प्रेमजाल में फंसाकर नाबालिग का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप, डोईवाला में तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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देहरादून :उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के डोईवाला क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की को कथित रूप से प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किए जाने का आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक महिला समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है और प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता की मां ने थाना डोईवाला में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उनकी 15 वर्षीय बेटी को योजनाबद्ध तरीके से प्रभावित किया गया। पीड़िता का परिवार पिछले चार वर्षों से एक किराए के मकान में रह रहा था, जहां अन्य किराएदार भी निवास करते थे। आरोप है कि इन्हीं किराएदारों में शामिल एक युवक ने नाबालिग लड़की के साथ नजदीकियां बढ़ाईं और उसे अपने प्रभाव में लेकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब परिवार के सदस्य घर पर मौजूद नहीं होते थे, तब आरोपी युवक घर में आता-जाता था और धीरे-धीरे नाबालिग के साथ संपर्क बढ़ाता गया। पीड़िता की मां का आरोप है कि इसी दौरान लड़की को विशेष धर्म से जुड़ी जीवनशैली, पहनावे और व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। समय के साथ लड़की उस प्रभाव में आती चली गई और कथित तौर पर उसी धर्म का पालन करने लगी।

परिजनों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम धीरे-धीरे विकसित हुआ, जिससे उन्हें समय रहते स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हो सका। जब परिवार को इस बात का संदेह हुआ, तब उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने बिना देरी किए कार्रवाई करते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

इस मामले में उत्तराखंड पुलिस ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की है। कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को जबरन, धोखे से या लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करना दंडनीय अपराध है, विशेषकर जब मामला नाबालिग से जुड़ा हो तो इसकी गंभीरता और भी बढ़ जाती है।

एसपी देहात जया बलूनी ने जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता की मां की तहरीर के आधार पर एक महिला समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों की पुष्टि करना बेहद जरूरी होता है, इसलिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। नाबालिग की काउंसलिंग भी कराई जा सकती है, ताकि उसकी स्थिति और मानसिक अवस्था को समझा जा सके। साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं इस मामले में किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या साजिश तो शामिल नहीं है।

यह घटना समाज में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ उनके सामाजिक दायरे और संपर्कों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। विशेषकर ऐसे समय में जब बच्चे तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश और डिजिटल दुनिया के प्रभाव में आ रहे हैं, उन्हें सही मार्गदर्शन और संवाद की आवश्यकता होती है।

प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। संवेदनशील मामलों में बिना पुष्टि के जानकारी साझा करना स्थिति को और जटिल बना सकता है। इसलिए नागरिकों को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने की सलाह दी गई है।

फिलहाल, पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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