छह राज्यों में फैले ‘लव जिहाद’ रैकेट का भंडाफोड़: उत्तराखंड की युवतियाँ भी निशाने पर, देहरादून से सक्रिय सदस्य गिरफ्तार

दैनिक प्रभातवाणी | विशेष रिपोर्ट
20 जुलाई 2025 | लखनऊ/देहरादून
रिपोर्टर: मानव अधिकार एवं सुरक्षा संवाददाता
छह राज्यों में फैले ‘लव जिहाद’ रैकेट का भंडाफोड़: उत्तराखंड की युवतियाँ भी निशाने पर, देहरादून से सक्रिय सदस्य गिरफ्तार
एक बार फिर उत्तर भारत के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने छह राज्यों में फैले एक कथित ‘लव जिहाद’ नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
इस पूरे रैकेट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से भी एक सक्रिय सदस्य की पहचान और गिरफ्तारी हुई है।
यह मामला केवल अपराध की दृष्टि से गंभीर नहीं है, बल्कि समाज की सांस्कृतिक संरचना, युवा पीढ़ी की मानसिक सुरक्षा, और धार्मिक सद्भाव के लिए भी एक गहन सोच और सतर्कता की माँग करता है।
क्या है ‘लव जिहाद’ का यह मामला?
‘लव जिहाद’ शब्द का प्रयोग उस रणनीति के लिए किया जाता है, जिसमें कथित तौर पर धार्मिक पहचान छुपाकर युवतियों को प्रेम के जाल में फँसाया जाता है, उनका धर्मांतरण कराया जाता है, और फिर किसी बड़े नेटवर्क या समूह विशेष की विचारधारा के तहत उनका उपयोग किया जाता है।
इस मामले में यूपी पुलिस ने जिन दस आरोपियों को पकड़ा है, वे फर्जी नाम, नकली पहचान पत्र, और सुनियोजित सोशल मीडिया प्रचार के ज़रिये भोली-भाली लड़कियों को प्रेम-जाल में फँसाने का काम कर रहे थे।
देहरादून की कड़ी सबसे खतरनाक
देहरादून से पकड़ा गया आरोपी इस नेटवर्क का डिजिटल मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर, युवतियों से संपर्क करता था।
आशंका जताई जा रही है कि उसने अकेले देहरादून, हरिद्वार और रुड़की क्षेत्र की 12 से अधिक युवतियों को संपर्क कर मानसिक रूप से प्रभावित किया। इनमें से कुछ मामलों की जाँच उत्तराखंड पुलिस द्वारा अलग से की जा रही है।
ऑपरेशन की रूपरेखा: कैसे हुआ भंडाफोड़
उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स को पिछले 4 महीनों से इस नेटवर्क की गतिविधियों की भनक लग रही थी। जासूसी तकनीकों, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, और कई युवतियों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने धीरे-धीरे इस गिरोह के ठिकानों का पता लगाया।
दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार और झारखंड में फैले इस नेटवर्क के सदस्य लगातार एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। इनमें से कुछ ने मौलवियों और स्थानीय कट्टरपंथी संगठनों के साथ सांठगांठ भी कर रखी थी।
युवतियाँ कैसे होती थीं शिकार?
इन मामलों की गहराई से की गई जाँच में यह सामने आया है कि आरोपी—
सोशल मीडिया पर फर्जी हिन्दू नामों से प्रोफाइल बनाकर संपर्क करते थे
खुद को आर्थिक रूप से सशक्त, पढ़ा-लिखा और संस्कारी बताते थे
पहले दोस्ती, फिर प्रेम, और अंत में शादी का झाँसा देकर विश्वास जीतते थे
शादी के बाद जबरन धर्मांतरण, धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने का दबाव बनाते थे
मानसिक और शारीरिक शोषण की स्थिति तक पहुँच जाती थीं पीड़ित युवतियाँ
उत्तराखंड: एक शांतिपूर्ण प्रदेश पर घना होता संकट
देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे जिले हाल के वर्षों में जनसांख्यिकीय असंतुलन और धार्मिक प्रचार गतिविधियों के चलते सामाजिक रूप से संवेदनशील हो गए हैं। इस तरह की घटनाएँ न केवल समाज की एकता को चोट पहुँचाती हैं, बल्कि उत्तराखंड जैसे शांतिप्रिय प्रदेश की पहचान पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।
राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम को दिल्ली व लखनऊ भेजा है, ताकि STF के साथ मिलकर इस नेटवर्क की उत्तराखंड शाखा को पूरी तरह नेस्तनाबूद किया जा सके।
मानवाधिकार बनाम सुरक्षा: सामाजिक बहस की ज़रूरत
इस मुद्दे को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो गई है। एक ओर जहाँ मानवाधिकार संगठन इसे प्रेम और विवाह की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संगठन इस प्रकार की गतिविधियों को “धर्म के नाम पर युवाओं को गुमराह करने की साजिश” बता रहे हैं।
यह स्पष्ट है कि यहाँ मामला केवल आपसी प्रेम या धार्मिक स्वतंत्रता का नहीं है, बल्कि सुनियोजित झूठ, छल और कट्टर विचारधारा के प्रचार का है। इसलिए ज़रूरी है कि ऐसे मामलों में प्रेम और जाल में फर्क समझा जाए।
कानूनी कार्रवाई: किन धाराओं में मुकदमा
पकड़े गए आरोपियों पर निम्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं:
IPC की धारा 419 (धोखाधड़ी), 420 (जालसाजी), 295A (धार्मिक भावना भड़काना)
IT Act की धारा 66C, 66D (फर्जी प्रोफाइल, डिजिटल धोखाधड़ी)
उत्तर प्रदेश धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021
देहरादून के आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, और STF उससे लगातार पूछताछ कर रही है।
क्या है हमारी ज़िम्मेदारी?
यह समय समाज, परिवार और प्रशासन—सभी की सामूहिक जागरूकता का है।
माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों से संवाद बनाए रखें।
युवाओं को सतर्क रहना होगा—सोशल मीडिया पर हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती।
प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में समयबद्ध न्याय और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।
दैनिक प्रभातवाणी :
‘लव जिहाद’ का यह मामला केवल एक पुलिस ऑपरेशन नहीं, बल्कि समाज की अस्मिता और विश्वास पर हमला है। यह सोचने का समय है कि हम अपने परिवार, समाज और संस्कृति को किस दिशा में ले जा रहे हैं।
धर्म, प्रेम और स्वतंत्रता तभी तक पवित्र हैं, जब वे सत्य, समर्पण और पारदर्शिता पर आधारित हों। छल, भय और झूठ से उपजा प्रेम न सिर्फ धर्म का अपमान है, बल्कि मानवता का भी।