उत्तराखंड सरकार विवाह पंजीकरण को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के दायरे में लाने की तैयारी में — जनजातीय समुदायों को भी जोड़ा जाएगा

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 8 अक्टूबर 2025
उत्तराखंड सरकार एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। राज्य में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code – UCC) अब एक नए विस्तार की ओर बढ़ रहा है। सरकार विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) प्रक्रिया को पूरी तरह इस कोड के अधीन लाने की योजना बना रही है, ताकि राज्य के हर नागरिक — चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से जुड़ा हो — को समान कानूनी मान्यता और अधिकार प्राप्त हो सकें।
इस पहल के पीछे सरकार का उद्देश्य है कि विवाह से जुड़ी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया जाए और नागरिकों को उन सामाजिक-कानूनी लाभों से वंचित न रहना पड़े, जो अब तक काग़ज़ी औपचारिकताओं या परंपरागत सीमाओं के कारण उन्हें नहीं मिल पाते।
UCC लागू होने के बाद अगला बड़ा कदम
गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने जनवरी 2025 में यूनिफॉर्म सिविल कोड को आधिकारिक रूप से लागू किया था। इसके तहत विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार, और संपत्ति-विभाजन से जुड़े कानूनों को एक समान रूप में लाया गया। इस कदम की देशभर में प्रशंसा भी हुई और राजनीतिक बहस भी छिड़ी।
अब राज्य सरकार इसका अगला चरण शुरू करने की तैयारी में है, जिसमें विवाह पंजीकरण प्रणाली को पूरी तरह UCC के दायरे में शामिल किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि जब विवाह-विधियां और अधिकार समान हो सकते हैं, तो विवाह-पंजीकरण को भी एक समान कानूनी ढांचे के तहत आना चाहिए।
प्रस्ताव में क्या है नया?
इस प्रस्ताव के अनुसार, अब हर व्यक्ति को — चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या जनजातीय समुदाय से हो — अपने विवाह का सरकारी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
अब तक कुछ जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक या धार्मिक पद्धतियों से विवाह होते रहे हैं, जिनका सरकारी अभिलेखों में उल्लेख नहीं होता। इससे भविष्य में विवाह-संबंधी प्रमाण-पत्र प्राप्त करने, पासपोर्ट या वीज़ा जैसी प्रक्रियाओं में कठिनाइयाँ आती हैं।
UCC के अधीन विवाह-पंजीकरण होने से ये सभी विवाह न केवल वैध माने जाएंगे बल्कि सरकार के रिकॉर्ड में दर्ज भी रहेंगे। इससे समाज के हर तबके को समान रूप से सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
जनजातीय समुदायों को भी जोड़ा जाएगा
इस बार विशेष ध्यान उत्तराखंड के अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) समुदायों पर है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जिन समुदायों के पारंपरिक विवाह अब तक सरकारी अभिलेखों में नहीं आते, उन्हें भी इस दायरे में शामिल किया जाए।
कई जनजातीय परिवारों को पासपोर्ट आवेदन या सरकारी लाभ योजनाओं में विवाह-प्रमाण-पत्र की कमी के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है। सरकार का यह कदम उनकी सामाजिक और कानूनी पहचान को सशक्त करेगा।
विधि विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा चल रही है और इसे जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद इसे राज्य विधानसभा में रखा जाएगा।
सरकार की मंशा और संभावित लाभ
राज्य सरकार का मानना है कि विवाह-पंजीकरण को UCC के अधीन लाने से पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता और न्याय दोनों बढ़ेंगे।
यह कदम विशेष रूप से महिलाओं के हितों को मज़बूती देगा, क्योंकि रजिस्टर्ड विवाह के बाद तलाक, गुज़ारा भत्ता, और संपत्ति-विभाजन से जुड़ी प्रक्रियाएँ अधिक सुरक्षित हो जाती हैं।
इसके अलावा, विदेश यात्रा, पासपोर्ट, या वीज़ा आवेदन के समय वैवाहिक-स्थिति का प्रमाण-पत्र आवश्यक होता है। अब सभी नागरिकों को यह सुविधा ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध होगी। साथ ही, सरकारी योजनाओं, बीमा दावों और बैंकिंग प्रक्रियाओं में भी यह दस्तावेज़ मददगार साबित होगा।
ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली
UCC लागू होने के बाद उत्तराखंड सरकार ने 27 जनवरी 2025 को एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया था। अब उसी पोर्टल को विवाह पंजीकरण की सुविधा के साथ और अधिक आधुनिक रूप दिया जा रहा है।
इस पोर्टल के ज़रिए दंपति अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन घर बैठे कर सकेंगे, दस्तावेज़ अपलोड कर सकेंगे और डिजिटल प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेंगे। इससे सरकारी दफ़्तरों में लगने वाली भीड़ और भ्रष्टाचार की संभावना भी घटेगी।
कानूनी और सामाजिक पक्ष
UCC के इस नए विस्तार के दो महत्वपूर्ण प्रभाव होंगे —
पहला, कानूनी समानता: सभी नागरिकों को एक समान विवाह-कानून के अंतर्गत लाकर न्यायिक प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष बनाया जाएगा।
दूसरा, सामाजिक समानता: विवाह को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक अनुबंध के रूप में मान्यता मिलेगी, जिससे महिला-पुरुष दोनों को समान अधिकार सुनिश्चित होंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह-पंजीकरण को यूनिफॉर्म सिविल कोड के दायरे में लाना एक व्यावहारिक सुधार है। इससे अदालतों में विवाह विवादों की संख्या घटेगी, क्योंकि हर विवाह का रिकॉर्ड स्पष्ट रहेगा।
विपक्ष और समाज का दृष्टिकोण
विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकार को जनजातीय समुदायों की राय और उनकी परंपराओं का सम्मान करते हुए ही कोई भी निर्णय लेना चाहिए।
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं का मत है कि यदि इस कदम को संवेदनशीलता के साथ लागू किया गया, तो यह राज्य में लैंगिक समानता और नागरिक अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक परिवर्तन सिद्ध हो सकता है।
देशभर में नजर उत्तराखंड पर
देश के कई राज्य पहले से उत्तराखंड मॉडल पर नजर रखे हुए हैं। गोवा के बाद उत्तराखंड दूसरा राज्य है जहाँ यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया गया है, और अब इसे विवाह-पंजीकरण के नए चरण तक ले जाना अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
अगर यह पहल सफल होती है, तो संभव है कि आने वाले महीनों में अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठाएँ।
महिलाओं के लिए विशेष लाभ
महिलाओं के लिए यह पहल एक सामाजिक सुरक्षा कवच की तरह है।
विवाह-पंजीकरण के बाद कोई भी व्यक्ति विवाह से इनकार नहीं कर सकेगा या दस्तावेज़ छिपा नहीं पाएगा। इससे न केवल महिला को वैधानिक पहचान मिलेगी बल्कि तलाक या संपत्ति-विवाद के समय उसका पक्ष भी मज़बूत रहेगा।
राज्य महिला आयोग ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा है कि यह पहल “महिलाओं को कानूनी रूप से सशक्त करने की दिशा में सबसे ठोस प्रयास” है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की ज़रूरत
हालांकि यह योजना कागज़ों में बेहद प्रभावी दिख रही है, लेकिन इसे ज़मीन पर लागू करने में चुनौतियाँ होंगी।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में आज भी विवाह-पंजीकरण की जागरूकता बहुत कम है। ऐसे में सरकार को ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से जनजागरण अभियान चलाना होगा ताकि हर व्यक्ति अपने विवाह को रजिस्टर कर सके।
दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड सरकार का यह प्रस्ताव राज्य के सामाजिक और कानूनी ढाँचे में बड़ा बदलाव लाने वाला है।
यदि यह कदम सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह केवल विवाह-पंजीकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक समान नागरिक आचार-संहिता के रूप में आने वाले वर्षों में पूरे देश के लिए मॉडल बन जाएगा।
“एक विवाह, एक कानून, एक व्यवस्था” — यही अब उत्तराखंड सरकार का संदेश है।
UCC के इस नए अध्याय के साथ राज्य एक बार फिर देश में सुधार और समानता की नई मिसाल लिखने जा रहा है।