गुफा में आध्यात्मिक साधना करती मिली रूसी महिला, दो बेटियाँ भी साथ — वीजा 8 साल पहले हो चुका है समाप्त
ajaysemalty98 July 13, 2025
दैनिक प्रभातवाणी | विशेष रिपोर्ट
स्थान: गोकर्ण, कर्नाटक | तिथि: 13 जुलाई 2025
रिपोर्टर: विशेष संवाददाता
गुफा में आध्यात्मिक साधना करती मिली रूसी महिला, दो बेटियाँ भी साथ — वीजा 8 साल पहले हो चुका है समाप्त
कर्नाटक के गोकर्ण क्षेत्र की रामतीर्थ पहाड़ियों में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पुलिस और वन विभाग की टीम ने एक गुफा से रूसी मूल की महिला नीना कुटिना (उर्फ “मोहि”) और उसकी दो नाबालिग बेटियों को 9 जुलाई 2025 को सुरक्षित बाहर निकाला। यह मामला न सिर्फ प्रशासन, बल्कि सामाजिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
आध्यात्मिक साधना के लिए चुना जंगल का रास्ता
40 वर्षीय नीना कुटिना ने पुलिस को बताया कि वह आध्यात्मिक शांति की खोज में गोकर्ण आई थीं। उन्होंने पहले गोवा में समय बिताया और फिर दो हफ्ते पहले गोकर्ण के रामतीर्थ हिल्स की गुफा में आकर रहने लगीं। यह क्षेत्र घना जंगल, चट्टानी इलाका और जानवरों की उपस्थिति के कारण बेहद जोखिम भरा माना जाता है।
गुफा के बाहर सूखते कपड़े और धार्मिक चिन्ह देखकर स्थानीय लोगों को संदेह हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। जब पुलिस ने गुफा की तलाशी ली तो अंदर महिला और उसकी दोनों बेटियाँ — प्रेया (6 वर्ष) और अमा (4 वर्ष) — साधना कर रही थीं।
वीजा समाप्त, फिर भी देश में अवैध रूप से निवास
जांच में पता चला कि नीना भारत में बिजनेस वीजा पर आई थीं जो 17 अप्रैल 2017 को ही समाप्त हो चुका था। इसके बाद वह नेपाल गईं और वहां से सितंबर 2018 में फिर भारत लौटीं। तब से वह बिना वैध वीजा के भारत में रह रही थीं, यानी करीब आठ वर्षों से अवैध रूप से देश में निवास कर रही थीं।
बचाव अभियान और सुरक्षा व्यवस्था
पुलिस, वन विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तीनों को सुरक्षित बाहर निकाला। पहले उन्हें कुमटा तालुका के महिला स्वागत केंद्र ले जाया गया और फिर एक स्थानीय महिला संन्यासिनी द्वारा संचालित आश्रम में रखा गया। बच्चों की मानसिक और शारीरिक स्थिति सामान्य पाई गई है।
रूस दूतावास और FRRO से संपर्क
पुलिस ने रूस दूतावास को सूचना दे दी है। अब नीना के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उनका मामला बेंगलुरु स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को भेजा गया है, जहाँ से देश निकाला (Deportation) की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
बच्चियाँ भारत में जन्मी
नीना ने यह भी बताया कि उसकी दोनों बेटियाँ भारत में ही जन्मी हैं। हालांकि उनके पास कोई वैध दस्तावेज या जन्म प्रमाणपत्र नहीं है। यह मुद्दा अब बाल अधिकार संरक्षण आयोग और विदेश मंत्रालय की निगरानी में है।
प्रशासन की अपील
गोकर्ण थाना प्रभारी ने कहा, “यह मामला संवेदनशील है। महिला मानसिक रूप से स्थिर प्रतीत होती है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। हम पूरी जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करेंगे।”
समाज की प्रतिक्रिया
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और आध्यात्मिक समुदायों में चर्चा का विषय बन गया है कि एक विदेशी महिला इतनी अवधि तक कैसे बिना किसी पहचान के भारत में रह सकी। वहीं कुछ लोग नीना की साधना भावना का सम्मान कर रहे हैं तो कुछ इस पूरे मामले को आव्रजन प्रणाली की विफलता मान रहे हैं।
दैनिक प्रभातवाणी
यह मामला भारत में अवैध निवास, बच्चों के अधिकार, अंतर्राष्ट्रीय संबंध और आध्यात्मिक खोज — चारों का अनोखा संगम बन चुका है। अब देखना होगा कि प्रशासन इसे किस तरह सुलझाता है और क्या आने वाले दिनों में भारत सरकार और रूस के बीच कोई विशेष कार्रवाई की जाती है।