देहरादून में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला: उप शिक्षा अधिकारी और सह-अभियुक्ता रंगे हाथ गिरफ्तार
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दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 1 अप्रैल 2026

देहरादून में बुधवार को भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। थाना सतर्कता सेक्टर देहरादून में पंजीकृत मुकदमा संख्या 07/2026 के तहत उप शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट और सह-अभियुक्ता पुष्पांजलि को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। यह मामला शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) से जुड़े बिल भुगतान के दौरान रिश्वत मांगने का है, जो पूरे जिले और शिक्षा विभाग के लिए एक चेतावनी बन गया है।

शिकायत और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

सूत्रों के अनुसार, उप शिक्षा अधिकारी और प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट, डोईवाला, देहरादून ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत अध्ययनरत छात्रों की प्रतिपूर्ति के बिल के भुगतान के एवज में शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये की रिश्वत मांग की। इस दौरान शिकायतकर्ता ने सतर्कता सेक्टर देहरादून को सूचना दी, जिसके आधार पर ट्रैप टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी और सह-अभियुक्ता को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

अभियुक्ता पुष्पांजलि, पत्नी पंकज शर्मा, वर्तमान में स्वामी उत्तरांचल मॉडर्न स्कूल, गुमानीवाला, ऋषिकेश में तैनात है। दोनों आरोपियों ने शिकायतकर्ता से रिश्वत लेते समय पूरी तरह सावधानी नहीं बरती, जिसके चलते सतर्कता टीम ने तुरंत कार्रवाई की।

सतर्कता टीम की कार्रवाई

सतर्कता सेक्टर देहरादून की टीम ने बताया कि ट्रैप ऑपरेशन के दौरान दोनों आरोपी शिकायतकर्ता से रिश्वत ले रहे थे। टीम ने मौके पर ही कार्रवाई की और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई शिक्षा विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। ट्रैप ऑपरेशन को बहुत ही गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया और इसमें शिकायतकर्ता के साथ मिलकर कार्रवाई की गई।

आरोपी और उनकी पृष्ठभूमि

धनवीर सिंह बिष्ट, उप शिक्षा अधिकारी और प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी, डोईवाला, देहरादून में कार्यरत हैं। उनका विभाग शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत छात्रों के बिल और प्रतिपूर्ति की देखरेख करता है। आरोप है कि उन्होंने इस शक्ति का दुरुपयोग करते हुए पैसे की मांग की।

सह-अभियुक्ता पुष्पांजलि वर्तमान में स्वामी उत्तरांचल मॉडर्न स्कूल, गुमानीवाला, ऋषिकेश में कार्यरत हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने भी इस भ्रष्टाचार में सक्रिय भागीदारी निभाई और आरोपी को समर्थन दिया।

शिक्षा विभाग और RTE का महत्व

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक बालक को गुणवत्तापूर्ण और मुफ्त शिक्षा मिल सके। इसमें स्कूलों द्वारा छात्रों के बिल और प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

इस मामले में आरोपी अधिकारियों द्वारा छात्रों की प्रतिपूर्ति के बिल भुगतान के एवज में रिश्वत मांगना सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की नीतियों का उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई न केवल शिक्षा प्रणाली में विश्वास को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि आम जनता में शिक्षा के अधिकारों के प्रति निराशा भी बढ़ाती है।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

सतर्कता टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। टीम के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई किसी भी सरकारी कर्मचारी को संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के मामले में कोई भी सुरक्षित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और आरोपी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

समाज और शिक्षा पर प्रभाव

इस घटना ने पूरे देहरादून जिले में शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर किया है। शिक्षकों और अधिकारियों के द्वारा रिश्वत लेना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए मानसिक और वित्तीय दबाव भी पैदा करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा विभाग में समय-समय पर इस तरह की निगरानी आवश्यक है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामले उजागर किए जाने चाहिए।

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि यह गिरफ्तारी एक सकारात्मक संकेत है और भविष्य में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अपने कर्तव्यों में ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगी।

आगे की प्रक्रिया

पुलिस ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ट्रैप टीम और सतर्कता अधिकारी दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं और मामले में और भी गहराई से जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत इस तरह की कार्रवाइयों से सरकारी तंत्र में विश्वास बढ़ता है। ऐसे मामलों का खुलासा और सख्त कार्रवाई समाज में सकारात्मक संदेश देती है कि कोई भी व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग नहीं कर सकता।

निष्कर्ष

देहरादून में बुधवार को हुई यह गिरफ्तारी एक उदाहरण है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय निगरानी और कार्रवाई से सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है। उप शिक्षा अधिकारी और सह-अभियुक्ता की गिरफ्तारी न केवल शिक्षा विभाग में जवाबदेही को मजबूत करती है बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कायम रखती है।

यह घटना शिक्षा विभाग और पूरे प्रशासन के लिए एक संदेश है कि भ्रष्टाचार किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह आम नागरिकों को भी जागरूक करती है कि किसी भी अनियमितता की सूचना देना समाज और प्रशासन के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

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