HC का फैसला: संतोषजनक कार्य न होने पर अतिथि शिक्षक सेवा विस्तार का दावा नहीं कर सकते, प्रिया जोशी की याचिका खारिज
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नैनीताल हाईकोर्ट में संविदा कर्मचारी की सेवा बहाली से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें एक संविदा कर्मचारी को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला त्रेपन सिंह राणा बनाम उत्तराखंड राज्य सरकार से जुड़ा हुआ है।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी सामने आया कि राज्य सरकार ने इस मामले में विशेष अपील दायर करने में 32 दिनों की देरी की थी। हालांकि सरकार की ओर से देरी को लेकर जो स्पष्टीकरण दिया गया, उसे अदालत ने संतोषजनक माना। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिसके बाद न्यायालय ने विलंब माफी आवेदन स्वीकार करते हुए अपील को नियमित नंबर आवंटित करने का निर्देश दे दिया।

राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति पूरी तरह से एक साल के अनुबंध के आधार पर की गई थी। सरकार ने बताया कि अनुबंध की धारा 7(4) के अनुसार किसी भी पक्ष को एक महीने का नोटिस देकर या एक महीने का वेतन देकर अनुबंध समाप्त करने का अधिकार है। सरकार ने यह भी कहा कि वह संबंधित कर्मचारी को एक महीने का वेतन देने के लिए तैयार है।

सरकार का मुख्य तर्क यह भी रहा कि कर्मचारी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि अनुबंध की शर्तों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एकल न्यायाधीश द्वारा कर्मचारी की सेवा बहाली का निर्देश देना उचित नहीं था। सरकार का कहना है कि संविदात्मक नियुक्तियों में विभाग के पास अनुबंध समाप्त करने की कानूनी शक्ति होती है।

खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विचारणीय मानते हुए प्रतिवादी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके साथ ही अदालत ने एकलपीठ द्वारा 24 दिसंबर 2025 को पारित उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें कर्मचारी को पुनः सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था। अब इस मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।