देहरादून में पावर और पानी का संकट गहराया, हजारों घरों में मुश्किलें

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून, 19 सितंबर 2025
देहरादून शहर और आसपास के कई इलाकों में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं के कारण बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके चलते आम जनता को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम और जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार लगभग 2.35 लाख लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि कई क्षेत्रों में बिजली कटौती का संकट बरकरार है।
पानी की समस्या सबसे अधिक तब महसूस की जा रही है, जब शहर के प्रमुख जल स्रोत प्रभावित हुए हैं। बिजापुर, बंडाल, केसरवाला और अन्य मुख्य जलाशयों से पानी की आपूर्ति ठप होने से कई मोहल्लों में पानी की किल्लत बढ़ गई है। जल संस्थान के महाप्रबंधक ने बताया कि लगातार बारिश और भूस्खलन की वजह से इन स्रोतों तक पहुंचने वाली पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मरम्मत कार्य तेजी से जारी है, लेकिन कई जगहों पर भारी बारिश और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण टीमों को पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
महाप्रबंधक ने लोगों से अपील की है कि इस कठिन समय में पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी और सीमित मात्रा में करें। उन्होंने कहा, “हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी घर में पीने योग्य पानी की कमी न हो। इसलिए जनता से अनुरोध है कि अनावश्यक पानी का उपयोग न करें।”
बिजली आपूर्ति की स्थिति भी किसी से छुपी नहीं है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण सैकड़ों विद्युत पोल टूट गए हैं। इससे कई फीडर लाइनें ठप हो गई हैं और रायपुर, प्रेमनगर, पटेलनगर, बनियावाला और घंटाघर क्षेत्र में बिजली बहाल करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। विभाग के मुख्य अभियंता ने कहा कि मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन पहाड़ी और घनी आबादी वाले इलाकों में काम करने में समय लग रहा है। कई क्षेत्रों में बिजली बहाल होने में अगले 24 घंटे तक का समय लग सकता है।
इस संकट के बीच प्रशासन ने कुछ वैकल्पिक कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सोनिका ने बताया कि सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में पानी की तात्कालिक आपूर्ति के लिए टैंकरों की व्यवस्था की गई है। प्राथमिकता के आधार पर पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी व्यक्ति द्वारा टंकियों या पाइपलाइनों में छेड़छाड़ करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने साथ ही लोगों से अपील की कि अनावश्यक बिजली का उपयोग न करें और बिजली बचाने में सहयोग दें।
जनजीवन पर इस संकट का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में पानी की बोतलों और कैन की कीमतें बढ़ गई हैं। दुकानों पर पानी की भारी मांग के कारण कई स्थानों पर स्टॉक खत्म हो गया है। स्थानीय निवासी आशुतोष शर्मा ने बताया, “सुबह से पानी की एक बूंद तक नहीं आई। हमें मजबूरन बाजार से बोतलें खरीदनी पड़ीं। बिजली भी रातभर से नहीं है, जिससे मोबाइल चार्ज करने और जरूरी काम करने में परेशानी हो रही है।”
सामान्य जनता की परेशानियों में वृद्ध और बच्चों के लिए स्थिति और कठिन हो गई है। बुजुर्गों और बीमार लोगों को पानी और बिजली के अभाव में रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। छोटे बच्चों और स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए भी यह मुश्किल भरा समय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते शहर में जलस्रोतों और बिजली लाइनों की सुरक्षा के लिए स्थायी योजना की आवश्यकता है। लगातार बढ़ते शहरीकरण और पुराने ढांचे पर दबाव के कारण ऐसे संकट बार-बार सामने आते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अतिरिक्त जलाशय बनाना, पाइपलाइनों की मजबूती, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम और नियमित मेंटेनेंस इस तरह की आपदाओं में राहत दे सकता है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आपदा प्रबंधन और आपूर्ति तंत्र को मजबूत करने के लिए नई परियोजनाओं की जरूरत है। इससे प्राकृतिक आपदाओं के समय आम जनता को इस तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में शहर के विकास और बढ़ती आबादी के अनुसार जल और बिजली आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जा रही हैं।
इस समय प्रशासन और विभागों के लिए यह चुनौती भी है कि वह प्रभावित इलाकों तक समय पर पहुंचें और मरम्मत कार्य तेजी से पूरा करें। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में जलाशयों और बिजली फीडर लाइनों की सुरक्षा के लिए न केवल तत्काल मरम्मत बल्कि भविष्य की योजना बनाना जरूरी है।
इस संकट ने यह भी दिखा दिया है कि नागरिकों को भी आपदा के समय सतर्क और जिम्मेदार होना चाहिए। पानी की बचत, बिजली का सीमित उपयोग और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन इस समय अत्यंत आवश्यक है। यदि सभी मिलकर सहयोग करेंगे, तो संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय प्रशासन ने दावा किया है कि अगले दो दिनों में अधिकतर क्षेत्रों में बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारियों और टैंकरों की व्यवस्था की गई है। साथ ही, उन्होंने निवासियों से आग्रह किया है कि वे धैर्य बनाए रखें और संकट के समय एक-दूसरे की मदद करें।
इस संकट ने एक बार फिर शहर के आधारभूत ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि देहरादून जैसे तेजी से urbanized शहरों में जल और बिजली आपूर्ति के पुराने ढांचे को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। नई तकनीक और बेहतर आपदा प्रबंधन नीति के माध्यम से भविष्य में इस तरह के हालात से बचा जा सकता है।
अंततः यह स्पष्ट है कि देहरादून में पावर और पानी की कमी फिलहाल आम जनता की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। प्रशासन और विभाग सभी प्रयास कर रहे हैं कि जल और बिजली की आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल हो। लेकिन यह संकट हमें यह भी याद दिलाता है कि शहरी विकास के साथ-साथ आधारभूत ढांचे को समय पर सुदृढ़ करना कितना जरूरी है।