Spread the loveदेहरादून। देहरादून में जमीन से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की संपत्ति को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर हड़पने की साजिश रची गई थी। दून पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित महिला को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा मामला न केवल संपत्ति विवाद का है, बल्कि इसमें मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित महिला ने अपने साथियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से कूटरचना की और ऐसे दस्तावेज तैयार कराए, जिनका उद्देश्य एक वैध उत्तराधिकारी को उसकी संपत्ति से वंचित करना था। यह मामला पटेलनगर क्षेत्र का है, जहां एक स्थानीय निवासी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पारिवारिक संपत्ति पर अवैध तरीके से दावा किया जा रहा है। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब सी-19 टर्नर रोड निवासी राहुल देव ने कोतवाली पटेलनगर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके ममेरे दादा केवल कृष्ण ने वर्ष 2009 में अपनी संपत्ति एक वसीयत के माध्यम से उन्हें सौंप दी थी। इसके बाद वर्ष 2016 में केवल कृष्ण का निधन हो गया और वर्ष 2024 में राहुल देव ने विधिवत रूप से उस संपत्ति को अपने नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया था। सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन वर्ष 2026 में एक अचानक खुलासे ने पूरे परिवार को हिला दिया। राहुल देव ने बताया कि जब उन्होंने भूमि का नवीनतम रिकॉर्ड यानी फर्द निकलवाई, तो उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उस भूमि पर एक अन्य महिला द्वारा दावा किया गया है और यहां तक कि न्यायालय से स्टे भी प्राप्त कर लिया गया है। यह दावा बबीता देवी नामक महिला द्वारा वर्ष 2025 में किया गया था, जिसने खुद को उस संपत्ति की वैध अधिकारिणी बताया था। जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ी, पुलिस को कई गंभीर अनियमितताएं और फर्जीवाड़े के प्रमाण मिलने लगे। जांच में यह सामने आया कि जिस व्यक्ति के नाम पर कथित रूप से पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई थी, वह व्यक्ति वर्षों पहले ही मृत्यु को प्राप्त कर चुका था। इसके बावजूद उसके नाम पर दस्तावेज तैयार करना अपने आप में एक संगठित अपराध की ओर संकेत कर रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपितों ने न केवल फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की, बल्कि दस्तावेजों में ऐसे व्यक्तियों को गवाह बनाया गया, जिनकी भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। इनमें राजकमल पुत्र रामपाल और मोहम्मद इनाम कुरैशी पुत्र हाजी अब्दुल जैसे नाम शामिल हैं, जिनके माध्यम से दस्तावेजों को वैध दिखाने का प्रयास किया गया था। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पटेलनगर में 17 अप्रैल 2026 को विधिवत मुकदमा दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने इसे प्राथमिकता पर लेते हुए जांच टीम को आवश्यक साक्ष्य जुटाने और आरोपितों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। जांच के दौरान पुलिस ने रजिस्ट्री कार्यालय, राजस्व विभाग और विभिन्न बैंकिंग दस्तावेजों की गहन जांच की। इन दस्तावेजों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किए गए कई कागजात वास्तविक नहीं थे और उनमें छेड़छाड़ की गई थी। दस्तावेजों की सत्यता जांचने के बाद पुलिस को यह पुष्टि मिली कि यह पूरा मामला सुनियोजित धोखाधड़ी का हिस्सा है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों ने फर्जी आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का उपयोग कर एक ऐसा ढांचा तैयार किया, जिससे यह लगे कि संपत्ति पर उनका वैध अधिकार है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से स्टे प्राप्त कर लिया, जिससे वास्तविक मालिक को संपत्ति पर नियंत्रण पाने में बाधा उत्पन्न हुई। पुलिस ने इस मामले में तकनीकी और मानवीय दोनों तरह की जांच को आगे बढ़ाया। मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को जानकारी मिली कि मुख्य आरोपित बबीता देवी सहारनपुर क्षेत्र में छिपी हुई है। सूचना की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक जून 2026 को सहारनपुर के गंगोह रोड तिराहा क्षेत्र से उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया कि आरोपित महिला ने अपने साथियों के साथ मिलकर यह पूरा नेटवर्क तैयार किया था। उनका उद्देश्य एक ऐसी संपत्ति पर कब्जा करना था जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह ने जानबूझकर ऐसे मामलों को चुना, जिनमें पुराने रिकॉर्ड और पारिवारिक विवादों का फायदा उठाया जा सके। इस प्रकार के मामलों में सबसे गंभीर पहलू यह होता है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय तक को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता है। इस केस में भी यही रणनीति अपनाई गई, जिसमें पहले दस्तावेज तैयार किए गए, फिर गवाहों के माध्यम से उन्हें वैध दिखाया गया और अंत में कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए स्टे प्राप्त किया गया। देहरादून पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में अभी अन्य कई लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। जांच टीम अब उन सभी व्यक्तियों की तलाश में जुटी है, जिन्होंने दस्तावेज तैयार करने, सत्यापन कराने या गवाह के रूप में भूमिका निभाई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक जमीन विवाद नहीं है, बल्कि यह एक संगठित आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें कानून और न्याय प्रणाली को धोखा देने का प्रयास किया गया। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता होती है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह के फर्जीवाड़े की कोशिश न कर सके। वर्तमान में गिरफ्तार आरोपित महिला से पूछताछ जारी है और पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितनी अन्य संपत्तियों को इसी तरह निशाना बनाया गया है। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भूमि विवादों में दस्तावेजों की सत्यता और कानूनी प्रक्रिया की गहन जांच कितनी महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते शिकायत दर्ज न होती, तो संभव था कि यह संपत्ति भी अवैध कब्जे की भेंट चढ़ जाती। देहरादून पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और सभी आरोपितों को कानून के दायरे में लाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। Post Views: 2 Post navigation देहरादून में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 5 किलो 992 ग्राम गांजे के साथ महिला तस्कर गिरफ्तार उत्तराखंड STF की बड़ी कार्रवाई, 86 अवैध बेटिंग वेबसाइटें ब्लॉक, करोड़ों रुपये के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा