January 13, 2026

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 698.95 अरब डॉलर पर पहुंचा, ऑल-टाइम हाई के करीब

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मुंबई, 20 जून (आईएएनएस) – भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूती की ओर बढ़ रहा है। 13 जून को समाप्त सप्ताह में इसमें 2.29 बिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे देश का कुल फॉरेक्स रिजर्व 698.95 बिलियन डॉलर हो गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को जारी अपने ताजा आंकड़ों में दी।

📈 ऑल-टाइम हाई के करीब

इस ताज़ा बढ़त के साथ भारत का फॉरेक्स भंडार अब अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर 704.885 बिलियन डॉलर से केवल 5.93 बिलियन डॉलर पीछे है। यह रिकॉर्ड सितंबर 2021 के अंत में दर्ज किया गया था।

📊 घटकों में प्रमुख वृद्धि

आरबीआई के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज यह बढ़त कई प्रमुख घटकों में हुई बढ़ोत्तरी का परिणाम है:

  • 🔹 विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA):
    1.73 बिलियन डॉलर बढ़कर 589.42 बिलियन डॉलर पर पहुंचीं।

  • 🔹 सोने का भंडार:
    428 मिलियन डॉलर की बढ़त के साथ इसकी वैल्यू 86.32 बिलियन डॉलर हो गई।
    ध्यान देने योग्य बात यह है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के चलते केंद्रीय बैंक गोल्ड रिजर्व को एक सुरक्षित संपत्ति मानते हुए भंडारण बढ़ा रहे हैं।
    आरबीआई ने 2021 से अब तक अपने स्वर्ण भंडार को लगभग दोगुना कर लिया है।

  • 🔹 विशेष आहरण अधिकार (SDR):
    85 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.76 बिलियन डॉलर पर।

  • 🔹 आईएमएफ के साथ भारत की आरक्षित स्थिति:
    43 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ यह 4.45 बिलियन डॉलर हो गई।

🗨️ गवर्नर संजय मल्होत्रा का बयान

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जून के आरंभ में मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान बताया था कि 30 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 691.5 बिलियन डॉलर था। उन्होंने जोर देकर कहा:

“भारत का फॉरेक्स भंडार 11 महीने से अधिक के माल आयात और 96% बाहरी ऋणों को फंड करने के लिए पर्याप्त है। हमारा एक्सटर्नल सेक्टर मज़बूत बना हुआ है और इसमें लगातार सुधार हो रहा है।”

💡 विदेशी मुद्रा भंडार क्यों अहम है?

  • संकट के समय आयात बिल चुकाने में सहायता

  • रुपये को अस्थिरता से बचाना

  • वैश्विक वित्तीय असंतुलन से सुरक्षा

  • निवेशकों को स्थायित्व का संदेश

🌍 वैश्विक रैंकिंग में भारत

भारत अब विश्व के शीर्ष 5 फॉरेक्स होल्डर्स में बना हुआ है। चीन, जापान, स्विट्ज़रलैंड और रूस के बाद भारत की स्थिति और मजबूत हो रही है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर ऐतिहासिक ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह, आयात प्रबंधन, और सोने की रणनीतिक खरीद ने इस दिशा में अहम भूमिका निभाई है। यदि यही रुझान बना रहा, तो भारत जल्द ही अपने ऑल-टाइम हाई 704.88 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है।