रामनगर दशहरा: पटाखों पर पूरी रोक, पर्यावरण-संवेदनशील उत्सव की तैयारी

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून, 19 सितंबर 2025
रामनगर में इस वर्ष दशहरा पर्व को लेकर प्रशासन और स्थानीय समुदाय की तैयारियाँ पहले से ही जोर-शोर से चल रही थीं। लेकिन कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पारंपरिक आग्नेयास्त्र और पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि भविष्य में उत्सव मनाने के लिए केवल डिजिटल, LED और अन्य पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों का ही प्रयोग किया जाए। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देता है।
पारंपरिक उत्सव और इसके पर्यावरणीय प्रभाव
दशहरा पर्व पर रावण दहन और आतिशबाज़ी का इतिहास सदियों पुराना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि, हर साल इस उत्सव के दौरान भारी मात्रा में धुआँ, ध्वनि प्रदूषण और वातावरण में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। स्थानीय प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्षों में पटाखों के कारण छोटे-मोटे हादसे, आग लगने की घटनाएँ और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
पर्यावरणविद् डॉ. रश्मि सिंह के अनुसार, “पारंपरिक पटाखों के धुएँ में नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें शामिल होती हैं, जो श्वसन संबंधी बीमारियों और प्रदूषण में वृद्धि का मुख्य कारण बनती हैं। डिजिटल और LED विकल्प अपनाने से यह खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।”
कोर्ट का निर्णय और स्थानीय प्रशासन की भूमिका
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष रामनगर में दशहरा पर्व का आयोजन केवल पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से ही किया जाएगा। इसके तहत आयोजकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे:
पारंपरिक पटाखों का उपयोग पूरी तरह बंद करें।
रावण दहन और अन्य शो के लिए डिजिटल/LED विकल्प अपनाएँ।
उत्सव में सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का कड़ाई से पालन करें।
रामनगर के मेयर ने भी कहा कि प्रशासन इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि LED रावण दहन, डिजिटल आतिशबाज़ी और ध्वनि-प्रदर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। इससे न केवल वातावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर होने वाली दुर्घटनाओं का खतरा भी न्यूनतम होगा।
स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोग और पर्यावरण संगठन इस कदम को सराहनीय मान रहे हैं। कई माता-पिता ने कहा कि इस निर्णय से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। रामनगर के एक व्यापारी ने कहा, “हम पहले से ही उत्सव की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन पटाखों पर रोक ने हमें पर्यावरण और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखने का अवसर दिया है। डिजिटल विकल्प अपनाने से हमारी परंपरा भी बनी रहेगी और लोग भी सुरक्षित रहेंगे।”
डिजिटल और LED विकल्प: नया पर्व का अनुभव
इस वर्ष दशहरा उत्सव में डिजिटल और LED तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। डिजिटल रावण दहन और LED शो न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे, बल्कि यह अनुभव भी अत्याधुनिक और आकर्षक होगा। आयोजकों के अनुसार, LED रोशनी और डिजिटल इफेक्ट्स के माध्यम से रावण दहन का दृश्य जीवंत और रोमांचक होगा। इससे लोगों को पारंपरिक उत्सव की भावना का अनुभव भी मिलेगा और वायु और ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भविष्य के लिए एक मिसाल बन सकती है। बड़े शहरों और पर्यटन स्थलों में भी डिजिटल और पर्यावरण-संवेदनशील उत्सवों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पर्यावरण और समाज के लिए संदेश
कोर्ट और प्रशासन का यह निर्णय केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं है। यह समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास है। प्रदूषण, सुरक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि पारंपरिक परंपराओं को अपनाते हुए भी हम आधुनिक और सुरक्षित विकल्प अपना सकते हैं।
डॉ. रश्मि सिंह कहती हैं, “जब हम बच्चों को दिखाते हैं कि कैसे परंपरा और आधुनिक तकनीक को साथ मिलाकर मनाया जा सकता है, तो यह भविष्य की पीढ़ी के लिए एक शिक्षाप्रद संदेश बनता है। पर्यावरण की रक्षा केवल नियमों से नहीं, बल्कि समुदाय की भागीदारी और जागरूकता से संभव है।”
प्रशासन की तैयारियाँ और आगामी योजना
रामनगर प्रशासन ने उत्सव के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, डिजिटल स्क्रीन सेटअप और LED रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, आयोजकों को मार्गदर्शन दिया गया है कि वे उत्सव स्थल पर पर्याप्त सफाई और कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करें।
मेयर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य दशहरा पर्व को न केवल पारंपरिक और मनोरंजक बनाना है, बल्कि इसे सुरक्षित और पर्यावरण-संवेदनशील बनाना भी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले वर्षों में भी इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
दैनिक प्रभातवाणी
इस वर्ष रामनगर में दशहरा उत्सव का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। पारंपरिक पटाखों और आग्नेयास्त्रों पर रोक, डिजिटल और LED विकल्पों का इस्तेमाल, और सुरक्षा व पर्यावरणीय मानकों का पालन इसे एक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-संवेदनशील पर्व बना देगा।
यह कदम न केवल रामनगर के लोगों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा है कि हम परंपरा और आधुनिकता, आनंद और सुरक्षा, उत्सव और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ संतुलित कर सकते हैं।