January 14, 2026

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर ईडी का शिकंजा: ज़मीन सौदों में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दायर हुई चार्जशीट

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर ईडी का शिकंजा: ज़मीन सौदों में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दायर हुई चार्जशीट
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पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर ईडी का शिकंजा: ज़मीन सौदों में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दायर हुई चार्जशीट

देहरादून, 19 जुलाई 2025 | दैनिक प्रभातवाणी विशेष रिपोर्ट

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के घेरे में हैं। एजेंसी ने उनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून की विशेष अदालत में  चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला रावत द्वारा कथित तौर पर अवैध ज़मीन सौदों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी और काले धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

प्रवर्तन निदेशालय को सूचना मिली थी कि डॉ. हरक सिंह रावत ने मंत्री रहते हुए विभिन्न क्षेत्रों में ज़मीनों की खरीद-फरोख्त में अनियमितताएं की थीं। खासतौर पर पौड़ी, कोटद्वार, हरिद्वार और देहरादून ज़िलों में रावत और उनके नजदीकी लोगों ने कई संपत्तियां खरीदीं, जो कि संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यह लेन-देन उनकी घोषित आय और संपत्तियों से कहीं अधिक था।

ईडी ने इनपुट मिलने के बाद उनके और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज़ और कंपनियों की जांच की। इस जांच में पाया गया कि कुछ ज़मीनें फर्जी नामों से खरीदी गईं और कुछ रजिस्ट्रियों में ज़मीन की कीमत वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम दर्शाई गई, जिससे टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि होती है।

 संपत्ति के नाम पर क्या खुलासे हुए?

जांच के दौरान सामने आया कि हरक सिंह रावत और उनके परिवार के पास उत्तराखंड में दर्जनों बीघा कृषि और आवासीय भूमि है। कुछ संपत्तियों को उनके नाम से नहीं, बल्कि उनके नौकरों, कर्मचारियों और कथित फर्जी कंपनियों के नाम पर खरीदा गया था। इन संपत्तियों की अनुमानित बाज़ार कीमत ₹40 करोड़ से अधिक आंकी गई है।

चार्जशीट में उल्लेख किया गया है कि एक फर्म जिसका संचालन हरक सिंह रावत के करीबियों द्वारा किया जा रहा था, ने पिछले कुछ वर्षों में कई संदिग्ध लेन-देन किए। यह लेन-देन कैश के माध्यम से किए गए थे, जो रियल एस्टेट और फार्महाउस के निर्माण में लगाए गए।

 ईडी ने क्या-क्या जब्त किया?

जांच एजेंसी ने अब तक की कार्रवाई में करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच किया है, जिनमें देहरादून और हरिद्वार में स्थित फार्महाउस, लक्ज़री वाहन, और बैंक खाते शामिल हैं। ईडी की टीम ने कोटद्वार स्थित एक फार्महाउस में भी छापा मारा था, जहां से कुछ अहम दस्तावेज़, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक डाटा जब्त किया गया है।

 परिवार और सहयोगियों की भूमिका

हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति गुसाईं, जो स्वयं भी राजनीति में सक्रिय हैं, उनके नाम भी कुछ संपत्तियां रजिस्टर्ड पाई गईं। हालांकि अनुकृति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि सभी संपत्तियां वैध रूप से खरीदी गई हैं। वहीं कुछ करीबी रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर भी फर्जी कंपनियों के ज़रिए ज़मीन की खरीदारी हुई है, जिसे लेकर भी जांच जारी है।

 चार्जशीट में क्या-क्या आरोप?

ईडी द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु हैं:

  • मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए ज़मीन सौदे किए गए।

  • फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर संपत्तियां खरीदी गईं।

  • अवैध नकदी का प्रयोग कर काली कमाई को वैध बनाने की कोशिश की गई।

  • परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों के नाम पर संपत्तियां दर्ज की गईं।

  • कुछ विदेशी ट्रांजेक्शनों का भी ज़िक्र है, जिनकी जांच आयकर विभाग और विदेश मंत्रालय कर रहे हैं।

 हरक सिंह रावत का क्या कहना है?

इस पूरे प्रकरण पर डॉ. हरक सिंह रावत ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि वह सभी आरोपों का कानूनी तरीके से जवाब देंगे और अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।

उनका यह भी कहना था कि बीजेपी सरकार उन्हें राजनीति से बाहर करने के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। “मेरे खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई हो रही है। मैं पहले भी कई बार इस तरह की साजिशों का सामना कर चुका हूं और अब भी न्यायपालिका पर मुझे पूरा भरोसा है,” – डॉ. रावत ने कहा।

 राजनीतिक हलकों में उथल-पुथल

इस मामले के खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इसे बदले की राजनीति करार दिया है, वहीं सत्ताधारी दल भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, “हरक सिंह रावत लंबे समय से भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे रहे हैं। अगर ईडी उनके खिलाफ सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रही है तो यह स्वागत योग्य कदम है।”

 आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी?

अब चूंकि चार्जशीट अदालत में दाखिल हो चुकी है, इसलिए जल्द ही विशेष अदालत इस पर संज्ञान लेगी और अगली सुनवाई की तारीख तय करेगी। यदि कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान लेती है, तो हरक सिंह रावत और अन्य नामजद आरोपियों को समन भेजा जाएगा और पूछताछ की प्रक्रिया शुरू होगी। अगर आरोप प्रमाणित होते हैं, तो उन्हें कड़ी सजा हो सकती है, जिसमें 3 से 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना शामिल है।

 क्या यह अकेला मामला है?

नहीं, इससे पहले भी हरक सिंह रावत का नाम विवादों में रहा है। चाहे वन विभाग में अनियमित नियुक्तियों का मामला हो या फिर कोटद्वार में करोड़ों रुपये की योजना में गड़बड़ी – डॉ. रावत की छवि पर पहले भी कई बार सवाल उठे हैं। हालांकि उन्होंने हर बार इन आरोपों को खारिज किया है।

 दैनिक प्रभातवाणी

राज्य की राजनीति में बड़ा नाम और लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. हरक सिंह रावत एक बार फिर कानूनी घेरे में हैं। मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि इस केस की कानूनी दिशा किस ओर जाती है और क्या उत्तराखंड की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ आएगा?


 स्रोत: ईडी की चार्जशीट, मीडिया इनपुट और राजनीतिक बयानों पर आधारित।