January 15, 2026

केदारनाथ यात्रा महंगी हुई, हेलीकॉप्टर किराया 49% बढ़ा; श्रद्धालुओं की जेब पर बोझ

केदारनाथ यात्रा महंगी हुई, हेलीकॉप्टर किराया 49% बढ़ा; श्रद्धालुओं की जेब पर बोझ
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 7 सितंबर 2025 | रुद्रप्रयाग  (उत्तराखंड) । दैनिक प्रभातवाणी ।

उत्तराखंड का केदारनाथ धाम करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर साल लाखों यात्री कठिन पैदल यात्रा के बजाय हेलीकॉप्टर सेवा का विकल्प चुनते हैं। लेकिन इस बार उनकी जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला है। प्रशासन और हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनियों ने किराए में लगभग 49% की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इसका असर स्थानीय व्यापार, राज्य पर्यटन और सबसे ज्यादा तीर्थयात्रियों पर पड़ने वाला है।


नए किराए और पुराने दामों की तुलना

  • सरसी/फाटा मार्ग
    पहले: ₹6,000 (राउंड ट्रिप)
    अब: ₹11,000 से ₹12,000
    बढ़ोतरी: ₹5,000 से ₹6,000

  • गुप्तकाशी मार्ग
    पहले: ₹7,500
    अब: ₹13,000 से ₹14,000
    बढ़ोतरी: ₹5,500 से ₹6,500

यह बढ़ोतरी केवल कुछ सौ रुपये की नहीं, बल्कि हजारों रुपये की है, जिससे अब केदारनाथ तक का हवाई सफर आम श्रद्धालुओं की पहुंच से बाहर होता दिख रहा है।


अब तक कितनी बार बढ़ा किराया

केदारनाथ हेलीकॉप्टर सेवा 2013 की आपदा के बाद यात्रियों के लिए सबसे भरोसेमंद साधन बनी। इसके बाद से धीरे-धीरे किराया बढ़ता गया।

  • 2014–2016: ₹3,500 से ₹4,500

  • 2017–2019: ₹5,500 से ₹6,000

  • 2022–2023 (कोविड के बाद): ₹6,000 से ₹7,500

  • 2025 (नवीनतम बढ़ोतरी): ₹11,000 से ₹14,000

यानी, दस साल में हेलीकॉप्टर किराया तीन गुना तक बढ़ चुका है।


क्यों बढ़ा किराया?

अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला हल्के में नहीं लिया गया है। इसके पीछे कई कारण हैं:

  1. डीजीसीए की गाइडलाइन – सुरक्षा मानकों को पहले से कहीं अधिक कड़ा किया गया है।

  2. संचालन लागत में वृद्धि – एविएशन फ्यूल, इंश्योरेंस और तकनीकी रखरखाव पर खर्च दोगुना हो चुका है।

  3. पिछले हादसे – बीते जून में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में सात लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एक उच्च स्तरीय समिति ने सुरक्षा और ऑपरेशन सुधार की सिफारिशें दीं।

  4. ऑपरेटर कंपनियों की संख्या कम – पहले 9 कंपनियां सेवा देती थीं, अब केवल 7 रह गई हैं।


यात्रियों पर असर

हजारों श्रद्धालु जो अब तक पैदल यात्रा की कठिनाई से बचने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा लेते थे, उन्हें अब जेब से दोगुना खर्च करना पड़ेगा।

  • चार सदस्यीय परिवार को अब केवल किराए में ₹50,000 से अधिक देना होगा।

  • आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालु फिर से पैदल मार्ग या खच्चर सेवा का विकल्प चुन सकते हैं।

  • वरिष्ठ नागरिक और महिलाएँ, जो हेलीकॉप्टर पर निर्भर रहती हैं, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी होगी।


स्थानीय व्यापार पर असर

रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के व्यापारियों के लिए यह स्थिति दोतरफा है।

  • महंगा किराया कुछ यात्रियों को पैदल यात्रा की ओर मोड़ेगा, जिससे रास्ते में स्थित ढाबों, दुकानों और खच्चर सेवाओं को फायदा होगा।

  • लेकिन हेलीकॉप्टर से आने वाले यात्रियों की संख्या घटने से धाम क्षेत्र के पास स्थित लॉज, होटल और गेस्ट हाउस की आय प्रभावित हो सकती है।


राज्य पर्यटन की चुनौती

उत्तराखंड सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा धार्मिक पर्यटन पर निर्भर है। अगर हेलीकॉप्टर किराए में बढ़ोतरी से यात्रियों की संख्या कम हुई तो राजस्व पर सीधा असर होगा। साथ ही, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बना रहे।


नई तारीखें और नियम

  • बुकिंग शुरू होगी: 10 सितंबर 2025 से

  • सेवा फिर शुरू होगी: 15 सितंबर 2025 से

  • यात्रियों को अब पहले से अधिक सख्त सुरक्षा जांच से गुजरना होगा।

  • प्रति दिन उड़ानें घटाकर 184 कर दी गई हैं, जिससे रोजाना केवल लगभग 1,000 यात्रियों को ही हेलीकॉप्टर सेवा मिल पाएगी।


स्थानीय लोगों की चिंता

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बढ़ा हुआ किराया सिर्फ श्रद्धालुओं को ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी प्रभावित करेगा जिन्हें आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर सेवा की जरूरत पड़ती है। बीमार मरीज, बुजुर्ग या गर्भवती महिलाओं के लिए यह सेवा महंगी और मुश्किल हो गई है।


दैनिक प्रभातवाणी

केदारनाथ धाम की यात्रा अब श्रद्धा और आस्था के साथ-साथ आर्थिक क्षमता की परीक्षा भी बन गई है। एक तरफ सुरक्षा और संचालन सुधार की जरूरत है, दूसरी ओर आम यात्रियों की जेब पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। राज्य सरकार और ऑपरेटर कंपनियों को इस संतुलन को साधना ही होगा ताकि केदारनाथ यात्रा केवल अमीरों तक सीमित न रह जाए।