₹800 करोड़ के LUCC घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, मुंबई से गिरफ्तार हुए दो मुख्य मास्टरमाइंड
Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित 800 करोड़ रुपये के एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने लंबे समय से फरार चल रहे दो प्रमुख आरोपियों किशन जैन और पंकज जैन को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को इस विशाल वित्तीय घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। सीबीआई के अनुसार इन दोनों ने निवेशकों से जुटाई गई रकम के हेरफेर, डायवर्जन और गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यह मामला उत्तराखंड के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है, जिसमें एक लाख से अधिक निवेशकों की मेहनत की कमाई दांव पर लग गई। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये जमा कराए और बाद में निवेशकों को उनका पैसा वापस नहीं मिला।

उत्तराखंड से लेकर कई राज्यों तक फैला था जाल

जांच में सामने आया है कि यह पूरा घोटाला ‘लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC)’ के माध्यम से संचालित किया गया। कंपनी ने उत्तराखंड सहित कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैलाया था। अकेले उत्तराखंड में ही संस्था की 35 से अधिक शाखाएं संचालित की जा रही थीं।

कंपनी ने निवेशकों को कम समय में अधिक रिटर्न देने का वादा किया। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जीवन भर की बचत, पेंशन और अन्य जमा पूंजी इस योजना में निवेश कर दी। बाद में जब भुगतान बंद हुआ तो घोटाले का खुलासा हुआ।

ब्रांड एंबेसडरों के जरिए बनाई गई भरोसे की छवि

जांच एजेंसियों के अनुसार कंपनी ने अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए फिल्म जगत के कुछ प्रसिद्ध चेहरों का भी इस्तेमाल किया। प्रचार अभियानों में अभिनेता Shreyas Talpade और Alok Nath जैसे नाम जुड़े थे। इन हस्तियों के प्रचार से आम लोगों के बीच कंपनी की छवि मजबूत बनी और बड़ी संख्या में निवेशकों ने कंपनी पर भरोसा किया। सीबीआई द्वारा पूर्व में दर्ज एफआईआर में इन नामों का भी उल्लेख किया गया था, हालांकि उनकी कानूनी भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

हाईकोर्ट के आदेश पर CBI को सौंपी गई जांच

घोटाले के सामने आने के बाद उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में धोखाधड़ी और निवेशकों के पैसे हड़पने से जुड़े कुल 18 मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की गंभीरता और प्रभावित लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए Central Bureau of Investigation को जांच सौंपी गई। यह निर्णय Uttarakhand High Court के निर्देश के बाद लिया गया था।

सीबीआई ने जांच के दौरान बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, संपत्ति रिकॉर्ड और विभिन्न दस्तावेजों की गहन पड़ताल की। इसी प्रक्रिया के दौरान फरार आरोपियों की लोकेशन का पता लगाकर उन्हें मुंबई से गिरफ्तार किया गया।

अब तक सात बड़ी गिरफ्तारियां

सीबीआई इससे पहले मई 2026 में इस मामले के मुख्य सरगना सुशील गोखरू सहित पांच वरिष्ठ प्रमोटरों को गिरफ्तार कर चुकी है। किशन जैन और पंकज जैन की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक कुल सात प्रमुख गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। एजेंसी का मानना है कि घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

निवेशकों की रकम वापस दिलाने की तैयारी

जांच एजेंसी अब घोटाले से अर्जित संपत्तियों की पहचान और कुर्की की दिशा में भी काम कर रही है। सीबीआई ने मामले से संबंधित वित्तीय विवरण राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ साझा किए हैं ताकि आरोपियों की संपत्तियों को फ्रीज किया जा सके। इसके बाद बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (BUDS) एक्ट के तहत पीड़ित निवेशकों को धन वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

निवेशकों को अब भी न्याय का इंतजार

घोटाले से प्रभावित हजारों परिवार वर्षों से अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कई निवेशकों ने अपनी जीवन भर की बचत इस संस्था में जमा कर दी थी। अब सीबीआई की ताजा कार्रवाई से पीड़ितों में उम्मीद जगी है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उनकी फंसी हुई रकम वापस मिल सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *