March 2, 2026

उत्तराखंड और हिमाचल में तेज़ बारिश और भूस्खलन : सात मौतें, यात्राएँ स्थगित, राहत कार्य जारी

OIP
Spread the love

दैनिक प्रभातवाणी (देहरादून/शिमला, 2 सितंबर 2025)

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश इस समय मानसून की तीव्रता और अत्यधिक बारिश की चपेट में हैं। पहाड़ों पर लगातार हो रहे भूस्खलन और मलबे के गिरने की घटनाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल और एनडीआरएफ की टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन भूस्खलन और सड़क मार्गों के बंद होने के कारण मदद पहुँचाने में गंभीर चुनौतियाँ आ रही हैं। पिछले दो दिनों में दोनों राज्यों में हुई प्राकृतिक घटनाओं में सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं और दर्जनों परिवार प्रभावित हुए हैं।

रुद्रप्रयाग जिले के मंक्तिया क्षेत्र में हुए भूस्खलन ने हादसों की भयावहता को और बढ़ा दिया। एक वाहन पर अचानक गिरती चट्टानों ने दो तीर्थयात्रियों की मौके पर ही मौत कर दी और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। यह हादसा उस समय हुआ जब वाहन केदारनाथ की ओर बढ़ रहा था। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन लगातार हो रही बारिश और मलबे के कारण राहत दलों की पहुँच में बाधाएँ आईं।

भूस्खलन और तेज़ बारिश के कारण कई सड़क मार्ग बंद हो गए हैं। रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी जिले में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के कई हिस्से अवरुद्ध हैं। इससे न केवल यातायात प्रभावित हुआ है बल्कि आपदा राहत कार्यों में भी कठिनाई आ रही है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टरों और ऊँची पहाड़ी ट्रैकिंग टीमों का सहारा लिया है।

प्रशासन ने मौसम की स्थिति को देखते हुए केदारनाथ यात्रा को 3 सितंबर तक स्थगित कर दिया है। भारी बारिश और खराब मौसम के कारण यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा को भी 5 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया है। मौसम विभाग ने राज्य के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, और चेतावनी दी है कि आने वाले 48 घंटे अत्यंत संवेदनशील हो सकते हैं।

भारी बारिश और भूस्खलन का प्रभाव केवल यात्रियों तक ही सीमित नहीं है। स्थानीय निवासियों की जिंदगी भी पूरी तरह प्रभावित हुई है। कई घरों में पानी भर गया है, खेतों और बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुँचा है, और पशुधन भी मलबे में दब गए हैं। इन घटनाओं ने लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों को ठप्प कर दिया है और कई परिवारों के सामने खाद्य और जल संकट खड़ा कर दिया है।

आपदा प्रभावित इलाकों में राहत कार्य लगातार जारी हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में जुटी टीमें प्रभावितों को खाने-पीने की सामग्री, साफ पानी, अस्थायी आश्रय और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवा रही हैं। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से कठिन इलाके तक राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है। बावजूद इसके, लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन राहत कार्यों को धीमा कर रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना अत्यंत आवश्यकता के यात्रा न करें। तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय तक यात्रा टालें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। अधिकारियों ने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद ही यात्राओं को पुनः शुरू किया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। मंडी, कुल्लू और लाहुल-स्पीति जिलों में बारिश से भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। कई स्थानों पर सड़क मार्ग बंद हो गए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क शहरों और चिकित्सा सुविधाओं से टूट गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में अगले दो दिन अत्यंत संवेदनशील रह सकते हैं। रेड और ऑरेंज अलर्ट के कारण प्रशासन ने सभी महत्वपूर्ण मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है। उन्होंने स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों से आग्रह किया है कि वे केवल प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें और जोखिम भरे इलाकों में जाने से बचें।

भूस्खलन की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पहाड़ी राज्यों में मौसम की unpredictability को देखते हुए सतर्क रहना आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के अंतिम चरण में बारिश की तीव्रता अधिक हो सकती है और साथ ही कई स्थानों पर मृदा अस्थिर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल को हर समय तैयार रहना होगा।

राज्य सरकार ने आपदा प्रभावितों के लिए राहत कार्यों को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रशासन ने ग्रामीणों से आग्रह किया है कि वे मलबे और भूस्खलन की घटनाओं के प्रति सतर्क रहें और बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।

सड़कों और मुख्य मार्गों के बंद होने के कारण लोगों का परिवहन मुश्किल हो गया है। कई इलाकों में लोग दो या तीन दिनों से फंसे हुए हैं। प्रशासन ने सेना और सीआरपीएफ की मदद से इन इलाकों तक राहत पहुँचाने की योजना बनाई है। हेलीकॉप्टर और ऊँची पहाड़ी ट्रैकिंग दलों का उपयोग किया जा रहा है ताकि प्रभावितों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया जा सके।

भारी बारिश और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री में खाद्य पैकेट, पानी की बोतलें, दवाइयाँ और कंबल शामिल हैं। राहत कार्यों में प्रशासन की टीम के साथ स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और धर्मिक संस्थाएं भी जुटी हैं। उन्होंने प्रभावितों को मानसिक और भावनात्मक सहारा भी प्रदान किया है।

संत समाज और साधु-संत भी इस समय संकट में आगे आए हैं। उन्होंने प्रभावितों के लिए राहत कोष में आर्थिक योगदान दिया है और स्वयंसेवकों के माध्यम से राहत सामग्री वितरण में मदद की है। उनका यह कदम समाज के लिए प्रेरणादायक साबित हो रहा है और अन्य वर्गों को भी योगदान देने के लिए प्रेरित कर रहा है।

केदारनाथ यात्रा स्थगित होने के कारण प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने की सलाह दी है। चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा को भी रोक दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रत्याशित आपदा से यात्रियों की जान खतरे में न पड़े। अधिकारियों ने कहा कि मौसम में सुधार होने के बाद ही यात्राएँ पुनः शुरू की जाएँगी।

इस आपदा से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड और हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य हमेशा संवेदनशील रहते हैं। भूस्खलन, मलबा और तेज़ बारिश जीवन और संपत्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। ऐसे में प्रशासन, स्थानीय लोग और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर सतर्क रहना और हर परिस्थिति में तैयार रहना आवश्यक है।

आपदा प्रभावित इलाकों में राहत कार्य लगातार जारी हैं और प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि प्रभावितों को समय पर भोजन, पानी, आश्रय और चिकित्सा सहायता मिल सके। भूस्खलन के कारण सड़क मार्गों के अवरुद्ध होने से राहत कार्यों में रुकावट आ रही है, लेकिन प्रशासन की टीम हर संभव प्रयास कर रही है।

मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की सतर्कता के कारण उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में नुकसान को न्यूनतम किया जा सकेगा। सभी जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी है और स्थानीय लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी गई है।

इस समय उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की जनता, प्रशासन और राहत कार्य करने वाली टीमें मिलकर कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। इस आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा के समय मानवता, एकजुटता और सतर्कता सबसे बड़ी ताकत हैं।