साइबर ठगी में 4 करोड़ रुपये का खुलासा | अंतरराष्ट्रीय गिरोह बेनकाब

Digital work of Computer Hacker or Programmer
रांची, 28 जून | विशेष संवाददाता
झारखंड पुलिस की साइबर शाखा ने एक बड़ी कार्रवाई के तहत अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों के गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बीते 6 महीनों में राज्य में करीब 4 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके थे। इस गिरोह का संचालन चीन, हांगकांग, दुबई और सिंगापुर जैसे देशों से किया जा रहा था।
कैसे करते थे ठगी?
गिरोह के सदस्य पहले आम लोगों को मोबाइल ऐप्स, निवेश प्लेटफॉर्म और पार्ट-टाइम नौकरी के बहाने फंसाते थे। WhatsApp और Telegram के ज़रिये लोगों से संपर्क कर उन्हें ‘कम मेहनत में ज्यादा कमाई’ का लालच दिया जाता था। जैसे ही लोग पैसे भेजते थे, उनके खाते ब्लॉक कर दिए जाते थे।
कहां से चला रहे थे नेटवर्क?
जांच में सामने आया है कि ठग चीन और हांगकांग से रिमोट एक्सेस के माध्यम से भारत के मोबाइल नंबरों और फर्जी वेबसाइटों के जरिए अपने शिकार को निशाना बना रहे थे।
उन्होंने भारतीय नंबरों पर ओटीपी और KYC आधारित धोखाधड़ी भी की। कई मामलों में फर्जी बैंक खाते और क्रिप्टो वॉलेट्स का इस्तेमाल हुआ है।
अब तक की कार्रवाई:
30 से अधिक संदिग्ध खातों को फ्रीज किया गया है
साइबर ठगों के 12 नेटवर्क ट्रेस हुए हैं
पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है जो भारत में इनके एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे
इंटरपोल और साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से अंतरराष्ट्रीय सहयोग मांगा गया है
पुलिस की अपील:
साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, निवेश करने से पहले स्रोत की जांच करें, और कभी भी व्यक्तिगत जानकारी किसी से न साझा करें।
एडवाइजरी:
“यदि कोई भी आपको ऑनलाइन इनकम, ट्रेडिंग ऐप, या फॉरेक्स/क्रिप्टो इनवेस्टमेंट का ऑफर दे — तो सतर्क हो जाएं। सबसे पहले स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर जानकारी दें।”
— राजीव कुमार, साइबर डीएसपी, झारखंड पुलिस