January 13, 2026

उत्तराखंड में स्कूल फीस घोटाला: फर्जी वेबसाइट से अभिभावकों से ठगी, STF और साइबर सेल की जांच शुरू

उत्तराखंड में स्कूल फीस घोटाला: फर्जी वेबसाइट से अभिभावकों से ठगी, STF और साइबर सेल की जांच शुरू
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दैनिक प्रभातवाणी | 28 जुलाई 2025

उत्तराखंड में स्कूल फीस घोटाला: फर्जी वेबसाइट से अभिभावकों से ठगी, STF और साइबर सेल की जांच शुरू

दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो, देहरादून।
उत्तराखंड में एक चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें स्कूल फीस के नाम पर अभिभावकों को गुमराह कर लाखों रुपये की ठगी की गई। यह मामला न केवल राज्य के शैक्षणिक संस्थानों की डिजिटल सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब बेहद चतुर तरीके से आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

फर्जी वेबसाइट से भेजे गए स्कूल फीस अलर्ट

मामला तब सामने आया जब कुछ अभिभावकों को अपने बच्चों के स्कूल से एक एसएमएस प्राप्त हुआ, जिसमें लिखा गया था कि उनके द्वारा अब तक फीस जमा नहीं की गई है। हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकांश अभिभावक पहले ही फीस का ऑनलाइन भुगतान कर चुके थे। लेकिन संदेश में दी गई वेबसाइट लिंक पर क्लिक करने पर एक ऐसा पोर्टल खुलता था, जो हूबहू स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट जैसा ही प्रतीत होता था।

इस वेबसाइट पर पुनः फीस भरने के लिए विवरण मांगा गया — जिसमें अभिभावकों का नाम, बच्चे की जानकारी, बैंक डिटेल्स, यूपीआई/डेबिट कार्ड की जानकारी, और ओटीपी तक मांगा गया। इसी दौरान दर्जनों अभिभावकों के खातों से पैसे गायब हो गए।

जांच में खुलासा: अंतरराष्ट्रीय खेल पुरस्कार आयोजन का बहाना

साइबर सेल द्वारा प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ठगों ने इस फर्जी वेबसाइट को किसी अंतरराष्ट्रीय खेल पुरस्कार संस्था से जोड़कर प्रचारित किया। यह वेबसाइट बेहद पेशेवर ढंग से बनाई गई थी और इसके URL नाम में भी स्कूल से मिलती-जुलती संरचना थी, जिससे आम नागरिक आसानी से धोखा खा जाएं।

एक वरिष्ठ साइबर विशेषज्ञ ने बताया कि ऐसे मामलों में अक्सर फिशिंग स्कीम का इस्तेमाल होता है। नकली वेबसाइट बनाने के बाद असली स्कूल की तर्ज पर उसी तरह का इंटरफेस बनाकर लोगों को गुमराह किया जाता है।

जिन्होंने दी जानकारी, उनके खाते हुए साफ

कुछ पीड़ित अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने सोच समझकर ओटीपी शेयर नहीं किया, लेकिन वेबसाइट में अपने बैंक की डिटेल भर दी थी। बावजूद इसके, उनके खातों से ₹10,000 से लेकर ₹40,000 तक की राशि स्वतः डेबिट हो गई।

ठगों ने ट्रांजेक्शन को इतना तेजी से किया कि मोबाइल बैंकिंग अलर्ट आने तक राशि साफ हो चुकी थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने STF और साइबर सेल को संयुक्त जांच के आदेश दिए हैं।

एसएसपी की अपील: आधिकारिक साइट की पुष्टि करें

देहरादून के एसएसपी नवनीत भुल्लर ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि, “सभी अभिभावक स्कूल फीस भुगतान जैसे संवेदनशील लेनदेन केवल स्कूल की ऑफिशियल वेबसाइट से ही करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और यदि शक हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।”

उन्होंने बताया कि अपराधियों की पहचान के लिए वेबसाइट होस्टिंग सर्वर, आईपी ट्रैकिंग, मोबाइल नंबर और बैंक खातों की डिटेल को खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक सुराग उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़े बताए जा रहे हैं।

साइबर टीम की कार्रवाई: 3 संदिग्ध IP ट्रेस

STF और साइबर टीम ने अब तक तीन संदिग्ध आईपी एड्रेस की पहचान कर ली है, जिनका उपयोग फर्जी वेबसाइट को होस्ट करने और डेटा एक्सेस करने में किया गया था। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इन आईपी को VPN के जरिए छिपाया गया था, जिससे लोकेशन ट्रैकिंग में दिक्कत आ रही है।

लेकिन तकनीकी जांच में अब टूलकिट और रूट-आईपी मैपिंग के जरिए लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच टीम को उम्मीद है कि अगले 48 घंटों में इस गिरोह का बड़ा खुलासा हो सकता है।

CBSE स्कूल भी निशाने पर: पूरे उत्तर भारत में फैलाया जाल

जांच से यह भी खुलासा हुआ है कि इस फर्जी वेबसाइट का दायरा केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि NCR, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के दर्जनों नामचीन स्कूलों के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइटें बनाई गई थीं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है, जो शिक्षा और अभिभावक भावनाओं को निशाना बनाकर ठगी कर रहा है।

क्या करें और क्या न करें – जनता के लिए चेतावनी

उत्तराखंड पुलिस की साइबर टीम ने जनता को कुछ जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं:

  • फीस भुगतान केवल स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट से करें।

  • किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले URL की जांच करें – .org/.edu.in/.ac.in जैसी एक्सटेंशन प्रामाणिक मानी जाती हैं।

  • ओटीपी, डेबिट कार्ड डिटेल्स, UPI PIN जैसी जानकारी किसी भी वेबसाइट पर कभी भी साझा न करें।

  • ऐसे किसी भी फर्जी वेबसाइट या लिंक को cybercrime.gov.in पर तुरंत रिपोर्ट करें।

  • साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल कॉल करें यदि कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए।

सरकारी निर्देश – शिक्षा विभाग अलर्ट मोड में

उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को आदेश जारी कर कहा है कि वे अभिभावकों को केवल ऑफिशियल मोबाइल नंबर और वेबसाइट के जरिए ही सूचना भेजें। इसके अलावा सभी स्कूलों से कहा गया है कि वे अपनी वेबसाइट के SSL सुरक्षा प्रमाणपत्र को अपडेट करें और किसी भी अनाधिकृत पोर्टल से लिंकिंग न करें।

दैनिक प्रभातवाणी  : डिजिटल युग में सुरक्षा ही असली पढ़ाई है

आज के डिजिटल दौर में जहां ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल ट्रांजेक्शन हमारी रोजमर्रा की ज़रूरत बन चुकी है, वहीं इस प्रकार की साइबर ठगी हमें चेतावनी देती है कि केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं, बल्कि सतर्कता भी आज का जरूरी पाठ बन चुका है।

उत्तराखंड में हुए इस स्कूल फीस घोटाले ने न केवल शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि अभिभावकों को भी यह सबक दिया है कि जागरूकता ही सुरक्षा है।