उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक, आरक्षण प्रक्रिया को बताया त्रुटिपूर्ण

उत्तराखंड में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। नैनिताल उच्च न्यायालय ने 23 जून 2025 को एक अहम आदेश जारी करते हुए पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक (स्टे) लगा दी है। यह आदेश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिसमें याचिकाकर्ता ने पंचायत चुनावों में लागू की गई आरक्षण प्रणाली और उसकी वैधता पर सवाल उठाए थे।
याचिका में कहा गया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना और आरक्षण निर्धारण प्रक्रिया संविधान के प्रावधानों और उच्चतम न्यायालय द्वारा पूर्व में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन तथ्यों और प्रक्रिया के आधार पर पंचायत चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया गया और आरक्षण की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया।
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की चुनावी प्रक्रिया – चाहे वह अधिसूचना हो, नामांकन प्रक्रिया या मतदान तिथि तय करना – पर रोक प्रभावी रहेगी। इस निर्णय से ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तीनों ही स्तरों पर प्रस्तावित चुनाव फिलहाल स्थगित हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने कुछ दिन पूर्व ही प्रदेश के 12 जिलों (हरिद्वार को छोड़कर) में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी की थी। इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगने से संबंधित जिलों में चुनावी तैयारियों पर विराम लग गया है।
हाईकोर्ट के इस आदेश से न केवल चुनाव की तारीखें प्रभावित होंगी, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल और प्रशासनिक प्रबंधन पर भी असर पड़ सकता है। राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग अब आगामी सुनवाई में अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखेंगे, जिसके बाद ही चुनावों की अगली समय-सीमा स्पष्ट हो सकेगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय की गूंज सुनाई दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ पंचायती राज व्यवस्था की अहम भूमिका होती है, वहां यह आदेश विशेष महत्व रखता है। चुनावों पर लगी यह रोक कब तक प्रभावी रहेगी, इसका फैसला अब आगामी न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।