January 15, 2026

उत्तराखंड के चमोली में अद्भुत चार सींगों वाला मेमना मिला, वैज्ञानिक और धार्मिक जगत में हलचल

उत्तराखंड के चमोली में अद्भुत चार सींगों वाला मेमना मिला, वैज्ञानिक और धार्मिक जगत में हलचल
Spread the love

उत्तराखंड के चमोली में अद्भुत चार सींगों वाला मेमना मिला, वैज्ञानिक और धार्मिक जगत में हलचल

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित कोटी गांव में हाल ही में एक ऐसा दुर्लभ नजारा देखने को मिला है, जिसने स्थानीय लोगों से लेकर वैज्ञानिक समुदाय तक को हैरत में डाल दिया है। यहां एक पशुपालक के बाड़े में जन्मे 5 महीने के एक मेमने (भेड़ के बच्चे) के चार सींग हैं। इस असामान्य जैविक संरचना को देखकर जहां गांव के लोग इसे दैवी चमत्कार मान रहे हैं, वहीं वैज्ञानिक इसे जेनेटिक उत्परिवर्तन (genetic mutation) का नतीजा मान रहे हैं और इस पर अध्ययन शुरू कर चुके हैं।


कैसे हुआ यह रहस्योद्घाटन?

कोटी गांव निवासी पशुपालक गोपाल सिंह ने जब इस मेमने को पहली बार देखा तो वे चौंक गए। उन्होंने बताया, “मैंने आज तक ऐसा कोई जानवर नहीं देखा। इसके सिर पर चार अलग-अलग दिशाओं में सींग निकले हुए हैं, जो सामान्य मेमनों की तुलना में काफी अधिक विकसित हैं।”

स्थानीय लोग इसे नंदा देवी और भगवान शिव का आशीर्वाद मान रहे हैं और मेमने की पूजा भी शुरू कर दी है। कई श्रद्धालु इसे देखने दूर-दूर से आ रहे हैं और गांव में अचानक एक तीर्थ जैसा माहौल बन गया है।


वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं?

उत्तराखंड पशु चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र रावत के अनुसार, “ऐसे मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। यह एक polyceraty नामक स्थिति हो सकती है, जिसमें एक जानवर के सिर पर सामान्य से अधिक सींग उगते हैं। यह आमतौर पर genetic mutation के कारण होता है, लेकिन इसके पीछे पर्यावरणीय कारण भी हो सकते हैं।”

संस्थान ने इस मेमने के DNA की जांच और जीन विश्लेषण शुरू कर दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह उत्परिवर्तन किस प्रकार हुआ और क्या यह पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकता है।


धार्मिक महत्व और मान्यताएं

उत्तराखंड में नंदा देवी, भगवान शिव और उनके वाहन नंदी बैल की पूजा बहुत श्रद्धा से की जाती है। इस संदर्भ में चार सींगों वाले मेमने को आध्यात्मिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि यह नंदा राजजात यात्रा 2026 का पूर्व संकेत हो सकता है, और इसे “नंदा के वचन का प्रतीक” माना जा रहा है।

स्थानीय पुजारी पंडित रमेश भट्ट का कहना है, “ऐसे चमत्कारी प्राणी सदियों में एक बार जन्म लेते हैं। यह सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि एक संकेत है।”


सरकारी प्रतिक्रिया और पशुपालन विभाग की सतर्कता

जैसे ही खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभाग ने इस पर संज्ञान लिया। विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे और मेमने की स्थिति का स्वास्थ्य परीक्षण किया। फिलहाल मेमना पूरी तरह स्वस्थ है और उसे किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं है।

डीएम चमोली ने भी इस विषय पर रिपोर्ट तलब की है और कहा है कि अगर यह मामला वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष है, तो इसे संरक्षित किया जाएगा।


मेमने को देखने उमड़ रही भीड़

गांव में रोजाना सैकड़ों लोग मेमने को देखने पहुंच रहे हैं। कई लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं, तो कुछ इसे देखने के लिए वीडियो शूट और फोटो क्लिक कर रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों को इससे अर्थव्यवस्था में भी लाभ हो रहा है। छोटे-छोटे स्टॉल लग गए हैं, और चाय-नाश्ते की बिक्री भी बढ़ गई है।


अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की भी नजर

इस मामले को लेकर कुछ अंतरराष्ट्रीय जैवविज्ञान शोध संस्थानों ने भी रुचि दिखाई है। एक कनाडाई रिसर्च संस्था ने इस केस पर विशेष रूप से अध्ययन की इच्छा जताई है। वे इसे “Genetic Wonder from the Himalayas” बता रहे हैं और जल्द ही अपनी टीम भेजने की तैयारी में हैं।


दैनिक प्रभातवाणी: प्रकृति का चमत्कार या विज्ञान की नई दिशा?

उत्तराखंड के इस शांत पर्वतीय गांव में जन्मे एक छोटे से मेमने ने पूरे राज्य का ध्यान खींच लिया है। जहां यह घटना धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ करती है, वहीं वैज्ञानिक समुदाय के लिए यह एक शोध का अनूठा विषय बन गई है।

अब देखना यह होगा कि यह चार सींगों वाला मेमना आने वाले समय में नए वैज्ञानिक निष्कर्षों और धार्मिक विश्वासों के बीच कैसा पुल बनता है।


 रिपोर्ट: दैनिक प्रभातवाणी संवाददाता, चमोली
 वेबसाइट: dainikprbhatvani.com