January 13, 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 22 सितंबर तक जारी हो अंतरिम प्रोमोशन सूची, LT ग्रेड शिक्षकों को वर्षों की जंग के बाद राहत

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: 22 सितंबर तक जारी हो अंतरिम प्रोमोशन सूची, LT ग्रेड शिक्षकों को वर्षों बाद राहत की उम्मीद
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देहरादून, 19 सितंबर 2025 | दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड में लंबे समय से लंबित पड़ी LT ग्रेड शिक्षकों और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के स्टाफ की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। नैनीताल हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि 22 सितंबर 2025 तक अंतरिम प्रोमोशन सूची हर हाल में जारी की जाए, अन्यथा इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। इस आदेश ने राज्यभर के हजारों शिक्षकों में उम्मीद की नई किरण जगा दी है, जो वर्षों से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


पदोन्नति प्रक्रिया में वर्षों से अटकी फाइलें

उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों में कार्यरत LT ग्रेड शिक्षक लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। 2016 से अब तक पदोन्नति प्रक्रिया बार-बार टलती रही, जिससे न केवल शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हुआ बल्कि विद्यालयों में शिक्षण कार्य भी बाधित हुआ। कई जिलों में प्रधानाचार्य और विषयवार प्रवक्ताओं के पद खाली हैं, जिसके चलते पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ा है।

हाल ही में चमोली जिले के एक शिक्षक ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर यह सवाल उठाया कि “हम नौ साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार हर बार केवल आश्वासन देती है।” शिक्षकों का कहना है कि वरिष्ठता सूची तैयार होने के बावजूद सरकार समय पर प्रोमोशन नहीं कर रही, जबकि रिक्त पद लगातार बढ़ते जा रहे हैं।


पुराने फैसले बने मिसाल

हाईकोर्ट का यह ताज़ा आदेश कोई अलग मामला नहीं है, बल्कि पिछले कई सालों से अदालतें लगातार सरकार को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देती रही हैं।

  • भुवन चंद्र कांडपाल मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर 1990 से LT ग्रेड शिक्षकों को नियमितीकरण और वरिष्ठता का अधिकार देने का आदेश दिया था। बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस फैसले को “judgement in rem” माना, यानी यह सभी समान परिस्थितियों वाले शिक्षकों पर लागू होगा।

  • रामलाल भट्ट बनाम राज्य: शिक्षा विभाग ने शारीरिक शिक्षा (Physical Education) के लिए B.P.Ed डिग्री अनिवार्य कर दी थी, जबकि विज्ञापन पुराने नियमों पर जारी हुआ था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन उसी नियमावली पर होना चाहिए जिस पर विज्ञापन निकाला गया था।

  • 30% कोटा विवाद: जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापकों के लिए LT ग्रेड में 30% प्रमोशन कोटा तय है, लेकिन नियमों में बदलाव और नई शर्तों के कारण कई पात्र शिक्षकों के नाम सूची से बाहर कर दिए गए। अदालत ने बार-बार सरकार को पुराने नियमों के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

इन फैसलों ने यह साफ कर दिया कि शिक्षक प्रमोशन में देरी केवल प्रशासनिक लापरवाही है, जिसे कानूनी संरक्षण नहीं मिल सकता।


शिक्षक संघों का बढ़ता दबाव

लंबे समय से जारी इस अनिश्चितता ने शिक्षक संगठनों को आंदोलन की राह पर ला दिया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बीते महीनों में कई बार धरने और रैलियाँ निकाली गईं। शिक्षक संघों का कहना है कि राज्य सरकार पदोन्नति प्रक्रिया को टालकर शिक्षकों के अधिकारों का हनन कर रही है।

हाल ही में लगभग 5,000 शिक्षकों ने चेतावनी दी कि अगर 22 सितंबर तक अंतरिम सूची जारी नहीं की गई तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। इसके अलावा, शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर प्रधानाचार्य और हेडमास्टर के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती (Direct Recruitment) का विरोध किया। उनका कहना है कि इन पदों को केवल प्रमोशन के माध्यम से ही भरा जाना चाहिए ताकि वरिष्ठ शिक्षकों को उनका हक मिल सके।


हाईकोर्ट की सख्ती और चेतावनी

नैनीताल हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पदोन्नति प्रक्रिया को टालना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अदालत ने साफ कहा कि “सरकार यह तर्क नहीं दे सकती कि सूची तैयार करने में समय लग रहा है। जब रिक्त पदों की जानकारी और सेवा अभिलेख पहले से मौजूद हैं, तो देरी का कोई औचित्य नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा तक अंतरिम सूची जारी नहीं की गई तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।


सरकार की सफाई और तैयारियाँ

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अंतरिम सूची तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठता सूची को जिला स्तर पर जांचा जा चुका है और 22 सितंबर तक अंतरिम प्रोमोशन सूची जारी कर दी जाएगी। शिक्षा विभाग का तर्क है कि नियमावली में बार-बार हुए बदलाव और लंबित अदालत मामलों के कारण प्रक्रिया में देरी हुई, लेकिन अब सभी विवादों का समाधान किया जा चुका है।


शिक्षा व्यवस्था पर असर

पदोन्नति में देरी का असर केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है। राज्य के कई इंटर कॉलेजों में विषयवार शिक्षकों की कमी बनी हुई है। प्रधानाचार्य और हेडमास्टर के सैकड़ों पद खाली हैं, जिसके कारण विद्यालयों के प्रशासनिक कामकाज में भी दिक्कतें आ रही हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पदोन्नति होने से अनुभवी और योग्य शिक्षक उच्चतर माध्यमिक स्तर पर पढ़ाने का मौका पाएंगे। इससे छात्रों को बेहतर शिक्षण सुविधा मिलेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।


आगे की राह

अब पूरा राज्य 22 सितंबर की तारीख का इंतजार कर रहा है। शिक्षकों का कहना है कि अगर इस बार भी सरकार ने समय पर सूची जारी नहीं की, तो वे हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे।

इस आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अदालत अब और देरी बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार के सामने अब दो ही विकल्प हैं – या तो तय समयसीमा में सूची जारी करे या फिर अवमानना की कार्यवाही का सामना करे।


दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड में LT ग्रेड शिक्षकों की पदोन्नति का मामला केवल सरकारी आदेश भर नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट का यह आदेश उन हजारों शिक्षकों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्होंने वर्षों तक न्याय और अपने अधिकार के लिए संघर्ष किया है। यदि 22 सितंबर तक अंतरिम प्रोमोशन सूची जारी होती है, तो न केवल शिक्षकों का इंतजार खत्म होगा, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।