January 12, 2026

उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: 210% अधिक वर्षा, ऑरेंज अलर्ट जारी — सड़कें बंद, स्कूल बंद, जनजीवन अस्त-व्यस्त

उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: 210% अधिक वर्षा, ऑरेंज अलर्ट जारी — सड़कें बंद, स्कूल बंद, जनजीवन अस्त-व्यस्त
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उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: 210% अधिक वर्षा, ऑरेंज अलर्ट जारी — सड़कें बंद, स्कूल बंद, जनजीवन अस्त-व्यस्त


देहरादून, 22 जुलाई 2025 | विशेष संवाददाता – दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर अपना भीषण रूप दिखा दिया है। राज्य में बीते 24 घंटों के भीतर 210% अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जो मौसम के सामान्य औसत से कहीं ज्यादा है। इस अत्यधिक वर्षा ने ना सिर्फ जनजीवन को बाधित किया है, बल्कि पहाड़ी जिलों में तबाही के हालात भी उत्पन्न कर दिए हैं।

राज्य के 13 जिलों में से अधिकतर हिस्सों में तेज़ से अति-तेज़ बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, कई सड़कें मलबे में दब गई हैं और जनसंपर्क साधन पूरी तरह बाधित हो चुके हैं।


बारिश के आँकड़े: चंपावत में रिकॉर्ड वर्षा, बनबसा बना जलसमूह

उत्तराखंड मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा वर्षा चंपावत ज़िले के बनबसा कस्बे में दर्ज की गई, जहां 161 मिमी पानी बरस चुका है। इसके अलावा हरिद्वार, हल्द्वानी, लैंसडाउन, उत्तरकाशी, नैनीताल और पौड़ी जैसे क्षेत्रों में भी भारी बारिश का प्रभाव देखा गया है।

राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाके जलभराव की चपेट में हैं। कई स्थानों पर घरों में पानी भर गया है और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।


मौसम विभाग की चेतावनी: ऑरेंज अलर्ट जारी

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने सोमवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जो कि भारी से बहुत भारी बारिश का संकेत देता है। जिन जिलों में अलर्ट जारी हुआ है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • देहरादून

  • टिहरी गढ़वाल

  • उत्तरकाशी

  • नैनीताल

  • चंपावत

  • उधम सिंह नगर

इन जिलों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने, नदियों का जलस्तर बढ़ने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं पहले ही देखने को मिल चुकी हैं।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि बिना अत्यावश्यक कारण के यात्रा न करें, खासकर पहाड़ी इलाकों में।


100 से अधिक सड़कें बंद, यातायात पर संकट

उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण अब तक 100 से अधिक सड़कें बंद हो चुकी हैं। विशेष रूप से चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी और पिथौरागढ़ जिलों में भूस्खलन के कारण सड़कों पर मलबा जमा हो गया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग 58 (ऋषिकेश-बद्रीनाथ) और राजमार्ग 109 (नैनीताल-अल्मोड़ा) में यातायात बाधित है। पहाड़ों से लगातार गिर रहे पत्थरों के चलते चारधाम यात्रा मार्ग भी प्रभावित हुआ है और प्रशासन ने यात्रियों से संयम बरतने की अपील की है।


टिहरी जिले में सभी स्कूल बंद

टिहरी जिले में स्थिति अधिक गंभीर हो गई है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश जारी किया है।

वहीं, अन्य जिलों में भी स्कूल प्रशासन को सतर्क रहने और बारिश की स्थिति के अनुसार स्कूल बंद करने का अधिकार दिया गया है।


भूस्खलन की घटनाएँ: खतरे की घंटी

बारिश के साथ ही भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। बीते 12 घंटों में ही राज्य भर में 14 से अधिक भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

  • नैनीताल के समीप ज्योलीकोट क्षेत्र में एक वाहन पर मलबा गिर गया, जिसमें दो लोग घायल हो गए।

  • उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में सड़क धंस गई, जिससे यातायात ठप है।

  • पौड़ी गढ़वाल के दुगड्डा ब्लॉक में एक घर ढह गया, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई।

राज्य आपदा प्रबंधन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें मौके पर तैनात हैं।


सरकारी तैयारी: प्रशासन अलर्ट पर

राज्य सरकार ने सभी जिलों को अलर्ट पर रखा है और आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्यरत हैं। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही पर नजर रखें और खतरे वाले इलाकों की पहचान करके वहाँ के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करें।

मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं हालात की निगरानी कर रहे हैं और रियल टाइम अपडेट ले रहे हैं।


बिजली और संचार सेवाएँ भी प्रभावित

बारिश के कारण कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (UPCL) के अनुसार, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जिलों में 60 से अधिक फीडर ठप हैं।

संचार नेटवर्क भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बाधित हो चुका है। मोबाइल नेटवर्क की गति बेहद धीमी है और इंटरनेट सेवाएँ बार-बार कट रही हैं।


आपातकालीन सेवाएँ: हेल्पलाइन सक्रिय

राज्य सरकार ने निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

  • आपदा राहत केंद्र (राज्य स्तर): 1070

  • पुलिस सहायता: 112

  • SDRF नियंत्रण कक्ष: 0135-2710335

साथ ही आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सिर्फ अधिकृत समाचार स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।


यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए चेतावनी

चारधाम यात्रा के तहत केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री जाने वाले हज़ारों श्रद्धालु फिलहाल रुके हुए हैं

यात्रियों को नजदीकी आश्रय स्थलों में भेजा जा रहा है और स्थानीय प्रशासन की देखरेख में भोजन, दवा और रहने की व्यवस्था की जा रही है।


स्थानीय जनता की परेशानी: खेत बर्बाद, दुकानें बंद

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। टिहरी, चंपावत और बागेश्वर जिलों में धान की बुवाई प्रभावित हुई है।

हल्द्वानी, कोटद्वार और रानीखेत में बाजारों में पानी भर जाने के कारण दुकानें बंद कर दी गई हैं और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।


अगले 48 घंटे और गंभीर हो सकते हैं हालात

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटे राज्य के कई हिस्सों में और अधिक तेज़ बारिश ला सकते हैं। विशेषकर पूर्वी उत्तराखंड (पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा) और तराई क्षेत्र (उधमसिंह नगर, हरिद्वार) में भारी से अति-भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।


 सावधानी ही सुरक्षा है

उत्तराखंड में बारिश का कहर अब चेतावनी की सीमा पार कर चुका है। इस समय प्रशासनिक प्रयास जितने ज़रूरी हैं, उतनी ही ज़रूरी है जनता की सजगता और आत्मनियंत्रण

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