Spread the loveनई दिल्ली। देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए Central Board of Secondary Education ने छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई कराई जाएगी। यह नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जाएगी।बोर्ड के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करना है। बदलती तकनीक और तेजी से बढ़ते डिजिटल वातावरण को देखते हुए अब स्कूली स्तर पर ही बच्चों को तकनीकी समझ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत छात्रों को लॉजिकल सोच विकसित करने, समस्या समाधान की क्षमता बढ़ाने और तकनीक के सुरक्षित व जिम्मेदार उपयोग की जानकारी दी जाएगी।नई व्यवस्था के अंतर्गत छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी जानकारी, डेटा की समझ, सरल प्रोग्रामिंग अवधारणाएं और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा बच्चों को यह भी सिखाया जाएगा कि तकनीक का सही और सुरक्षित उपयोग कैसे किया जाए। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों की रचनात्मकता और विश्लेषण क्षमता में भी वृद्धि होगी।इस बदलाव को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूलों में नई तकनीक आधारित शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही स्मार्ट क्लासरूम, इंटरैक्टिव लर्निंग टूल्स और प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है।शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक का प्रभाव हर क्षेत्र में बढ़ने वाला है। ऐसे में छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही इस दिशा में तैयार करना जरूरी है। इस फैसले को देश की शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में छात्रों को रोजगार और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर मिल सकेंगे। Post Views: 3 Post navigationनई शिक्षा नीति 2026 लागू: अब 4 साल की डिग्री, Multiple Entry-Exit और स्किल आधारित पढ़ाई