January 13, 2026

उत्तरकाशी त्रासदी पर एस.टी. हसन के बयान से मचा राजनीतिक तूफ़ान

उत्तरकाशी त्रासदी पर एस.टी. हसन के बयान से मचा राजनीतिक तूफ़ान
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उत्तरकाशी त्रासदी पर एस.टी. हसन के बयान से मचा राजनीतिक तूफ़ान

उत्तरकाशी आपदा और विवादित टिप्पणी
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने जहां पूरे राज्य को शोक और चिंता में डाल दिया है, वहीं इस संवेदनशील समय में दिए गए एक राजनीतिक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद एस.टी. हसन ने आपदा को धार्मिक असहिष्णुता से जोड़ते हुए टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

क्या कहा एस.टी. हसन ने
एस.टी. हसन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “प्राकृतिक आपदाएं सिर्फ़ प्रकृति के क्रोध का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि समाज में बढ़ती नफ़रत और धार्मिक असहिष्णुता भी इसका एक कारण हो सकती हैं।” उनके इस बयान को कई लोगों ने पीड़ित परिवारों की संवेदनाओं के विपरीत और मौके की नज़ाकत के खिलाफ माना।

विपक्ष और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
बयान सामने आते ही भाजपा और कई अन्य राजनीतिक दलों ने इसकी निंदा की। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि “जब लोग अपनी ज़िंदगी और घर बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उस समय राजनीतिक और धार्मिक रंग देने वाली टिप्पणियां निंदनीय हैं।”
सोशल मीडिया पर भी यह मामला ट्रेंड करने लगा। ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कई यूज़र्स ने लिखा कि आपदा के समय एकजुटता और मदद की भावना होनी चाहिए, न कि विभाजनकारी बयानबाज़ी।

समर्थकों का पक्ष
हालांकि, एस.टी. हसन के कुछ समर्थकों का कहना है कि उनका बयान संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है। उनके मुताबिक, हसन ने समाज में बढ़ती वैमनस्यता के ख़िलाफ चेतावनी दी थी और इसे एक बड़े सामाजिक संदेश के रूप में देखा जाना चाहिए। समर्थकों ने यह भी कहा कि बयान का मूल उद्देश्य “धार्मिक सद्भाव” को बढ़ावा देना था।

उत्तरकाशी आपदा की पृष्ठभूमि
उत्तरकाशी ज़िले में पिछले दिनों तेज़ बारिश और बादल फटने जैसी घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। धाराली और आसपास के क्षेत्रों में पानी और मलबा इतनी तेज़ी से आया कि लोग संभल भी नहीं पाए। दर्जनों घर बह गए, कई पुल और सड़कें टूट गईं, और कई लोग लापता हो गए।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत व बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। हेलीकॉप्टर और नावों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है।

राजनीतिक निहितार्थ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आपदा के समय सियासी बहस को तेज़ कर देते हैं। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने लगते हैं, जिससे राहत कार्य पर ध्यान बंट सकता है। उत्तराखंड में अगले वर्ष स्थानीय चुनाव होने हैं और ऐसे में इस मुद्दे के राजनीतिकरण की आशंका और भी बढ़ जाती है।

जनता की अपेक्षाएं
स्थानीय लोग चाहते हैं कि फिलहाल राजनीतिक बहस बंद हो और सभी नेता राहत कार्यों में सहयोग करें। धाराली के निवासी बताते हैं कि उनके पास न खाना है, न कपड़े, और न ही सुरक्षित आश्रय। ऐसे समय में राजनीतिक बयानबाज़ी उन्हें और निराश कर रही है।

दैनिक प्रभातवाणी
उत्तरकाशी की यह त्रासदी न केवल प्रकृति की मार का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संवेदनशील समय में नेताओं के शब्द कितने असर डाल सकते हैं। एस.टी. हसन के बयान ने भले ही कुछ लोगों का ध्यान सामाजिक मुद्दों की ओर खींचा हो, लेकिन बड़े पैमाने पर इसे अनुपयुक्त समय पर दिया गया बयान माना जा रहा है। राहत और पुनर्वास कार्य जारी है, और ज़रूरत इस बात की है कि सभी राजनीतिक दल और नेता मिलकर पीड़ितों की मदद में अपनी पूरी ताकत लगाएं।