Spread the loveदैनिक प्रभातवाणीपौड़ी, उत्तराखंड | सोमवार, 02 मार्च 2026दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो | पौड़ी। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि जेल में बंद एक ग्राम प्रधान के डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग करते हुए 14 बिल पास किए गए और सरकारी खाते से कुल 10.39 लाख रुपये की निकासी कर ली गई।जानकारी के अनुसार संबंधित ग्राम प्रधान उस समय जेल में निरुद्ध थे, इसके बावजूद उनके नाम से ऑनलाइन भुगतान स्वीकृत किए गए। मामला तब उजागर हुआ जब विभागीय स्तर पर वित्तीय अभिलेखों की नियमित जांच के दौरान भुगतान प्रक्रिया में असामान्य गतिविधियां सामने आईं। जांच अधिकारियों ने पाया कि सभी बिल डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पास किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल सिग्नेचर तक किसी अन्य व्यक्ति की पहुंच रही होगी।जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण को गंभीर लापरवाही और संभावित साजिश मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल वित्तीय गड़बड़ी का मामला नहीं बल्कि सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय भी है। घटना के बाद पंचायत स्तर पर डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।प्रशासन ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए यह जांच शुरू कर दी है कि डिजिटल सिग्नेचर किसके कब्जे में था, बिलों का सत्यापन किन अधिकारियों ने किया और भुगतान स्वीकृति के दौरान किन स्तरों पर लापरवाही हुई। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।स्थानीय लोगों में मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के लिए जारी धन का इस प्रकार दुरुपयोग विकास कार्यों को प्रभावित करता है और जनता के विश्वास को कमजोर करता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पारदर्शी जांच के माध्यम से दोषियों की जल्द पहचान कर सरकारी धन की रिकवरी की जाएगी।यह मामला एक बार फिर डिजिटल शासन प्रणाली में मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और अतिरिक्त सत्यापन व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर करता है। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग पर कड़ी निगरानी और मल्टी-लेयर सत्यापन प्रणाली लागू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। Post Views: 9 Post navigationहरिद्वार में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, दो कुंतल मिलावटी खोवा नष्ट अल्मोड़ा में साइबर ठगी का नया तरीका: तीन दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 3.54 लाख रुपये ठगे
दैनिक प्रभातवाणीपौड़ी, उत्तराखंड | सोमवार, 02 मार्च 2026दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो | पौड़ी। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि जेल में बंद एक ग्राम प्रधान के डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग करते हुए 14 बिल पास किए गए और सरकारी खाते से कुल 10.39 लाख रुपये की निकासी कर ली गई।जानकारी के अनुसार संबंधित ग्राम प्रधान उस समय जेल में निरुद्ध थे, इसके बावजूद उनके नाम से ऑनलाइन भुगतान स्वीकृत किए गए। मामला तब उजागर हुआ जब विभागीय स्तर पर वित्तीय अभिलेखों की नियमित जांच के दौरान भुगतान प्रक्रिया में असामान्य गतिविधियां सामने आईं। जांच अधिकारियों ने पाया कि सभी बिल डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पास किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल सिग्नेचर तक किसी अन्य व्यक्ति की पहुंच रही होगी।जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण को गंभीर लापरवाही और संभावित साजिश मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल वित्तीय गड़बड़ी का मामला नहीं बल्कि सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय भी है। घटना के बाद पंचायत स्तर पर डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।प्रशासन ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए यह जांच शुरू कर दी है कि डिजिटल सिग्नेचर किसके कब्जे में था, बिलों का सत्यापन किन अधिकारियों ने किया और भुगतान स्वीकृति के दौरान किन स्तरों पर लापरवाही हुई। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।स्थानीय लोगों में मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के लिए जारी धन का इस प्रकार दुरुपयोग विकास कार्यों को प्रभावित करता है और जनता के विश्वास को कमजोर करता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पारदर्शी जांच के माध्यम से दोषियों की जल्द पहचान कर सरकारी धन की रिकवरी की जाएगी।यह मामला एक बार फिर डिजिटल शासन प्रणाली में मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और अतिरिक्त सत्यापन व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर करता है। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग पर कड़ी निगरानी और मल्टी-लेयर सत्यापन प्रणाली लागू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।