Sindoor Mango Uttarakhand – सितंबर में बिकेगा जब बाजार में आम नहीं होगा जीबी पंत विश्वविद्यालय ने विकसित की ‘सिंदूर’ आम की अनोखी किस्म

दैनिक प्रभातवाणी | 11 जुलाई 2025
वैज्ञानिक नवाचार की नई मिसाल: जीबी पंत विश्वविद्यालय ने विकसित की ‘सिंदूर‘ आम की अनोखी किस्म।
पंतनगर। उत्तराखंड के कृषि विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश के प्रतिष्ठित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों ने आम की एक नई प्रजाति ‘सिंदूर‘ को विकसित किया है। इस किस्म को विशेष रूप से सितंबर से अक्टूबर के बीच पकने के लिए तैयार किया गया है, जिससे यह आम पारंपरिक सीज़न के बाद भी बाजार में उपलब्ध रहेगा और किसानों को बेहतर दाम दिलाने में मदद करेगा।
इस किस्म को ‘Operation Sindoor’ के नाम पर सम्मानित भी किया गया है, जो भारतीय सेना के उस साहसिक अभियान को दर्शाता है, जिसमें कई राज्यों से आतंकी गतिविधियों का सफाया किया गया था। यह सम्मान उस प्रेरणा को समर्पित है जो देश सेवा और नवाचार दोनों को एक सूत्र में पिरोती है।
‘सिंदूर‘ आम की विशेषताएं
‘सिंदूर’ आम को विश्वविद्यालय के फल विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने विकसित किया है। यह आम न केवल अपने स्वाद और रंग के कारण विशेष है, बल्कि इसकी पकने की अवधि, भंडारण क्षमता, और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता इसे बाजार के लिए भी आदर्श बनाती है।
▪︎ प्रमुख विशेषताएं:
- पकने की अवधि: सितंबर के अंत से लेकर अक्टूबर तक
- स्वाद: अत्यंत मीठा, हल्की सौंफ जैसी सुगंध
- रंग: गहरे सिंदूरी रंग की आभा, जो इसे नाम से मेल कराती है
- आकार: मध्यम से बड़ा, लगभग 300–350 ग्राम
- भंडारण: सामान्य तापमान में 10–12 दिन तक सुरक्षित
- बीमारी-प्रतिरोधक क्षमता: अधिकतर फंगल और कीट रोगों से सुरक्षित
अनुसंधान और विकास की यात्रा
‘सिंदूर’ किस्म को विकसित करने की प्रक्रिया लगभग 6 वर्षों तक चली, जिसमें वैज्ञानिकों ने देशी और संकर आम की कई किस्मों को पारगमन कर यह नई किस्म तैयार की। वैज्ञानिकों का उद्देश्य एक ऐसी किस्म तैयार करना था, जो न केवल स्वाद में विशिष्ट हो, बल्कि बाज़ार की आवश्यकता के अनुरूप देर से पकने वाली भी हो।
इस शोध कार्य का नेतृत्व प्रो. डॉ. अरुण सिंह, प्रो. मनीषा जोशी और उनकी टीम ने किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह किस्म जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सहने में सक्षम है, और विशेषकर पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में इसे सफलता पूर्वक उगाया जा सकता है।
किसानों के लिए वरदान
‘सिंदूर’ किस्म आमतौर पर उस समय पकती है जब बाज़ार में आम की उपलब्धता लगभग समाप्त हो जाती है। ऐसे में यह किसानों को एक बड़ा आर्थिक लाभ दे सकती है क्योंकि मांग अधिक और आपूर्ति कम होने के चलते कीमतें अधिक मिलती हैं।
▪︎ संभावित लाभ:
- ₹80–₹120 प्रति किलो तक की औसत बाज़ार दर
- शीतगृह में संग्रहण की सुविधा
- फलों के निर्यात के लिए उपयुक्त
- छोटे किसानों के लिए कम निवेश में अधिक लाभ
विश्वविद्यालय ने पहले ही कुछ प्रगतिशील किसानों को सिंदूर की पौध उपलब्ध कराई है और प्रयोगात्मक रूप से इसके अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं।
उत्तराखंड की कृषि को नई दिशा
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि और बागवानी पर आधारित है। ‘सिंदूर’ जैसी नई किस्में इन क्षेत्रों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर स्मार्ट एग्रीकल्चर की ओर ले जाने का कार्य कर रही हैं।
‘सिंदूर’ आम की किस्म को अब राष्ट्रीय बागवानी मिशन, ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), और अन्य संस्थानों से पंजीकरण और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा रहा है।
संभावित निर्यात और वैश्विक बाज़ार
भारत दुनिया में आम का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, लेकिन अधिकतर निर्यात गर्मियों में होता है। ‘सिंदूर’ जैसी किस्में अब Post-Monsoon Season में वैश्विक बाजार को लक्षित करने में मदद करेंगी। विशेषकर खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका में इसकी निर्यात संभावना है।
इस किस्म को ऑर्गेनिक तरीके से उगाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मूल्य और बढ़ सके।
Operation Sindoor से प्रेरणा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘सिंदूर’ आम को उस गौरवशाली सैन्य अभियान के नाम पर समर्पित किया है जिसने देश में शांति और अखंडता को बनाए रखने में भूमिका निभाई। यह नाम न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि को सम्मानित करता है, बल्कि राष्ट्रसेवा और कृषि नवाचार को एक सूत्र में जोड़ता है।
दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड का जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय एक बार फिर यह सिद्ध करने में सफल रहा है कि देश की कृषि व्यवस्था में शोध, नवाचार और तकनीकी बदलाव से न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि किसानों की आय भी दोगुनी की जा सकती है।
‘सिंदूर’ आम की यह नई किस्म भविष्य में देशभर के बागवानी किसानों के लिए एक नये युग की शुरुआत साबित हो सकती है – जो स्वाद, रंग और लाभ सभी को साथ लेकर चलती है।