January 15, 2026

कांवड़ यात्रा में करंट लगने से दर्दनाक हादसा – श्रद्धालुओं की आस्था पर टूटा बिजली का कहर

कांवड़ यात्रा में करंट लगने से दर्दनाक हादसा – श्रद्धालुओं की आस्था पर टूटा बिजली का कहर
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कांवड़ यात्रा में करंट लगने से दर्दनाक हादसा – श्रद्धालुओं की आस्था पर टूटा बिजली का कहर

दैनिक प्रभातवाणी \ 22 जुलाई 2025
स्थान: हरिद्वार-नजीबाबाद बॉर्डर, उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड सीमा

उत्तर भारत की विशाल धार्मिक परंपरा और आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक – कांवड़ यात्रा – इन दिनों पूरे शबाब पर है। लाखों की संख्या में शिवभक्त “बोल बम” के जयकारों के साथ गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख जैसे पवित्र स्थलों से जल लेकर भक्तजन बिहार, झारखंड, यूपी, दिल्ली, राजस्थान और मध्यप्रदेश तक पैदल लौटते हैं। ऐसे में जहां यह यात्रा श्रद्धा का प्रतीक है, वहीं अफसोसजनक रूप से कुछ घटनाएं इस श्रद्धा को करुणा में बदल देती हैं।

22 जुलाई की देर रात उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के अंतर्गत हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग पर एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने पूरी कांवड़ यात्रा के शांत और श्रद्धालु वातावरण को झकझोर कर रख दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक हाई वोल्टेज तार के संपर्क में आ जाने से करंट पूरे क्षेत्र में फैल गया, जिससे 50 से अधिक कांवड़िये एक साथ जमीन पर गिर पड़े। इनमें से दो कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं और कुछ की हालत अभी भी नाज़ुक बनी हुई है।

 हादसे का कारण और घटनास्थल की स्थिति

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जिस क्षेत्र में यह हादसा हुआ, वहां विद्युत विभाग के एक खंभे से लटक रही हाई टेंशन लाइन काफी नीचे आ गई थी। जब एक बड़ा समूह कांवड़ियों का उस क्षेत्र से गुज़र रहा था, तभी एक लोहे का कांवड़ (या ध्वज) उस तार के संपर्क में आ गया, जिससे भारी करंट फैल गया। घटनास्थल पर ही अफरा-तफरी मच गई। कांवड़िये जोर-जोर से चिल्लाने लगे, कुछ बेहोश हो गए और कई सड़क पर गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बिजली का झटका इतना तेज था कि “सड़क पर एक चमक के साथ कई लोग एक साथ गिरते नजर आए।”

 राहत व बचाव कार्य

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ एंबुलेंस और दमकल विभाग भी मौके पर पहुंच गया। कांवड़ियों को तत्काल नजदीकी अस्पताल – बिजनौर जिला चिकित्सालय और रुड़की सिविल हॉस्पिटल – में भर्ती कराया गया। मृतकों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उनकी पहचान की प्रक्रिया चल रही है।

स्थानीय प्रशासन ने मौके पर मेडिकल टीमें तैनात कर दी हैं और घायलों को उचित चिकित्सा सुविधा देने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, प्रशासन की लापरवाही और बिजली विभाग की तकनीकी चूक को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। कई स्थानीय संगठनों और धार्मिक समितियों ने इस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

 श्रद्धालुओं का गुस्सा – “बिजली विभाग जिम्मेदार”

कांवड़ियों का कहना है कि इस रूट पर पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं होती रही हैं, लेकिन प्रशासन ने कोई स्थायी उपाय नहीं किया। “इतनी बड़ी संख्या में लोग पैदल चल रहे हैं, और फिर भी हाई वोल्टेज तार नीचे झूल रहे हैं – यह लापरवाही नहीं तो और क्या है?” – यह कहना था एक घायल कांवड़ यात्री का।

दूसरी ओर, कई सामाजिक संगठनों ने कांवड़ मार्गों पर सभी बिजली लाइनों को भूमिगत (underground) करने की मांग दोहराई है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे रोके जा सकें। धार्मिक यात्राओं के दौरान बिजली विभाग और नगर प्रशासन की सक्रियता की कमी बार-बार चर्चा में आती रही है।

 प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया

घटना के बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के संबंधित ज़िलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने एक संयुक्त बैठक की और एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर दुख जताया है और मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 मुआवज़ा देने की घोषणा की है।

धार्मिक संगठनों की अपील

कई धार्मिक संस्थाओं और अखाड़ा परिषद ने प्रशासन से अपील की है कि वे कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी प्रबंध करें और इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए बिजली विभाग को विशेष दिशा-निर्देश दिए जाएं। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि कांवड़ रूट की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और फायर ब्रिगेड की तैनाती की जाए।

 हादसे से मिली सीख – सुरक्षा ही सबसे बड़ी सेवा

हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के एक साथ चलते हैं, नृत्य करते हैं, हर हर महादेव के उद्घोष लगाते हैं। लेकिन जब ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं, तो यह केवल कुछ लोगों की मौत नहीं होती – यह पूरे धार्मिक उत्सव की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है। बिजली विभाग को चाहिए कि यात्रा से पहले सभी क्षेत्रों में विद्युत लाइनों की निगरानी करे, लूज़ तारों को ठीक करे और ज़रूरत पड़ने पर अस्थायी रूप से बिजली बंद रखे।

दैनिक प्रभातवाणी

यह हादसा न केवल एक प्रशासनिक चूक है, बल्कि श्रद्धा और जीवन की सुरक्षा में आई दरार भी है। यह समय है कि हम केवल धार्मिक आयोजन न करें, बल्कि उसमें भाग लेने वालों की सुरक्षा को भी उतना ही पवित्र मानें। सरकार, विभाग और जनता – तीनों को मिलकर इस तरह की त्रासदियों को रोकने की दिशा में सक्रियता दिखानी होगी।