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नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आने की दिशा में केंद्र सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। महिलाओं को संसद में अधिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। इसके साथ ही Lok Sabha की कुल सीटों को बढ़ाकर 816 तक करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बदलाव को लागू करने से पहले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को पूरा करना चाहती है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं, लेकिन जनसंख्या के आधार पर नई सीमांकन प्रक्रिया के बाद सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा संभव माना जा रहा है।

महिला आरक्षण कानून, जिसे हाल ही में संसद में पारित किया गया था, के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि इस कानून को लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना जैसे जरूरी चरण पूरे होने बाकी हैं।

यदि सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 की जाती है, तो इसमें से लगभग एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी और राजनीतिक संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को मजबूती देगा, बल्कि नीति निर्माण में विविधता और संतुलन भी लाएगा। हालांकि विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की टाइमिंग और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं, खासकर यह कि इसे लागू करने में कितना समय लगेगा और किन राज्यों को कितना प्रतिनिधित्व मिलेगा।

सरकार का कहना है कि सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार का विवाद न हो। परिसीमन आयोग के गठन और जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह प्रस्ताव कब तक जमीन पर उतरता है, लेकिन इतना निश्चित है कि यदि यह लागू होता है तो भारतीय राजनीति का स्वरूप बदलने वाला है।