एयर इंडिया हादसा: काले बॉक्स की जांच से खुलेंगे राज, यात्रियों की चीखें अब डेटा में दर्ज

12 जून को देश की राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर घटित एयर इंडिया के भयावह हादसे की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। हादसे के बाद विमान से बरामद किए गए दोनों काले बॉक्स — फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) — को विशेषज्ञों द्वारा जांच के लिए खोल दिया गया है। इन डिवाइसों में दर्ज जानकारी न केवल तकनीकी गड़बड़ी का रहस्य खोलेगी, बल्कि उस अंतिम क्षण की भी गवाही देगी जब 241 यात्रियों और 29 ज़मीन पर मौजूद लोगों की जानें चली गईं।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau) और अमेरिकी विशेषज्ञ संस्था NTSB की संयुक्त टीम ने डेटा की पहली परतें डाउनलोड करनी शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि इन रिकॉर्डरों में 2 घंटे तक की उड़ान गतिविधि और पायलटों की बातचीत दर्ज है, जिससे हादसे से ठीक पहले के हर सेकेंड की कहानी सामने लाई जा सकेगी।
हादसे के बाद विमान कंपनी बोइंग और एयर इंडिया की तकनीकी टीमें विवादों में घिर चुकी हैं। अब तक के आंतरिक ऑडिट से संकेत मिले हैं कि फ्यूल सप्लाई सिस्टम में अस्थिरता और लैंडिंग गियर के सेंसर फेलियर की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस हादसे के बाद एयर इंडिया के बेड़े में शामिल 33 ड्रीमलाइनर विमानों में से 26 की तकनीकी जांच पूरी कर ली है, और बाकी 7 को उड़ान से पहले ‘ग्राउंड क्लियरेंस सर्टिफिकेट’ लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि काले बॉक्स से प्राप्त डेटा केवल इस एक हादसे की जांच में ही नहीं, बल्कि भविष्य की उड़ानों की सुरक्षा नीतियों को फिर से परिभाषित करने में भी सहायक होगा।
परिवारों में अब भी मातम पसरा है। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि यह जांच सिर्फ जवाब नहीं देगी, बल्कि जिम्मेदारी भी तय करेगी। सवाल सिर्फ यह नहीं कि विमान क्यों गिरा, बल्कि यह भी है कि क्या गिरने से पहले उसे बचाया जा सकता था?