थोड़ा लंबी न्यूज बनाओ सभी पेपर से थोड़ा थोड़ा मुख्य पॉइंट 29 मार्च 2026: देहरादून में पर्यावरण को लेकर NGT सख्त, अवैध खनन-पेड़ कटान पर संयुक्त जांच समिति गठित
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देहरादून, 29 मार्च 2026: National Green Tribunal ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अवैध खनन, पेड़ कटान और वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए NGT ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर संयुक्त जांच समिति गठित करने के आदेश दिए हैं। इस कार्रवाई को उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मामला देहरादून के संवेदनशील वन क्षेत्रों और आसपास के इलाकों से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, अवैध निर्माण और खनन गतिविधियां चलने की शिकायतें सामने आई थीं। याचिका में आरोप लगाया गया कि इन गतिविधियों से क्षेत्र की जैव विविधता, जल स्रोत और भू-संतुलन पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा कि कई स्थानों पर बिना अनुमति के सड़क निर्माण और भूमि समतलीकरण का काम भी किया जा रहा है।

NGT ने मामले को गंभीर मानते हुए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस समिति में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तराखंड वन विभाग, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा देहरादून जिला प्रशासन के अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति को आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित क्षेत्र में कितने पेड़ों की कटाई हुई, क्या खनन गतिविधियां वैध थीं या अवैध, और किन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है। इसके साथ ही पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करने और सुधारात्मक कदम सुझाने के लिए भी समिति को निर्देश दिए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, जिस क्षेत्र में शिकायत की गई है वह पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यहां कई प्राकृतिक जल स्रोत और वन्यजीवों का आवास मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अवैध गतिविधियां जारी रहीं तो भूस्खलन, जल संकट और पारिस्थितिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

NGT ने अपने आदेश में कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए जुर्माना भी लगाया जा सकता है। NGT ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जांच के दौरान अवैध गतिविधियों को तुरंत रोका जाए।

इस कार्रवाई के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। देहरादून जिला प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग की टीमों को भी मौके पर भेजा गया है ताकि अवैध कटान और खनन की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जा सके।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने NGT के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां छोटी-सी लापरवाही भी बड़े प्राकृतिक खतरे का कारण बन सकती है। हाल के वर्षों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाओं को देखते हुए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और भी जरूरी हो गया है।

स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाया है कि लंबे समय से क्षेत्र में अवैध गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही थी। अब NGT के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मामले में निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

NGT की इस कार्रवाई को उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं और राज्य में अवैध खनन तथा पेड़ कटान पर सख्त नियंत्रण लागू किया जा सकता है।

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