राहुल गांधी की लद्दाख को 6वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग: एक विस्तृत विश्लेषण

नई दिल्ली, 29 सितंबर 2029/ दैनिक प्रभातवाणी
राहुल गांधी की लद्दाख को 6वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग: एक विस्तृत विश्लेषण
भारत के कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में लद्दाख को भारतीय संविधान की 6वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है। यह मांग उस समय उठाई गई जब लद्दाख में स्थानीय लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकारों और स्वायत्तता की रक्षा के लिए आंदोलन तेज किया। इस लेख में हम राहुल गांधी की इस मांग के राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं का विश्लेषण करेंगे।
लद्दाख की वर्तमान स्थिति
लद्दाख, जो पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था, 2019 में भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) के रूप में पुनर्गठित किया गया। इस पुनर्गठन के बाद, लद्दाख के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकारों और स्वायत्तता की रक्षा के लिए विभिन्न मंचों पर आवाज उठाई है। विशेष रूप से, लद्दाख की प्रमुख जनजातियाँ, जैसे कि लद्दाखी और भूटिया, अपनी पारंपरिक जीवनशैली और संसाधनों की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं।
6वीं अनुसूची का महत्व
भारतीय संविधान की 6वीं अनुसूची विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों के लिए है। यह अनुसूची इन क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान करती है, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकारों और संसाधनों की रक्षा कर सकें। लद्दाख में भी ऐसी ही स्वायत्तता की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि स्थानीय समुदाय अपनी पारंपरिक जीवनशैली को बनाए रख सकें।
राहुल गांधी की मांग
राहुल गांधी ने लद्दाख के लोगों की मांग का समर्थन करते हुए कहा, “लद्दाख की अद्वितीय संस्कृति और परंपराएँ भाजपा और आरएसएस द्वारा हमले का शिकार हो रही हैं।” उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि लद्दाख को 6वीं अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि वहाँ के लोग अपनी आवाज उठा सकें और अपनी पहचान की रक्षा कर सकें।
लद्दाख में हालिया हिंसा
हाल ही में, लद्दाख के लेह क्षेत्र में 24 सितंबर 2025 को एक हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह प्रदर्शन लद्दाख को 6वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर था। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय भाजपा कार्यालयों में आगजनी की और पुलिस से संघर्ष किया। केंद्र सरकार ने इस हिंसा के लिए स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह हिंसा उनकी आवाज दबाने के प्रयासों का परिणाम है।
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी
प्रसिद्ध पर्यावरणविद और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक, जो लद्दाख को 6वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग के प्रमुख चेहरा हैं, को 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया और जोधपुर केंद्रीय जेल में बंद किया गया। उनकी गिरफ्तारी ने आंदोलनकारियों के बीच गहरी नाराजगी पैदा की है और इसे उनकी आवाज को दबाने का प्रयास माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
राहुल गांधी ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “लद्दाख की आवाज को दबाने के लिए भाजपा और आरएसएस ने चार युवाओं की हत्या की और सोनम वांगचुक को जेल में डाल दिया।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को लद्दाख की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
वहीं, भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि सरकार लद्दाख के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लद्दाख की भविष्यवाणी
लद्दाख के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान और स्वायत्तता की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। यदि केंद्र सरकार लद्दाख को 6वीं अनुसूची में शामिल करती है, तो इससे वहाँ के लोगों को अपनी पहचान और संसाधनों की रक्षा करने का अधिकार मिलेगा। हालांकि, यह कदम केंद्र और राज्य के बीच शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसे सावधानीपूर्वक विचार और चर्चा के बाद ही लागू किया जाना चाहिए।
दैनिक प्रभातवाणी
राहुल गांधी की लद्दाख को 6वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम है, जो लद्दाख के लोगों की सांस्कृतिक पहचान और स्वायत्तता की रक्षा के लिए है। हालिया हिंसा और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और लद्दाख के लोगों की मांगों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाना चाहिए।