January 13, 2026

उत्तराखंड आपदा: सेना के जवानों से लेकर सैकड़ों पर्यटक लापता, देशभर से राहत अभियान तेज़

"उत्तराखंड आपदा: सेना के जवानों से लेकर सैकड़ों पर्यटक लापता, देशभर से राहत अभियान तेज़"
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“उत्तराखंड आपदा: सेना के जवानों से लेकर सैकड़ों पर्यटक लापता, देशभर से राहत अभियान तेज़”

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आई प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर पहाड़ों की नाजुक पारिस्थितिकी और मौसम की अनिश्चितता का भयावह चेहरा सामने ला दिया है। हर्षिल घाटी और उसके आसपास के क्षेत्रों में अचानक आई तेज बारिश ने न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि यहां तैनात भारतीय सेना के जवानों और विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों पर्यटकों को भी संकट में डाल दिया है। 6 अगस्त की रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने अगले दिन तक हालात को इतना बिगाड़ दिया कि नदी-नालों का जलस्तर अचानक कई गुना बढ़ गया और गांवों, कैंपों तथा सड़कों पर पानी और मलबा भर गया।


सेना के जवानों पर संकट

हर्षिल क्षेत्र में तैनात भारतीय सेना के जवान, जो सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और निगरानी का काम कर रहे थे, इस आपदा की चपेट में आ गए। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 11 जवान लापता हैं। नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (NDRF) ने इस खबर की पुष्टि की है और सेना की बचाव इकाइयों के साथ मिलकर खोज अभियान तेज कर दिया है। लापता जवानों के शिविर और उनके आस-पास का इलाका भारी मलबे और पानी से ढक गया है, जिससे तलाशी अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया है।

रेस्क्यू टीमों ने ड्रोन कैमरों और स्निफर डॉग्स की मदद से इलाके की तलाशी शुरू की है। सेना के हेलिकॉप्टर भी मौसम के अनुकूल होने पर हवाई निरीक्षण कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 2,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां लगातार बारिश और भूस्खलन से हालात और बिगड़ रहे हैं।


महाराष्ट्र के पर्यटकों की स्थिति

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (महाराष्ट्र) के अनुसार, उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में फंसे 153 पर्यटक सुरक्षित मिल चुके हैं। इनमें पुणे, मुंबई, नासिक और नागपुर के लोग शामिल हैं। हालांकि, अब भी 19 लोग लापता हैं। इनमें से कई लोग उत्तरकाशी के ग्रामीण इलाकों या दूरस्थ ट्रेकिंग मार्गों पर थे, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। मोबाइल नेटवर्क बाधित होने के कारण परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

महाराष्ट्र सरकार ने देहरादून में अपना विशेष हेल्पडेस्क स्थापित किया है और लगातार रेस्क्यू एजेंसियों से संपर्क में है। लापता लोगों की सूची स्थानीय प्रशासन को सौंप दी गई है, ताकि खोज में प्राथमिकता दी जा सके।


गुजरात के यात्रियों का बचाव

गुजरात सरकार ने भी तुरंत सक्रियता दिखाई। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी कि उत्तरकाशी में फंसे 141 पर्यटक और तीर्थयात्री बचाव टीमों की निगरानी में सुरक्षित हैं। इनमें से अहमदाबाद से आए 99 यात्री मंडाकिनी गेस्टहाउस में ठहरे हुए हैं। कुछ यात्रियों को हल्की चोटें आई थीं, जिनका इलाज किया गया है।

राज्य सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए एनडीआरएफ और आईटीबीपी से सीधा समन्वय बनाया है। विशेष चिकित्सकीय दल भी भेजे गए हैं ताकि घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया जा सके।


उत्तरकाशी में घायलों की गंभीर हालत

आपदा के बाद घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाया गया। कई लोगों को फेफड़ों में कीचड़ भर जाने, गले में पत्थर लगने और हाथ-पांव में गंभीर चोटों के कारण जिला अस्पताल या देहरादून के बड़े मेडिकल सेंटरों में रेफर करना पड़ा।

डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मरीजों को अतिरिक्त ऑक्सीजन और सर्जरी की जरूरत है। उत्तरकाशी प्रशासन ने हेल्थ विभाग के साथ मिलकर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को सशक्त किया है। ऑक्सीजन सिलेंडर, एंबुलेंस और सर्जिकल उपकरणों की आपूर्ति लगातार की जा रही है।


सूरत के पर्यटकों की स्थिति

क्लाउडबर्स्ट से प्रभावित इलाकों में गुजरात के सूरत जिले के 18 पर्यटक भी मौजूद थे। इनमें से 9 लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बाकी नौ अब भी लापता हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह समस्या फोन नेटवर्क और सड़क संपर्क टूटने के कारण है।


आपदा के कारण और पृष्ठभूमि

उत्तरकाशी हिमालयी भू-भाग का वह हिस्सा है, जहां मानसून के दौरान बादल फटने और फ्लैश फ्लड की घटनाएं बार-बार होती हैं। हर्षिल घाटी, भागीरथी नदी के किनारे बसी होने के कारण ऐसे मौसमीय उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित होती है। इस बार का बादल फटना (Cloudburst) रात में नहीं, बल्कि दिन में हुआ, जिससे नदी-नालों में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पहाड़ों पर बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों का पिघलना और अनियंत्रित निर्माण कार्य इस तरह की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ा रहे हैं।


रेस्क्यू ऑपरेशन की चुनौतियाँ

रेस्क्यू टीमों के सामने कई मुश्किलें हैं:

  1. भारी बारिश और फिसलन — कई जगह बचाव दलों को रस्सी और विशेष उपकरणों की मदद से आगे बढ़ना पड़ रहा है।

  2. सड़क मार्ग अवरुद्ध — भूस्खलन और मलबे के कारण प्रमुख सड़कों पर आवाजाही रुक गई है।

  3. मोबाइल नेटवर्क ठप — इससे लापता लोगों से संपर्क करना लगभग असंभव हो गया है।

  4. ऊंचाई और ठंड — हर्षिल की ऊंचाई और ठंडा मौसम राहत कार्य को और कठिन बना रहा है।


प्रशासन की अपील और आगे की योजना

उत्तराखंड सरकार ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे प्रभावित इलाकों में न जाएं और ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर रहें। सेना, NDRF, ITBP और SDRF की टीमें मिलकर राहत कार्य कर रही हैं।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में मौसम सामान्य होने तक ट्रेकिंग और पर्यटक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।


दैनिक प्रभातवाणी

यह आपदा न केवल मानव जनित चुनौतियों को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत है। हर्षिल जैसी घाटियां, जो सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं, वहां मौसम निगरानी और त्वरित चेतावनी तंत्र को सुदृढ़ करना समय की मांग है।