January 13, 2026

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे: उत्तर भारत को मिलने जा रही है एक और हाई-स्पीड सौगात

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे जुलाई मध्य तक होगा पूरा, वन्यजीव कॉरिडोर बना आकर्षण का केंद्र
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दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे: उत्तर भारत को मिलने जा रही है एक और हाई-स्पीड सौगात
दैनिक प्रभातवाणी विशेष रिपोर्ट | 5 जुलाई 2025

देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच सफर अब पहले से कहीं ज्यादा तेज़ और सुरक्षित होने जा रहा है। केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित परियोजना – दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे – अपने अंतिम चरण में है और इसके जुलाई 2025 के मध्य तक पूरी तरह चालू होने की संभावना है।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:

🔹 लंबाई: कुल 210 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक पहुंचेगा।
🔹 कुल लागत: यह प्रोजेक्ट करीब ₹12,000 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा है।
🔹 यात्रा का समय घटेगा: इसके शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की दूरी 6 घंटे से घटकर मात्र 2.5 घंटे रह जाएगी।
🔹 ग्रीनफील्ड निर्माण: अधिकांश हिस्सा नया (ग्रीनफील्ड) बनाया गया है, जिससे ट्रैफिक, गांवों और शहरों की बाधाएं नहीं आएंगी।

 पर्यावरण के लिए खास पहल:

🔸 वाइल्डलाइफ कॉरिडोर:
इस एक्सप्रेसवे में एशिया का पहला 12–14 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी शामिल है, जो राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
यह संरचना जानवरों की सुरक्षित आवाजाही और पर्यावरणीय संतुलन के लिए अनूठा प्रयास है।

🔸 एक्सप्रेसवे पर सोलर एनर्जी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकें भी अपनाई गई हैं।

प्रगति की स्थिति:

परियोजना के कई हिस्से पहले ही यातायात के लिए खोल दिए गए हैं, और
✔️ शेष हिस्सों पर 80% से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है।
✔️ NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने संकेत दिए हैं कि जुलाई के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक यह पूरी तरह ऑपरेशनल हो सकता है।

 क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा:

 यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ उत्तराखंड और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी सुधारेगा, बल्कि रास्ते में आने वाले यूपी के जिलों को भी बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचाएगा।
पर्यटन, व्यापार, और औद्योगिक गतिविधियों में तेज़ी आने की उम्मीद है।

यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ इंजीनियरिंग की दृष्टि से बल्कि पर्यावरण और क्षेत्रीय विकास के दृष्टिकोण से भी एक मॉडल प्रोजेक्ट माना जा रहा है। देश के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी।