बहादराबाद टोल प्लाज़ा पर किसानों का महाधरना – राकेश टिकैत की हुंकार से गूंजा उत्तराखंड, हाईवे जाम

बहादराबाद टोल प्लाज़ा पर किसानों का महाधरना – राकेश टिकैत ने दी चेतावनी, हाईवे ठप
📰 दैनिक प्रभातवाणी विशेष रिपोर्ट
हरिद्वार, 23 अगस्त 2025।
उत्तराखंड की पवित्र नगरी हरिद्वार आज किसानों के आक्रोश का गवाह बनी। बहादराबाद टोल प्लाज़ा पर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन शुरू किया। यह आंदोलन हाल ही में हुए लाठीचार्ज की घटना के खिलाफ जवाबदेही तय करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू हुआ है। देखते ही देखते दिल्ली–देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और हजारों वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे।
लाठीचार्ज ने भड़काई चिंगारी
किसानों के इस आंदोलन की नींव उस समय पड़ी, जब कुछ दिन पहले किसानों ने अपने हक़ और समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उस प्रदर्शन पर पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज कर दिया, जिससे कई किसान घायल हो गए।
ग्रामीण इलाकों से आए किसानों का कहना है कि बुजुर्गों और महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया।
कई लोगों को चोटें आईं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर किसी अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।
यही घटना अब किसानों की असंतोष की आग को और भड़काने का कारण बनी।
भारतीय किसान यूनियन ने उसी समय एलान किया था कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो किसान सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन करेंगे। रविवार को बहादराबाद टोल प्लाज़ा पर यही चेतावनी हकीकत में बदल गई।
धरने की शुरुआत: सुबह से जुटने लगे किसान
सुबह 10 बजे से ही अलग-अलग गांवों और कस्बों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों के साथ बहादराबाद टोल प्लाज़ा की ओर बढ़ने लगे। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती गई और देखते ही देखते टोल प्लाज़ा पूरी तरह किसानों के कब्जे में आ गया।
किसानों ने टोल प्लाज़ा पर झंडे और बैनर लगा दिए।
मंच पर नेताओं ने बैठकर किसानों को संबोधित करना शुरू किया।
महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में कहा:
“हम लोकतंत्र में जी रहे हैं। अगर किसान अपनी बात भी नहीं रख पाएगा और उस पर लाठियां बरसाई जाएंगी, तो यह लोकतंत्र की हत्या है। हम तब तक यहाँ से नहीं हटेंगे, जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती।”
हाईवे पर अफरा-तफरी – यात्री परेशान
धरने की वजह से दिल्ली–देहरादून हाईवे (NH-58) पर लंबा जाम लग गया।
हरिद्वार और ऋषिकेश की ओर जाने वाले हजारों वाहन बीच रास्ते में अटक गए।
पर्यटक, स्थानीय यात्री और काम पर जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे।
कई एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं को निकालने के लिए पुलिस को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ा।
प्रशासन को मजबूर होकर यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट करना पड़ा।
इस जाम ने आम जनता को भारी परेशानी में डाल दिया, लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनके साथ न्याय नहीं होगा, तब तक उन्हें पीछे हटना मजबूरी नहीं है।
किसानों की प्रमुख मांगें
धरने के दौरान किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी साफ़-साफ़ मांगें रखीं:
हालिया लाठीचार्ज की न्यायिक जांच हो।
दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
किसानों के खिलाफ दर्ज सभी फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए।
किसानों के साथ भविष्य में सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
धरने की गंभीरता को देखते हुए हरिद्वार प्रशासन और पुलिस उच्च सतर्कता पर रहे।
भारी पुलिस बल टोल प्लाज़ा और आसपास तैनात रहा।
प्रशासन ने आंदोलनकारी किसानों से बातचीत की पहल की।
पुलिस ने किसी भी प्रकार के टकराव से बचने की रणनीति अपनाई।
जिला प्रशासन की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
राकेश टिकैत की हुंकार
धरने के दौरान राकेश टिकैत ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन यहीं तक सीमित नहीं रहेगा।
“यह आंदोलन अब पूरे उत्तराखंड से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक फैलेगा। सरकार को यह समझना होगा कि किसान की आवाज़ को दबाना आसान नहीं है।”
टिकैत के इस बयान ने आंदोलन में मौजूद किसानों का हौसला और बढ़ा दिया।
किसानों की गवाही
धरने में शामिल कुछ किसानों ने मीडिया से अपनी पीड़ा साझा की:
“हम शांतिपूर्ण ढंग से बैठे थे, फिर भी हम पर लाठियाँ बरसीं। यह अन्याय है।”
“हम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं आए हैं। हमें केवल इंसाफ चाहिए।”
“जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलेगी, हम घर नहीं जाएंगे।”
स्थानीय असर और जनता की मुश्किलें
धरने और हाईवे जाम का असर स्थानीय जीवन पर भी साफ दिखाई दिया।
आस-पास के बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ।
स्कूली बच्चों और दफ्तर जाने वाले लोगों को परेशानी हुई।
पर्यटक स्थलों जैसे हरिद्वार और ऋषिकेश की ओर जाने वाले यात्रियों की योजनाएँ बिगड़ गईं।
इसके बावजूद स्थानीय लोगों में से कई किसान आंदोलन के समर्थन में भी खड़े दिखे। उनका कहना है कि पुलिस का रवैया वाकई कठोर रहा है और किसानों के साथ न्याय होना चाहिए।
भविष्य की रणनीति – आंदोलन और बड़ा हो सकता है
भारतीय किसान यूनियन के सूत्रों का कहना है कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है।
दिल्ली, देहरादून और लखनऊ में बड़े धरनों की तैयारी की जा सकती है।
पड़ोसी राज्यों के किसान संगठनों को भी इस आंदोलन से जोड़ा जा सकता है।
आंदोलन को लंबी अवधि तक चलाने के लिए भोजन और संसाधनों की व्यवस्था भी की जा रही है।
दैनिक प्रभातवाणी
बहादराबाद टोल प्लाज़ा पर शुरू हुआ यह आंदोलन बताता है कि किसानों का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ है। 2020–21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन की गूंज अब एक बार फिर सुनाई देने लगी है। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
प्रशासन और सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती है –
एक ओर आम जनता को राहत देना,
और दूसरी ओर किसानों के साथ न्याय सुनिश्चित करना।
यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो यह आंदोलन उत्तराखंड की सीमाओं से निकलकर पूरे उत्तर भारत में गूंज सकता है।