उत्तरकाशी में पत्रकार की राष्ट्रीय नदी में लाश मिलने का मामला: हत्या या हादसा? निष्पक्ष जांच की मांग तेज

उत्तरकाशी में पत्रकार की राष्ट्रीय नदी में लाश मिलने का मामला: हत्या या हादसा? निष्पक्ष जांच की मांग तेज
उत्तरकाशी, 29 सितंबर 2025/दैनिकप्रभातवाणी
उत्तरकाशी में पत्रकार की राष्ट्रीय नदी में लाश मिलने का मामला: हत्या या हादसा? निष्पक्ष जांच की मांग तेज
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। स्थानीय पत्रकार राजीव प्रताप की लाश एक राष्ट्रीय नदी में मिलने की खबर ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। इस घटना को लेकर परिवार ने हत्या की आशंका जताई है, वहीं पुलिस का कहना है कि यह हादसा भी हो सकता है। घटना की गंभीरता और पत्रकार सुरक्षा के लिहाज से इसे राज्यभर में गहनता से देखा जा रहा है।
राजीव प्रताप, उम्र लगभग 36 वर्ष, उत्तरकाशी के एक स्थानीय पत्रकार थे और उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों पर कई रिपोर्टें और वीडियोज बनाकर लोगों तक पहुंचाई थीं। वे अपनी रिपोर्टिंग के दौरान कई संवेदनशील मामलों को उजागर कर चुके थे, जिसमें सरकारी कामकाज और क्षेत्रीय प्रशासनिक मामलों पर भी सवाल उठाए गए। इस वजह से उन्हें कई बार धमकियाँ मिलीं और मानसिक दबाव महसूस हुआ। उनके परिवार का कहना है कि घटना से पहले राजीव विशेष रूप से परेशान थे।
18 सितंबर की रात लगभग 11 बजे राजीव अचानक गायब हो गए। अपनी पत्नी से आखिरी बार बातचीत में उन्होंने कहा था कि कुछ लोग वीडियो हटाने को कह रहे हैं। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और कोई संपर्क नहीं हो पाया। अगले दिन उनकी गाड़ी भगीरथी नदी के पास बरामद हुई। गाड़ी की स्थिति क्षतिग्रस्त थी और वाहन के भीतर राजीव का कोई सुराग नहीं मिला। इस घटना के बाद परिवार ने उत्तारकाशी पुलिस में FIR दर्ज कराई और अपहरण की आशंका जताई।
परिवार ने कहा कि यदि पुलिस मामले को जल्द और निष्पक्ष तरीके से नहीं संभालती है तो यह केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पत्रकार समाज के लिए संदेश जाएगा कि किसी की भी आवाज़ दबाई जा सकती है। स्थानीय पत्रकार संगठन भी इस मामले में आवाज़ उठा रहे हैं और राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
28 सितंबर को Joshiyara barrage क्षेत्र से राजीव प्रताप का शव बरामद किया गया। जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शव पर कोई स्पष्ट बाहरी चोट नहीं पाई गई है। शव का पोस्टमार्टम कराना सुनिश्चित किया गया ताकि मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सके। पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि गाड़ी खाई में गिरकर नदी में आ गई और बढ़े हुए जल प्रवाह ने शव को बहा दिया। घटनास्थल के पास CCTV फुटेज में राजीव अकेले गाड़ी में दिखाई दे रहे थे।
परिवार का कहना है कि राजीव हत्या की आशंका जताने वाले कई संकेतों के बीच दबाव में थे। पत्नी मुस्कान ने बताया कि उन्हें धमकियाँ मिली थीं और यदि उन्होंने कुछ सामग्री वीडियो पर नहीं हटाई, तो उन्हें नुकसान पहुँचाया जा सकता था। परिवार का आरोप है कि घटना व्यक्तिगत दुश्मनी या किसी उच्च स्तर के दबाव की परिणति हो सकती है। पत्रकार संगठन भी इस मामले को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक घटनाक्रम और साक्ष्यों की समीक्षा में दुर्घटना की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। पुलिस अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही दिया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस ने कहा कि जांच में हर पहलू को देखा जा रहा है, जिसमें राजीव की आखिरी गतिविधियाँ, उनकी गाड़ी की स्थिति, मोबाइल लोकेशन और आसपास के लोगों के बयान शामिल हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी इस घटना ने ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पूरी निष्पक्ष जांच का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्यभर के पत्रकार संगठन और नागरिक अधिकार समूह इस घटना को पत्रकार सुरक्षा के महत्वपूर्ण मामले के रूप में देख रहे हैं और सरकार से CBI या अन्य राष्ट्रीय एजेंसी द्वारा स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
