January 15, 2026

भारत की तकनीकी छलांग: स्वदेशी 32-बिट चिप ‘विक्रम’ का अनावरण, सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

भारत की तकनीकी छलांग: स्वदेशी 32-बिट चिप ‘विक्रम’ का अनावरण, सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
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तकनीकी  आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश में पहली बार स्वदेशी रूप से विकसित 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर चिप ‘विक्रम’ का अनावरण हुआ है। यह चिप इस बात का प्रतीक है कि भारत अब केवल अंतरिक्ष और रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनका निर्माता भी बन रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और सेमी-कंडक्टर लेबोरेट्री (SCL) के वैज्ञानिकों ने वर्षों की मेहनत और शोध के बाद इस उपलब्धि को साकार किया है।


विक्रम चिप की उत्पत्ति और नामकरण

इस माइक्रोप्रोसेसर का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। यह नाम न केवल वैज्ञानिकों के योगदान को सम्मान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित भी करता है। ‘विक्रम’ चिप का विकास आत्मनिर्भर भारत अभियान और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़ा है।


तकनीकी विशेषताएँ और संरचना

‘विक्रम’ चिप एक 32-बिट RISC-V आर्किटेक्चर आधारित माइक्रोप्रोसेसर है। यह तेज़ प्रोसेसिंग क्षमता, ऊर्जा-कुशल डिज़ाइन और बहुउद्देश्यीय उपयोग की दृष्टि से विशेष है।

  • प्रोसेसिंग स्पीड: उच्च प्रदर्शन देने वाला आधुनिक आर्किटेक्चर

  • ऊर्जा क्षमता: कम ऊर्जा खपत में बेहतर आउटपुट

  • मेमोरी सपोर्ट: एडवांस्ड कैश मैनेजमेंट सिस्टम

  • सुरक्षा: साइबर हमलों से बचाने के लिए उन्नत सिक्योरिटी मॉड्यूल

इन विशेषताओं के कारण यह चिप अंतरिक्ष मिशनों, सैटेलाइट्स, सैन्य उपकरणों और स्मार्ट डिवाइसों में उपयोग के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।


ISRO और SCL की भूमिका

चिप निर्माण में सेमीकंडक्टर लेबोरेट्री (SCL), मोहाली की भूमिका अहम रही है। ISRO ने अंतरिक्ष मिशनों में इस्तेमाल होने वाले प्रोसेसरों की जरूरत को देखते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाया। SCL वैज्ञानिकों ने डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन तक हर चरण पर काम किया। इस सहयोग का परिणाम है कि भारत को अब विदेशी चिप्स पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।


अंतरिक्ष कार्यक्रम में उपयोग

भारत के अंतरिक्ष अभियानों को स्वदेशी ‘विक्रम’ चिप से नई मजबूती मिलेगी। अब PSLV और GSLV जैसे रॉकेट्स, सैटेलाइट्स और गगनयान मिशन जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों में इस चिप का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह न केवल लागत कम करेगा बल्कि डेटा की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।


रक्षा क्षेत्र में महत्व

रक्षा उपकरणों और रणनीतिक संचार तंत्र में विदेशी चिप्स पर निर्भरता हमेशा एक सुरक्षा जोखिम रही है। ‘विक्रम’ चिप के आने से भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। मिसाइल सिस्टम, राडार, ड्रोन और नेविगेशन सिस्टम में इस चिप का इस्तेमाल किया जा सकेगा।


नागरिक उपयोग और डिजिटल इंडिया से जुड़ाव

भविष्य में यह चिप आम नागरिक जीवन से भी जुड़ सकती है। मोबाइल फोन, टैबलेट, स्मार्ट वॉच, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस, स्मार्ट मीटर और ऑटोमोबाइल सेक्टर में इसका उपयोग संभव है। इससे ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों को गति मिलेगी।


वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य और भारत

दुनिया भर में सेमीकंडक्टर चिप्स का बाजार खरबों डॉलर का है। अब तक अमेरिका, ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान इस उद्योग में अग्रणी रहे हैं। भारत का इस क्षेत्र में प्रवेश देर से हुआ, लेकिन ‘विक्रम’ चिप इस दिशा में भारत की गंभीरता को दर्शाता है। यह कदम भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकता है।


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया है, जिसके तहत देश में फैब यूनिट्स स्थापित करने की योजना है। ‘विक्रम’ चिप इसी दिशा में पहला ठोस परिणाम है। आने वाले वर्षों में इससे रोजगार, निवेश और तकनीकी अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।


चुनौतियाँ और भविष्य की राह

हालाँकि इस उपलब्धि के साथ कई चुनौतियाँ भी सामने हैं। चिप निर्माण एक पूंजी और तकनीक-गहन प्रक्रिया है। इसके लिए हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषज्ञता और बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। चीन, अमेरिका और ताइवान जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करना आसान नहीं होगा। फिर भी, भारत ने पहला कदम रख दिया है और आने वाले वर्षों में यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है।


 एक नए युग की शुरुआत

‘विक्रम’ चिप का निर्माण केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक है। इससे भारत न केवल अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में सशक्त होगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भी अपनी जगह बनाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान और तकनीक में और आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।


लेखक: दैनिक प्रभातवाणी विशेष संवाददाता
तारीख: 3 सितंबर 2025, नई दिल्ली