March 1, 2026

स्वास्थ्य: उत्तराखंड में कुष्ठ रोग (Leprosy) अब “नोटिफाएबल डिजीज” घोषित

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स्वास्थ्य: उत्तराखंड में कुष्ठ रोग (Leprosy) अब “नोटिफाएबल डिजीज” घोषित
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दैनिक प्रभातवाणी
देहरादून | उत्तराखंड | 28 फरवरी 2026

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कुष्ठ रोग यानी Leprosy को राज्य में “नोटिफाएबल डिजीज” घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, क्लीनिकों तथा स्वास्थ्य संस्थानों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे कुष्ठ रोग से संबंधित हर मरीज की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को निर्धारित प्रणाली के तहत उपलब्ध कराएं। सरकार का मानना है कि इस कदम से बीमारी की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि कई मामलों में मरीज निजी अस्पतालों में उपचार तो करा रहे थे, लेकिन उनकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाती थी। इससे वास्तविक आंकड़ों का आकलन करना मुश्किल हो जाता था और रोग नियंत्रण की रणनीति प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाती थी। अब नोटिफिकेशन लागू होने के बाद हर नए और पुराने मरीज का डेटा राज्य स्तर पर संकलित किया जाएगा, जिससे बीमारी की निगरानी और उपचार व्यवस्था अधिक सटीक बन सकेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुष्ठ रोग एक बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो त्वचा और नसों को प्रभावित करती है। हालांकि यह पूरी तरह इलाज योग्य रोग है और शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। सरकार का उद्देश्य यही है कि किसी भी मरीज को सामाजिक भय या जानकारी के अभाव में इलाज से वंचित न रहना पड़े। समय पर दवा मिलने से न केवल रोग नियंत्रित होता है बल्कि संक्रमण फैलने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।

स्वास्थ्य विभाग अब जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को और मजबूत करेगा। आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों और मेडिकल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध लक्षणों वाले लोगों की पहचान कर उन्हें जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें। साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे ताकि समाज में कुष्ठ रोग को लेकर फैली गलत धारणाओं और भेदभाव को समाप्त किया जा सके।

राज्य सरकार का मानना है कि नोटिफाएबल डिजीज घोषित किए जाने से रोग की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन योजना को भी बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम लोगों से अपील की है कि त्वचा पर सुन्न धब्बे, संवेदना कम होना या नसों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, क्योंकि शुरुआती इलाज ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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