया है। इस कारण उसे जांच पूरी होने तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा जाएगा।ठगों ने पीड़ित को लगातार डर और दबाव में रखा। उसे कहा गया कि यदि वह फोन काटेगा या किसी को इस बारे में बताएगा तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डर के कारण पीड़ित तीन दिनों तक उन्हीं लोगों के संपर्क में रहा और उनकी बातों पर भरोसा करता रहा। इस दौरान ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उससे कई बार पैसों की मांग की। कभी जांच शुल्क तो कभी खाते की सत्यापन प्रक्रिया का हवाला देकर उससे ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए।धीरे-धीरे ठगों ने पीड़ित से कुल 3 लाख 54 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। तीन दिन बाद जब ठगों ने दोबारा पैसे की मांग की तो पीड़ित को शक हुआ। इसके बाद उसने अपने परिचितों से इस बारे में चर्चा की और फिर पुलिस से संपर्क किया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत साइबर ठगी का केस दर्ज कर लिया।अल्मोड़ा पुलिस के अनुसार यह “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी का नया तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे वीडियो कॉल या फोन कॉल के माध्यम से पीड़ित को लगातार निगरानी में होने का भ्रम पैदा करते हैं और उसे किसी से संपर्क करने से रोकते हैं। इसी मानसिक दबाव का फायदा उठाकर वे पैसे ऐंठ लेते हैं।पुलिस ने बताया कि मामले की जांच साइबर सेल की टीम कर रही है और जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए ठगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर दूसरे राज्यों या विदेश से भी ऐसे अपराध को अंजाम देते हैं, इसलिए जांच में तकनीकी टीम की मदद ली जा रही है।पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर पैसे मांगता है या “डिजिटल अरेस्ट” जैसी बात कहता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी स्थिति में अज्ञात व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय से इस तरह की ठगी के मामलों में तेजी आई है। अपराधी लोगों को डराकर मानसिक दबाव में डालते हैं और उन्हें लगता है कि वे वास्तव में किसी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इसी भ्रम में आकर लोग बिना जांच किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। Post Views: 8 Post navigationडिजिटल सिग्नेचर से लाखों की निकासी का खुलासा, पौड़ी में बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर अल्मोड़ा में साइबर ठगी का नया तरीका: तीन दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 3.54 लाख रुपये ठगे
दैनिक प्रभातवाणी डेस्क | अल्मोड़ा | 5 मार्च 2026अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर क्षेत्र से साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने खुद को महिला पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को तीन दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और उससे लाखों रुपये ठग लिए। इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता पैदा कर दी है और पुलिस ने लोगों से इस तरह के फोन कॉल और ऑनलाइन धोखाधड़ी से सावधान रहने की अपील की है।मिली जानकारी के अनुसार सोमेश्वर क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति को कुछ दिन पहले एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उसका नाम एक गंभीर आपराधिक मामले में सामने आया है और उस पर जांच चल रही है। फोन करने वाली महिला ने पीड़ित को यह भी बताया कि उसके बैंक खाते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में किया गया है। इस कारण उसे जांच पूरी होने तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा जाएगा।ठगों ने पीड़ित को लगातार डर और दबाव में रखा। उसे कहा गया कि यदि वह फोन काटेगा या किसी को इस बारे में बताएगा तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डर के कारण पीड़ित तीन दिनों तक उन्हीं लोगों के संपर्क में रहा और उनकी बातों पर भरोसा करता रहा। इस दौरान ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उससे कई बार पैसों की मांग की। कभी जांच शुल्क तो कभी खाते की सत्यापन प्रक्रिया का हवाला देकर उससे ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए।धीरे-धीरे ठगों ने पीड़ित से कुल 3 लाख 54 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। तीन दिन बाद जब ठगों ने दोबारा पैसे की मांग की तो पीड़ित को शक हुआ। इसके बाद उसने अपने परिचितों से इस बारे में चर्चा की और फिर पुलिस से संपर्क किया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत साइबर ठगी का केस दर्ज कर लिया।अल्मोड़ा पुलिस के अनुसार यह “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी का नया तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे वीडियो कॉल या फोन कॉल के माध्यम से पीड़ित को लगातार निगरानी में होने का भ्रम पैदा करते हैं और उसे किसी से संपर्क करने से रोकते हैं। इसी मानसिक दबाव का फायदा उठाकर वे पैसे ऐंठ लेते हैं।पुलिस ने बताया कि मामले की जांच साइबर सेल की टीम कर रही है और जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए ठगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर दूसरे राज्यों या विदेश से भी ऐसे अपराध को अंजाम देते हैं, इसलिए जांच में तकनीकी टीम की मदद ली जा रही है।पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर पैसे मांगता है या “डिजिटल अरेस्ट” जैसी बात कहता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी स्थिति में अज्ञात व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय से इस तरह की ठगी के मामलों में तेजी आई है। अपराधी लोगों को डराकर मानसिक दबाव में डालते हैं और उन्हें लगता है कि वे वास्तव में किसी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इसी भ्रम में आकर लोग बिना जांच किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।