March 2, 2026

हरिद्वार में मस्जिद के इमाम पर 7 वर्षीय बच्चे के साथ गंभीर आरोप: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किया संज्ञान

हरिद्वार में मस्जिद के इमाम पर 7 वर्षीय बच्चे के साथ गंभीर आरोप: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किया संज्ञान

हरिद्वार में मस्जिद के इमाम पर 7 वर्षीय बच्चे के साथ गंभीर आरोप: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किया संज्ञान

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हरिद्वार, 29 अगस्त 2025 – हरिद्वार जिले में एक मस्जिद के इमाम पर 7 वर्षीय मासूम बच्चे के साथ यौन शोषण का गंभीर आरोप सामने आया है। इस घटना ने पूरे जिले और आसपास के समुदाय में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है, वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी तुरंत संज्ञान लिया है और मामले में कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

प्रारंभिक रिपोर्ट

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना हरिद्वार के एक छोटे मोहल्ले में स्थित मस्जिद में हुई। आरोपित इमाम पर स्थानीय बच्चे के साथ अनुचित और गैरकानूनी कार्य करने का आरोप है। घटना के उजागर होने के बाद परिजन ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और फिलहाल बच्चे को सुरक्षा प्रदान की गई है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, उन्होंने आरोपी इमाम को तलब किया है और उसकी कथित गतिविधियों की पड़ताल शुरू कर दी है। इसके साथ ही बच्चे और उसके परिवार के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता की व्यवस्था की गई है, ताकि बच्चे को इस कठिन दौर में सुरक्षा और समर्थन मिल सके।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका

NHRC ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हरिद्वार जिले के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें घटना का विवरण, अब तक की गई कार्रवाई और आगे की योजना शामिल हो। NHRC ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया है कि आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जाए और बच्चे के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

आयोग ने इस मामले को बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से लिया है। NHRC के नोटिस में कहा गया है कि “बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया

हरिद्वार जिले के पुलिस अधीक्षक ने मीडिया को बताया कि मामले में शुरुआती जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आरोप गंभीर हैं और पूरी जांच पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से की जाएगी। साथ ही पुलिस ने आश्वस्त किया कि बच्चे और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जा रही है और उन्हें किसी प्रकार की मानसिक परेशानी से बचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

जिलाधिकारी ने भी कहा कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से भी शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।

सामाजिक और सामुदायिक प्रतिक्रिया

इस घटना ने हरिद्वार के स्थानीय समुदाय में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा को लेकर स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्काल न्याय की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में न केवल आरोपी को सजा मिलनी चाहिए, बल्कि बच्चों और उनके परिवार को मानसिक और सामाजिक सहायता प्रदान करना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से आग्रह किया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।

कानूनी दृष्टिकोण

भारतीय कानून के तहत किसी भी नाबालिग के साथ यौन शोषण एक गंभीर अपराध है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 और पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत ऐसे अपराधों के लिए कठोर सजा का प्रावधान है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा, और जांच के दौरान सभी सबूतों को संकलित कर शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि POCSO अधिनियम न केवल बच्चों की सुरक्षा करता है, बल्कि उनके परिवारों और समाज को भी यह संदेश देता है कि बच्चों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आगे की कार्रवाई

NHRC ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दोषी के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करनी होगी। साथ ही आयोग ने इस मामले की मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी है। सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक संगठन इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि बच्चे को न्याय मिलने में कोई बाधा न आए।

पुलिस और प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि आरोपी इमाम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और बच्चे को न्याय दिलाने में किसी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी।

दैनिक प्रभातवाणी

हरिद्वार में सामने आया यह मामला समाज के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह घटना न केवल प्रशासन और कानून प्रवर्तन के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के हर वर्ग को जागरूक होने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता भी बताती है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सक्रियता इस मामले में उम्मीद की किरण है कि दोषी को न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।