उत्तराखंड में 10 अप्रैल से डिजिटल जनगणना, ऐप पर देनी होगी पूरी जानकारी, 33 सवाल अनिवार्य
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दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 4 अप्रैल 2026

उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इस बार पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिसमें लोगों को मोबाइल ऐप के जरिए खुद अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। राज्य में पहले चरण की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और यह अभियान 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक चलाया जाएगा।

इस बार जनगणना प्रक्रिया को पहले से अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्वगणना की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत नागरिक स्वयं मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी भरेंगे। इस डिजिटल एप्लीकेशन में कुल 33 सवाल शामिल किए गए हैं और इन सभी सवालों का जवाब देना आवश्यक होगा।

डिजिटल जनगणना में मकान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां ली जाएंगी। इसमें मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, कमरों की संख्या और मकान की श्रेणी जैसी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, आयु और सामाजिक वर्ग से संबंधित जानकारी भी भरनी होगी। सरकार इस प्रक्रिया के माध्यम से राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत आंकड़ा तैयार करना चाहती है।

इसके अलावा घर में उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इसमें पेयजल की व्यवस्था, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति, रसोई व्यवस्था और गैस कनेक्शन की जानकारी शामिल होगी। डिजिटल जनगणना में तकनीकी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। नागरिकों को यह भी बताना होगा कि उनके घर में टीवी, मोबाइल फोन, इंटरनेट, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं।

वाहनों से जुड़ी जानकारी भी इस बार जनगणना का हिस्सा होगी। इसमें साइकिल, मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार जैसी सुविधाओं की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा परिवार के खानपान से जुड़ी जानकारी भी एप्लीकेशन में भरनी होगी। इससे सरकार को राज्य की जीवनशैली और आर्थिक स्थिति का वास्तविक आंकड़ा मिलेगा।

स्वगणना पूरी होने के बाद जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे। एप्लीकेशन में भरी गई जानकारी का मिलान किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं। इस व्यवस्था से जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।

जनगणना सचिव दीपक गैरोला के अनुसार इस प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों की ट्रेनिंग पूरी कर ली गई है। डिजिटल जनगणना के लिए ज्यादातर शिक्षकों को इस कार्य में लगाया गया है। एक जनगणना अधिकारी को लगभग एक महीने के भीतर करीब 800 घरों का सर्वे पूरा करना होगा।

देशभर में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में एक साथ शुरू की जाएगी। हालांकि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों में मौसम को देखते हुए यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में पहले भी कराई जा सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार की अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है।

डिजिटल जनगणना के जरिए सरकार को राज्य की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आंकड़ा मिलेगा। इसके आधार पर भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से तैयार किया जा सकेगा। पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से हो रही इस जनगणना को उत्तराखंड के लिए बड़ा प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है।

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