January 15, 2026

UKSSSC पेपर लीक मामला: 22 जुलाई को दो और अभियुक्त गिरफ्तार, जांच में आए नए मोड़

UKSSSC पेपर लीक मामला: 22 जुलाई को दो और अभियुक्त गिरफ्तार, जांच में आए नए मोड़
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UKSSSC पेपर लीक मामला: 22 जुलाई को दो और अभियुक्त गिरफ्तार, जांच में आए नए मोड़

दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून, 23 जुलाई 2025

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की बहुचर्चित पेपर लीक घोटाले की जांच एक बार फिर तेज़ हो गई है। 22 जुलाई 2025 को, राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस मामले में दो और अभियुक्तों को गिरफ्तार किया, जिससे इस भ्रष्टाचार के गहराते नेटवर्क की परतें और खुलने लगी हैं। इस भर्ती घोटाले में अब तक 50 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन ताज़ा गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि जांच एजेंसियां अब भी सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही हैं।

गिरफ्तारी की पुष्टि और अभियुक्तों की पहचान

STF ने जिन दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, उनमें से एक उधमसिंह नगर का रहने वाला कोचिंग संचालक है, जबकि दूसरा हरिद्वार स्थित एक पूर्व कंप्यूटर लैब ऑपरेटर है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने UKSSSC की स्नातक स्तर परीक्षा-2021 के प्रश्नपत्रों को लीक करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई थी।
गिरफ्तारी के समय STF के हाथों ऐसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज़ भी लगे हैं, जिनसे यह पुष्टि होती है कि दोनों अभियुक्तों ने परीक्षा से एक रात पहले पेपर को व्हाट्सएप और पेन ड्राइव के ज़रिए अभ्यर्थियों को भेजा था।

पेपर लीक की पृष्ठभूमि: पहले भी हो चुकी है कई गिरफ्तारियां

UKSSSC पेपर लीक मामला 2021 की स्नातक स्तर की परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने की शिकायतें आई थीं। जांच में सामने आया था कि प्रिंटिंग प्रेस, आयोग के कुछ अधिकारी, और कोचिंग माफिया की मिलीभगत से यह लीक हुआ था। STF और विजिलेंस की अब तक की कार्रवाई में पूर्व आयोग सचिव, प्रिंटिंग प्रेस कर्मियों, दलालों और कई अभ्यर्थियों को जेल भेजा जा चुका है।

STF की रणनीति और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य

22 जुलाई को की गई गिरफ्तारी के बाद STF ने बताया कि दोनों अभियुक्तों से मिले मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंक लेनदेन की जानकारी डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी गई है। ये साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि पेपर लीक कर उसे प्रदेश के कई हिस्सों में फैलाया गया था और इसके बदले लाखों रुपये नकद व डिजिटल माध्यम से वसूले गए।

एक STF अधिकारी ने बताया, “यह संगठित आपराधिक नेटवर्क किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। हमारी जांच का अगला चरण उन लोगों तक पहुंचेगा जो राजनीतिक संरक्षण में थे या इस गोरखधंधे को ऊपर से चला रहे थे।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और युवाओं में आक्रोश

UKSSSC पेपर लीक घोटाले की ताज़ा गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाए हैं कि वह केवल दिखावटी कार्रवाई कर रही है, जबकि असली मास्टरमाइंड अब भी बाहर हैं। दूसरी ओर सत्ताधारी दल ने STF की कार्रवाई को निष्पक्ष बताते हुए भरोसा दिलाया कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

इस बीच बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर जैसे शहरों में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सभी दोषियों को गिरफ्तार कर नई परीक्षा प्रक्रिया शुरू नहीं की जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

हाईकोर्ट की निगरानी में मामला

उत्तराखंड हाईकोर्ट इस मामले पर पहले ही सख्त रुख अपनाए हुए है। कोर्ट ने हाल ही में सरकार से पूछा था कि पेपर लीक मामले में जिन अभ्यर्थियों ने अनुचित तरीके से सफलता पाई, उनके खिलाफ क्या कदम उठाए गए। अब जबकि 22 जुलाई को दो और गिरफ्तारियां हुई हैं, तो उम्मीद की जा रही है कि अगली सुनवाई में कोर्ट STF की जांच प्रगति की समीक्षा करेगा।

भविष्य की दिशा: नई भर्ती प्रणाली पर विचार

इस घटनाक्रम ने राज्य की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में संकेत दिया कि राज्य सरकार जल्द ही एक नई डिजिटल-आधारित भर्ती प्रणाली शुरू करने पर विचार कर रही है, जिसमें बायोमेट्रिक हाजिरी, ऑनलाइन एग्ज़ाम मॉनिटरिंग और क्लाउड-बेस्ड प्रश्नपत्र सुरक्षित प्रणाली लागू की जाएगी।


दैनिक प्रभातवाणी

22 जुलाई 2025 को हुई यह गिरफ्तारी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि UKSSSC भर्ती घोटाले की परतें अभी पूरी तरह खुली नहीं हैं। यह केवल परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से किया गया धोखा है। STF की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन जनता अब यह देखना चाहती है कि क्या असली मास्टरमाइंड भी जल्द गिरफ्त में आते हैं, या यह मामला भी अन्य भ्रष्टाचारों की तरह समय के साथ धुंधला हो जाएगा।