January 15, 2026

92 मदरसों की जांच पर सख्ती: विशेष जांच दल (SIT) का गठन, कई अनियमितताओं की आशंका

उत्तराखंड में 92 मदरसों की जांच के आदेश, SIT गठित – धार्मिक शिक्षा संस्थानों पर प्रशासन की कड़ी नजर
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92 मदरसों की जांच पर सख्ती: विशेष जांच दल (SIT) का गठन, कई अनियमितताओं की आशंका

दैनिक प्रभातवाणी | लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता, धोखाधड़ी या धार्मिक कट्टरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी सिलसिले में प्रदेश के 92 मदरसों की कार्यप्रणाली, फंडिंग स्रोतों और गतिविधियों को लेकर व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं। विशेष रूप से गठित एसआईटी (Special Investigation Team) इन मदरसों की गहन छानबीन कर रही है। यह कार्रवाई सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राज्य की शैक्षणिक और सामाजिक संरचना की पारदर्शिता के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

मदरसों की भूमिका और वर्तमान संदर्भ

मदरसे भारत की पारंपरिक इस्लामी शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा रहे हैं। इनमें दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा देने की भी कोशिशें की जाती रही हैं। लेकिन हाल के वर्षों में कुछ मदरसों पर धार्मिक कट्टरता फैलाने, सरकारी अनुदान के दुरुपयोग, और संदिग्ध स्रोतों से फंड प्राप्त करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मदरसों की भूमिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में लगातार सवाल उठते रहे हैं।

राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह मदरसों की धार्मिक पहचान का सम्मान करती है, लेकिन यदि किसी भी संस्था का दुरुपयोग समाज को तोड़ने, युवाओं को गुमराह करने या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए हो रहा है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी सख्ती के तहत अब 92 मदरसों को चिन्हित कर उनके दस्तावेज़, वित्तीय लेनदेन, पाठ्यक्रम और शिक्षक नियुक्ति जैसे पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।

SIT गठन का उद्देश्य

एसआईटी का गठन इस उद्देश्य से किया गया है कि जांच निष्पक्ष, त्वरित और गहराई से की जा सके। जांच टीम में पुलिस विभाग, खुफिया एजेंसियों, जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। एसआईटी के गठन से पहले इन मदरसों के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनमें विदेशी फंडिंग, गैर-मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों की पढ़ाई, बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाकर फर्जी तरीके से अनुदान लेने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे।

एसआईटी इन सभी बिंदुओं पर मदरसों के दस्तावेज़ों की जांच कर रही है। इसके तहत शिक्षकों के प्रमाणपत्र, छात्रों की उपस्थिति, भवन निर्माण की अनुमति, भूमि स्वामित्व, और अनुदान प्राप्ति से जुड़े दस्तावेज़ों को खंगाला जा रहा है। कुछ मामलों में फर्जी नामों से अनुदान लेने और एक ही छात्र को कई मदरसों में दर्ज दिखाकर पैसा हासिल करने के आरोप सामने आए हैं।

पहले भी हो चुकी हैं कार्रवाईयाँ

यह पहला मौका नहीं है जब मदरसों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। वर्ष 2023 में भी राज्य के कुछ जिलों में संचालित मदरसों की जांच की गई थी, जिनमें से कई को अनियमितता के चलते बंद कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, बांग्लादेश और खाड़ी देशों से संदिग्ध फंडिंग के आरोपों की जांच NIA और ATS जैसे केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भी की गई है। तब भी कुछ मदरसों को लेकर चिंता जताई गई थी कि वे शिक्षा की आड़ में धार्मिक कट्टरता और अलगाववादी सोच को बढ़ावा दे रहे हैं।

राज्य सरकार ने पिछले वर्षों में मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए कई योजनाएँ चलाई थीं। लेकिन उस योजना का कुछ संस्थाओं ने दुरुपयोग कर लाभ उठाया, जबकि वास्तविक ज़रूरतमंद संस्थान उपेक्षित रह गए। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल उन्हीं संस्थानों तक सीमित हो जो ईमानदारी से शिक्षा का कार्य कर रहे हैं।

क्या हो सकते हैं परिणाम?

एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर कई बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। यदि कोई मदरसा दोषी पाया जाता है, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है, अनुदान बंद किया जा सकता है, और उसके संचालकों पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जा सकते हैं। यदि विदेशी फंडिंग का मामला सामने आता है और वह एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) के उल्लंघन में पाई जाती है, तो केंद्रीय एजेंसियों की ओर से कार्रवाई और कठोर हो सकती है।

इसके अतिरिक्त, सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में मदरसों का पंजीकरण केवल सख्त मानकों पर आधारित हो। ऐसे मदरसों को ही मान्यता मिलेगी जो पारदर्शिता और गुणवत्ता की कसौटी पर खरे उतरते हों। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि मदरसों की छवि को लेकर जो संदेह और भ्रांतियाँ हैं, वे भी दूर होंगी।

समाज की प्रतिक्रिया

एसआईटी जांच की खबर आने के बाद समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। एक ओर जहाँ कुछ धार्मिक संगठन इसे एक समुदाय विशेष को निशाना बनाए जाने के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाज का एक बड़ा तबका सरकार की इस कार्रवाई का स्वागत कर रहा है। उनका मानना है कि यदि कुछ मदरसों के कारण पूरे समुदाय की छवि पर दाग लग रहा है, तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई आवश्यक है।

कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने भी स्पष्ट कहा है कि जो मदरसे सच में शिक्षा का कार्य कर रहे हैं, उन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन यदि कोई संस्था शिक्षा की आड़ में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि चला रही है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे न केवल मदरसों की साख बचेगी, बल्कि उनका सामाजिक महत्व भी बढ़ेगा।

राज्य सरकार की स्पष्ट नीति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में “शिक्षा के नाम पर राजनीति या कट्टरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उनका मानना है कि सभी धर्मों को समान सम्मान मिले, लेकिन यदि कोई संस्था धर्म के नाम पर कानून का उल्लंघन करती है तो उस पर कार्रवाई निश्चित है। हाल के वर्षों में मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग, शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति, और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों पर कार्रवाई शामिल है।

मदरसों को लेकर सरकार की मंशा है कि वे आधुनिक शिक्षा का हिस्सा बनें और देश की मुख्यधारा में आएं। इसके लिए सरकार मदरसों को कंप्यूटर शिक्षा, विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में भी सहयोग दे रही है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि संस्थान ईमानदारी से कार्य करें।

आने वाले समय में क्या?

विशेष जांच टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी है और अगले कुछ हफ्तों में पहली रिपोर्ट सरकार को सौंपी जानी है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि जांच में गड़बड़ियाँ सामने आती हैं, तो यह उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी भी होगी कि धार्मिक या निजी संस्थानों को दी जाने वाली सुविधाओं पर लगातार निगरानी जरूरी है।

यह भी संभव है कि सरकार आगे चलकर राज्य के सभी मदरसों की डिजिटल मैपिंग कराए और उनकी गतिविधियों की निगरानी के लिए एक स्थायी तंत्र बनाए। शिक्षा विभाग पहले ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों का डेटा संकलित करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।


दैनिक प्रभातवाणी

दैनिक प्रभातवाणी का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और आगे बढ़ाना होना चाहिए, न कि विभाजन और कट्टरता फैलाना। यदि कोई संस्थान इस पवित्र कार्य में भ्रष्टाचार या देशविरोधी गतिविधियों का हिस्सा बनता है, तो उस पर कार्रवाई समाज के हित में है। सरकार की ओर से 92 मदरसों की जांच और SIT का गठन एक बड़ा कदम है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। समय की मांग है कि हम शिक्षा को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जोड़ें ताकि आने वाली पीढ़ियाँ सही दिशा में बढ़ सकें।