Spread the loveलोहाघाट। दैनिक प्रभातवाणी उत्तराखंड के चंपावत जनपद में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को भावुक कर दिया है। लोहाघाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मरोड़ाखान-रायकोट के समीप उत्तराखंड परिवहन निगम की एक बस के ब्रेक अचानक फेल हो गए। बस में 34 यात्री सवार थे और बस धारचूला से टनकपुर की ओर जा रही थी। संकट की इस घड़ी में चालक बेनीराम भट्ट ने जिस साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, उसने 34 यात्रियों की जिंदगी बचा ली, लेकिन स्वयं उनकी जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस पहाड़ी मार्ग पर आगे बढ़ रही थी तभी चालक को ब्रेक सिस्टम में खराबी का अहसास हुआ। सड़क के एक ओर गहरी खाई थी और दूसरी ओर पहाड़। ऐसी स्थिति में बस के अनियंत्रित होने पर एक बड़ा हादसा हो सकता था। बस में बैठे यात्रियों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा भी नहीं था, लेकिन चालक बेनीराम भट्ट लगातार बस को नियंत्रित करने का प्रयास करते रहे। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी सूझबूझ और अनुभव का परिचय देते हुए बस को खाई की ओर जाने से रोका और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसी दौरान बस को रोकने और यात्रियों को सुरक्षित बचाने के प्रयास में वह स्वयं बस के पहिए की चपेट में आ गए। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। चालक बेनीराम भट्ट चंपावत जिले के बड़ोली गांव के निवासी थे और उत्तराखंड परिवहन निगम में लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके सहकर्मियों का कहना है कि वे हमेशा यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते थे और अपने शांत स्वभाव तथा जिम्मेदार कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सभी 34 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई। यात्रियों ने चालक की बहादुरी को याद करते हुए कहा कि यदि बेनीराम भट्ट ने अंतिम क्षण तक साहस और धैर्य न दिखाया होता तो बस गहरी खाई में गिर सकती थी और बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस वीर चालक को श्रद्धांजलि अर्पित की है। हजारों लोगों ने उन्हें उत्तराखंड का सच्चा नायक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि बेनीराम भट्ट के परिवार को विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा उनकी बहादुरी को सरकारी स्तर पर सम्मानित किया जाए। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में रोडवेज चालक प्रतिदिन कठिन और जोखिम भरे मार्गों पर यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। बेनीराम भट्ट का बलिदान इस बात का उदाहरण है कि कर्तव्य के प्रति समर्पण और मानव जीवन की रक्षा का संकल्प किसी भी व्यक्ति को असाधारण बना सकता है। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर 34 परिवारों की खुशियां बचा लीं। दैनिक प्रभातवाणी वीर चालक बेनीराम भट्ट को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि दिवंगत आत्मा को शांति तथा शोक संतप्त परिवार को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे। Post Views: 3 Post navigation हरिद्वार-दिल्ली हाईवे पर चलती वोल्वो बस में लगी भीषण आग, 32 यात्रियों की सूझबूझ से बची जा