इस घटना से यह भी स्पष्ट हो गया कि पत्रकारों पर आज भी दबाव, धमकी और उत्पीड़न की स्थितियाँ बनी हुई हैं। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इसमें न केवल कानून का सख्त पालन शामिल है, बल्कि पत्रकारों के लिए सुरक्षा गाइडलाइन, आपातकालीन हेल्पलाइन और जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी भी शामिल होनी चाहिए।
SIT या राज्य पुलिस की जांच में पारदर्शिता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। जांच प्रक्रिया की हर बड़ी प्रगति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जनता को भरोसा हो कि मामला दबाया नहीं जा रहा। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक निष्कर्षों को समय पर साझा करना और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना इस मामले की प्राथमिकताएं होनी चाहिए।
राजीव प्रताप की मौत केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए भी गंभीर चेतावनी है। यदि परिवार, मीडिया, सरकार और न्यायालय मिलकर निष्पक्ष और तेज कार्रवाई करें, तो यह मामला पत्रकार सुरक्षा और जिम्मेदार प्रशासन की मिसाल बन सकता है। वर्तमान में यह स्पष्ट नहीं है कि यह हत्या थी या हादसा, लेकिन एक बात निश्चित है कि इस मामले को दबाया नहीं जा सकता और दोषियों को पकड़े जाने की आवश्यकता है।
उत्तरकाशी के स्थानीय लोग भी इस मामले को लेकर चिंतित हैं। कई ने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच तेज़ी से हो और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए प्रणालीगत बदलाव किए जाएँ। पत्रकारों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को यह संदेश देना होगा कि कोई भी व्यक्ति अपनी आवाज़ उठाने में सुरक्षित है।
पत्रकार संगठन और नागरिक अधिकार समूह इस मामले में लगातार नजर बनाए हुए हैं। वे न केवल न्याय की मांग कर रहे हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि राज्य और केंद्र सरकार इस तरह के मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखें। उनका कहना है कि केवल दोषियों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पत्रकार सुरक्षा कानूनों का सख्ती से पालन और कार्यान्वयन भी जरूरी है।
राजीव प्रताप की घटना यह दर्शाती है कि मीडिया और लोकतंत्र के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। किसी भी लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता का दबाया जाना या किसी पत्रकार पर हमला करना न केवल व्यक्तिगत हानि है, बल्कि समाज और लोकतंत्र की नींव पर भी सवाल उठाता है। इस घटना से स्पष्ट हो गया है कि निष्पक्ष जांच, कानूनी कार्रवाई और पत्रकार सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाना समय की आवश्यकता है।
इस पूरी घटना के माध्यम से यह भी संदेश जाता है कि युवा पत्रकार और नागरिक अधिकार संगठन आगे आएँ और निष्पक्ष जांच की मांग करें। न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी पत्रकार की आवाज़ दबाने का प्रयास विफल हो। राज्य और केंद्र सरकार दोनों को मिलकर यह जिम्मेदारी उठानी होगी कि पत्रकार सुरक्षित रहें और उनके अधिकारों की रक्षा हो।
दैनिक प्रभातवाणी इस मामले की हर नई अपडेट पर नजर रखेगा और जैसे ही जांच के नए निष्कर्ष सामने आएँगे, पाठकों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि पत्रकार सुरक्षा केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।