Spread the loveदैननिक प्रभातवाणी |देहरादून | 5 अप्रैल 2026 |देश की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Narendra Modi 14 अप्रैल 2026 को बहुप्रतीक्षित Delhi–Dehradun Expressway का उद्घाटन करेंगे। लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे को उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाला माना जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की दूरी, जो वर्तमान में 6 से 7 घंटे में पूरी होती है, घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगी। इससे न केवल उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ते हुए लगभग 210 किलोमीटर लंबा बनाया गया है। इसे आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। विशेष बात यह है कि इस परियोजना को चार प्रमुख सेक्शन में बांटकर तैयार किया गया है, जिससे निर्माण कार्य को तेजी से पूरा किया जा सके और यातायात को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सके।पहला सेक्शन दिल्ली से बागपत तक का है, जिसकी शुरुआत दिल्ली के अक्षरधाम क्षेत्र से होती है। इस हिस्से को एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है ताकि दिल्ली के ट्रैफिक से राहत मिल सके और वाहन बिना रुकावट के सीधे एक्सप्रेसवे पर प्रवेश कर सकें। इस सेक्शन को इस तरह से तैयार किया गया है कि यात्रियों को राजधानी क्षेत्र में ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े और तेज गति से यात्रा संभव हो सके।दूसरा सेक्शन बागपत से सहारनपुर तक का है, जिसे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया गया है। यह हिस्सा बागपत, बरौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जैसे महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है। इस हिस्से में कई इंटरचेंज और अंडरपास बनाए गए हैं ताकि स्थानीय यातायात प्रभावित न हो और लंबी दूरी के वाहन बिना बाधा के अपनी यात्रा पूरी कर सकें। इस सेक्शन को उत्तर प्रदेश के कई औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है।तीसरा सेक्शन सहारनपुर बायपास से गणेशपुर तक का है। इस हिस्से का मुख्य उद्देश्य सहारनपुर शहर के अंदर लगने वाले ट्रैफिक जाम से बचाना है। इससे यात्रा समय में और कमी आएगी और लंबी दूरी के वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना सीधे एक्सप्रेसवे से गुजरने की सुविधा मिलेगी। इस सेक्शन से औद्योगिक क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा और माल परिवहन तेज होगा।चौथा और सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन गणेशपुर से देहरादून तक का है, जो उत्तराखंड के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस हिस्से में Rajaji National Park के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए विशेष एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है ताकि वन्यजीवों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। इस एक्सप्रेसवे में लगभग 12 से 14 किलोमीटर लंबा वन्यजीव कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिसे एशिया के सबसे बड़े वाइल्डलाइफ कॉरिडोर में शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा देहरादून प्रवेश के पास स्थित Datkali Tunnel को भी इस परियोजना में शामिल किया गया है, जिससे देहरादून शहर में प्रवेश और अधिक सुगम हो जाएगा।इस एक्सप्रेसवे में कुल छह लेन बनाई गई हैं, जिन्हें भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही कई रेलवे ओवरब्रिज, अंडरपास और इंटरचेंज बनाए गए हैं ताकि यातायात सुचारु बना रहे। एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जिससे यात्रियों को तेज और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।इस परियोजना से उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को सबसे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। दिल्ली से देहरादून की दूरी कम होने से मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। होटल, टैक्सी, स्थानीय व्यापार और छोटे कारोबारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उत्तराखंड के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।सरकार का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली और उत्तराखंड के बीच आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और माल परिवहन की लागत कम होगी। साथ ही आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस और आपदा प्रबंधन के लिए भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण साबित होगा।14 अप्रैल को उद्घाटन के बाद इस एक्सप्रेसवे को आम जनता के लिए चरणबद्ध तरीके से खोला जा सकता है। इसके बाद दिल्ली से देहरादून तक की यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी। उत्तराखंड के लिए यह परियोजना विकास की नई राह खोलने वाली मानी जा रही है और आने वाले समय में यह एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है। Post Views: 3 Post navigationCBSE 2026-27: कक्षा 6 से 9 के सिलेबस में बड़ा बदलाव, तीन-भाषा फॉर्मूला और स्टैंडर्ड-एडवांस्ड स्तर लागू उत्तराखंड में मौसम खराब, पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट