फ्रांस की प्रथम महिला को लेकर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज – यूट्यूबर अमंडाइन रॉय और लेखिका नताशा रे सुप्रीम कोर्ट के घेरे में

दैनिक प्रभातवाणी विशेष रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय समाचार | फ्रांस\ 17 जुलाई 2025
फ्रांस की प्रथम महिला को लेकर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज – यूट्यूबर अमंडाइन रॉय और लेखिका नताशा रे सुप्रीम कोर्ट के घेरे में
पेरिस से आई एक अहम खबर ने फ्रांसीसी राजनीतिक और मीडिया हलकों में हलचल मचा दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट मैक्रों को लेकर लंबे समय से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठे दावों और अफवाहों पर अब कानून ने सख्त रुख अपनाया है।
राष्ट्रपति की पत्नी की लैंगिक पहचान को लेकर सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपमानजनक टिप्पणियाँ और कथित “खुलासे” करने वाली यूट्यूबर अमंडाइन रॉय और तथाकथित पत्रकार नताशा रे अब गंभीर कानूनी संकट में हैं। पहले यह मामला निचली अदालतों में ठुकरा दिया गया था, लेकिन अब ब्रिगिट मैक्रों और उनके भाई जीन-मिशेल ट्रोन्यू ने सीधे फ्रांसीसी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा मामला?
इस विवाद की शुरुआत 2021 में हुई जब फ्रांस की एक लेखक और सोशल मीडिया हस्ती नताशा रे ने यह दावा किया कि फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्रों असल में जन्म से पुरुष थीं और उनका असली नाम जीन-मिशेल ट्रोन्यू था।
इस झूठे और आधारहीन दावे को यूट्यूबर अमंडाइन रॉय ने अपने यूट्यूब चैनल पर न केवल जगह दी, बल्कि इसके समर्थन में कई ‘फर्जी साक्ष्य’ भी प्रस्तुत किए और इसे एक ‘बड़ा रहस्योद्घाटन’ बताया। रॉय ने इस मुद्दे पर कई वीडियो बनाकर लाखों दर्शकों को प्रभावित किया, जिससे ब्रिगिट और उनके परिवार की छवि को काफी नुकसान पहुँचा।
पहले अदालत ने क्यों खारिज किया मामला?
ब्रिगिट मैक्रों ने इस मानहानि और पहचान से छेड़छाड़ के मामले में पहले पेरिस की निचली अदालत में याचिका दायर की थी। परंतु अदालत ने यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि “यह व्यक्तिगत राय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है, और अफवाहें होने भर से यह अपराध नहीं बनता।”
इस निर्णय को लेकर ब्रिगिट और उनके परिवार में भारी असंतोष था, क्योंकि उन्हें यह निर्णय एक तरह की न्यायिक लापरवाही प्रतीत हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने वकीलों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया।
अब मामला सुप्रीम कोर्ट में, दांव पर प्रतिष्ठा
फ्रांसीसी सुप्रीम कोर्ट (Cour de Cassation) में अब इस अपील को दर्ज किया गया है, जिसमें ब्रिगिट मैक्रों और उनके भाई ने यूट्यूबर रॉय और लेखक नताशा रे के खिलाफ “संगठित मानहानि, पहचान की चोरी और यौन-लैंगिक झूठ का प्रचार करने” जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
ब्रिगिट मैक्रों के वकीलों का कहना है कि यह केवल एक निजी हमला नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के राष्ट्रपति की गरिमा और प्रथम महिला की सार्वजनिक छवि पर आघात है। इसके साथ ही, यह महिलाओं के प्रति लैंगिक भेदभाव और ट्रांसफ़ोबिया को भी बढ़ावा देता है।
ब्रिगिट की प्रतिक्रिया – ‘मैं अपनी गरिमा के लिए लड़ रही हूं’
ब्रिगिट मैक्रों ने एक मीडिया संवाद में कहा,
“मैं केवल अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा नहीं कर रही, मैं हर उस महिला के लिए खड़ी हूं जिसकी पहचान को कभी किसी ने झूठ और अफवाहों से तोड़ने की कोशिश की हो।”
उन्होंने कहा कि अफवाहें एक हथियार बन गई हैं, जिन्हें अब सच्चाई से ज्यादा लोग महत्व देने लगे हैं। “इस पर चुप बैठना अब अन्याय के पक्ष में बैठने जैसा होगा,” उन्होंने जोड़ा।
सोशल मीडिया और फर्जी खबरों की भूमिका पर चिंता
इस पूरे प्रकरण ने सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों और गुमराह करने वाली सूचनाओं के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूरोप में यह बहस तेज हो गई है कि क्या यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इस प्रकार की सामग्री के लिए पर्याप्त नियंत्रण है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर अफवाहों की गति और पहुंच बहुत तेज होती है और जब ये किसी सार्वजनिक शख्सियत के खिलाफ हों, तो उनका प्रभाव और भी घातक होता है।
फ्रांस में कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन
फ्रांस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अत्यधिक महत्व दिया जाता है, लेकिन जब यह आज़ादी किसी की निजी पहचान, प्रतिष्ठा और लैंगिक गरिमा पर हमला करने लगे, तो यह स्वतंत्रता के दायरे से बाहर निकल जाती है।
ब्रिगिट के वकीलों ने इसी तर्क के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में यह अपील की है कि “यह अब केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सुनियोजित बदनाम करने की साजिश है।”
रॉय और रे का बचाव – ‘यह हमारा निजी शोध’
अमंडाइन रॉय और नताशा रे का दावा है कि उन्होंने केवल “अपने शोध” और “कुछ प्रमाण” के आधार पर तथ्यों को उजागर किया। उनका कहना है कि यह एक “स्वतंत्र खोजी रिपोर्ट” थी और इसका उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था।
हालांकि अदालत में इन तथ्यों की प्रमाणिकता पर सवाल उठे हैं और उन्हें “झूठे, भ्रामक और उद्देश्यपूर्ण दुष्प्रचार” करार दिया गया है।
आगे क्या? – सुप्रीम कोर्ट का फैसला बनेगा मिसाल
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अब यह मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। यदि ब्रिगिट और उनके भाई की याचिका पर कोर्ट दोष साबित करता है, तो यह फ्रांस की कानूनी व्यवस्था में एक मिसाल बनेगा, जो झूठी खबरों और व्यक्तिगत पहचान पर किए जाने वाले हमलों के खिलाफ एक कड़ा संदेश देगा।
साथ ही यह यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक चेतावनी होगी कि वे अब सामग्री के लिए अधिक उत्तरदायी ठहराए जा सकते हैं।
दैनिक प्रभातवाणी
फ्रांस में राष्ट्रपति की पत्नी को लेकर फैलाई गई अफवाहें अब केवल एक सोशल मीडिया विवाद नहीं, बल्कि एक संवैधानिक बहस और कानूनी चुनौती में बदल गई हैं। यह मामला न केवल ब्रिगिट मैक्रों की प्रतिष्ठा, बल्कि आधुनिक युग में डिजिटल नैतिकता, अभिव्यक्ति की सीमाएँ और व्यक्ति की पहचान की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
दैनिक प्रभातवाणी इस मुद्दे पर आगे की कार्यवाही पर नजर रखेगा और आपको हर अपडेट समय पर देगा।
📰 रिपोर्टर: विशेष संवाददाता, दैनिक प्रभातवाणी
🌐 वेबसाइट: www.dainikprbhatvani.com